फाइटर जेट उड़ाना कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए पायलट को विमान की तकनीक, मौसम, उड़ान के रास्ते और आपात स्थिति में लिए जाने वाले फैसलों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए. थाईलैंड की रानी सुथिदा ने अब इसी चुनौती को पार करते हुए अकेले ग्रिपेन फाइटर जेट उड़ाने की उपलब्धि अपने नाम कर ली है.
बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह उड़ान पिछले दिनों दक्षिणी थाईलैंड के सूरत थानी प्रांत में स्थित विंग 7 एयरबेस पर हुई. इस दौरान रानी ने स्वीडन में बने जेएएस 39सी ग्रिपेन फाइटर जेट को उड़ाया. यह सिंगल-सीट फाइटर जेट है. इसका मतलब है कि इसमें पायलट के अलावा किसी दूसरे पायलट के बैठने की जगह नहीं होती. उड़ान से पहले रानी को फ्लाइट प्लान के बारे में जानकारी दी गई. इसके बाद उन्होंने फाइटर जेट की जांच की और फिर उड़ान भरी. इस मौके पर थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न भी मौजूद रहे.
रानी सुथिदा के लिए यह सिर्फ एक और उड़ान नहीं थी, बल्कि उनके लंबे एविएशन करियर का एक अहम पड़ाव भी था. सिंगल-सीट फाइटर जेट में अकेले उड़ान भरने के बाद राजा ने उन्हें बधाई दी. बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, राजा ने रानी को फूलों का गुलदस्ता और ग्रिपेन ऑर्डर गोल्डन पैच दिया. यह खास सम्मान चिह्न ग्रिपेन फाइटर जेट उड़ाने से जुड़ा है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि रानी को पहले से ही कई तरह के विमान उड़ाने का अनुभव है. अब उनके अनुभव में अकेले फाइटर जेट उड़ाने की उपलब्धि भी जुड़ गई है.
रानी सुथिदा का एविएशन अनुभव केवल सैन्य विमानों तक सीमित नहीं है. बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वह अलग-अलग तरह के विमानों में कुल 1,188.48 घंटे की उड़ान भर चुकी हैं. उनके अनुभव में सेसना, पिलाटस और पाइपर जैसे विमान शामिल हैं. इसके अलावा वह बोइंग 737 जैसे यात्री विमान भी उड़ा चुकी हैं. यानी छोटे विमानों से लेकर बड़े यात्री विमानों तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के विमान उड़ाने की ट्रेनिंग ली है और अनुभव हासिल किया है. इतने लंबे उड़ान अनुभव के बावजूद ग्रिपेन के सिंगल-सीट वर्जन में अकेले उड़ान भरना उनके करियर की एक अलग उपलब्धि है. इस विमान को उड़ाने के लिए पायलट को अपने कौशल के साथ-साथ तेजी से फैसले लेने की क्षमता पर भी भरोसा करना पड़ता है.
(4) 🇹🇭 🔊 Video with sound inside the cockpit Thailand’s Queen Suthida piloting Gripen C during her first solo flight. https://t.co/dlNEzbQu29
— Нем🥖 (@wuthi11_) October 8, 2026
रानी सुथिदा ने पहली बार 13 मई 2010 को विमान उड़ाया था. उस समय उन्होंने बैंकॉक के विंग 6 एयरबेस पर सेसना टी-41डी विमान उड़ाया था. इसके बाद उन्होंने विमान उड़ाने का अपना अनुभव लगातार बढ़ाया. ग्रिपेन के सिंगल-सीट मॉडल में अकेले उड़ान भरने से पहले वह इसके दो सीटों वाले जेएएस 39डी वर्जन को भी उड़ा चुकी थीं. इस तरह नए विमान में अकेले उड़ान भरने से पहले उन्हें इसके दूसरे वर्जन का अनुभव भी मिल चुका था. हालांकि, दो सीटों वाले विमान में उड़ान भरने और अकेले कॉकपिट संभालने में अंतर होता है. अकेले उड़ान के दौरान पायलट को विमान से जुड़े सभी जरूरी फैसले खुद लेने होते हैं. यही वजह है कि इस तरह की उड़ान को किसी भी पायलट के करियर में एक अहम कदम माना जाता है.
रानी सुथिदा शाही जिम्मेदारियों के दौरान राजा महा वजिरालोंगकोर्न के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में को-पायलट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने शाही यात्राओं से जुड़े विमानों को उड़ाने में हिस्सा लिया है. अप्रैल 2025 में भूटान की यात्रा के दौरान भी शाही जोड़े ने संयुक्त रूप से एक शाही विमान उड़ाया था. विमान ने पारो एयरपोर्ट पर लैंडिंग की थी. यह एयरपोर्ट अपने चुनौतीपूर्ण अप्रोच के लिए जाना जाता है, जहां किसी भी विमान को उतारने के लिए पायलटों को खास सावधानी बरतनी पड़ती है. यह अनुभव दिखाता है कि रानी की दिलचस्पी केवल औपचारिक उड़ानों तक सीमित नहीं रही है. वह अलग-अलग तरह के विमानों और उड़ान की परिस्थितियों में अनुभव हासिल करती रही हैं.
रानी सुथिदा की नई उपलब्धि ने उनके उड़ान रिकॉर्ड में एक और खास अध्याय जोड़ दिया है. अब उनके अनुभव में छोटे विमान, यात्री विमान और ग्रिपेन जैसे सैन्य फाइटर जेट भी शामिल हैं. सैन्य विमान उड़ाने की ट्रेनिंग में पायलट को विमान की रफ्तार, नियंत्रण और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर खास ध्यान देना होता है. हालांकि, इस उड़ान से जुड़ी रिपोर्ट में किसी मिशन या युद्धाभ्यास की जानकारी नहीं दी गई है. इसे रानी की पहली सिंगल-सीट ग्रिपेन उड़ान के तौर पर बताया गया है.
थाईलैंड की रानी सुथिदा की यह उड़ान इसलिए चर्चा में है, क्योंकि लंबे अनुभव के बाद उन्होंने अब सिंगल-सीट फाइटर जेट को अकेले उड़ाने का पड़ाव भी पार कर लिया है. राजा की मौजूदगी और उड़ान के बाद मिला सम्मान इस मौके को और खास बनाते हैं. 1,188 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव रखने वाली रानी ने सैन्य और यात्री विमानों के बीच अपनी ट्रेनिंग का दायरा बढ़ाया है. ग्रिपेन में उनकी पहली अकेली उड़ान इसी सफर की एक नई उपलब्धि है.