SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

बेड के नीचे दबा था 120 साल पुराना राज: लोमड़ी समझकर संभाल रखा था विलुप्त शिकारी का सिर; अब लाखों में होगी नीलामी

अगर आपके घर में रखे पुराने सामान को खोजते समय कोई ऐसी चीज मिल जाए, जो करीब एक सदी पहले धरती से गायब हो चुके जानवर की निशानी हो, तो आप हैरान रह जाएंगे. ब्रिटेन के एक घर में कुछ ऐसा ही हुआ है. यहां स्टोरेज में बिस्तर के नीचे रखा तस्मानियन टाइगर का सिर मिला है. इसे दुनिया के बेहद दुर्लभ नमूनों में गिना जा रहा है. अब नवंबर में इसकी नीलामी होने वाली है, जिसमें इसकी कीमत 50 हजार पाउंड तक पहुंचने का अनुमान है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 29, 2026, 12:31 PM IST | Updated: Oct 29, 2026, 12:44 PM IST
Image Credit: @Auctioneum | जिसे समझा बेकार खोपड़ी वो निकला विलुप्त 'तस्मानियाई टाइगर'!
Join

कई बार घर के किसी कोने में पड़ी पुरानी चीज की अहमियत का अंदाजा उसके मालिक को भी नहीं होता. ब्रिटेन में मिला तस्मानियन टाइगर का सिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यह अनमोल खजाना लंबे समय से स्टोरेज में रखा हुआ था. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह इतना दुर्लभ और इतना कीमती भी हो सकता है.

ब्रिस्टल की नीलामी कंपनी ऑक्शनियम के अनुसार, इस अनमोल खजाने का नाम ट्रेवर रखा गया है. इसके मालिक ने अगस्त में एक दूसरे तस्मानियन टाइगर के सिर की खबर देखी. इसके बाद उन्होंने अपने पास रखे पुराने सामान की खोज शुरू की और उन्हें अपने घर में यह दुर्लभ खजाना मिला.

नीलामी करने वाला भी देखकर रह गया हैरान

BBC की रिपोर्ट के अनुसार, नीलामी कंपनी के ऑक्शनियर एंड्रयू स्टोव के लिए यह खोज किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं थी. उनका कहना है कि जब उन्होंने इस अनमोल खजाने को खोलकर देखा, तो उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. स्टोव ने इसे अब तक नीलामी में आई सबसे अहम चीजों में से एक बताया. उनके अनुसार, यह कोई आम पुरानी वस्तु नहीं है, बल्कि ऐसे जानवर का अवशेष है, जो अब दुनिया में मौजूद नहीं है. इसकी नीलामी 26 नवंबर को बाथ में होनी है. इसकी अनुमानित कीमत 30 हजार से 50 हजार पाउंड के बीच रखी गई है. भारतीय रुपये में यह रकम लाखों के आसपास बैठती है.

भेड़िये जैसा दिखता था तस्मानियन टाइगर

तस्मानियन टाइगर को थाइलेसिन के नाम से भी जाना जाता है. यह मांस खाने वाला एक मार्सुपियल स्तनधारी जीव था. इसका शरीर बड़े कुत्ते जैसा था और इसकी बनावट भेड़िये से मिलती-जुलती थी. इसी वजह से इसे तस्मानियन टाइगर कहा जाने लगा. यह जानवर कभी ऑस्ट्रेलिया, न्यू गिनी और तस्मानिया के जंगलों में पाया जाता था. लेकिन इंसानों के शिकार और दूसरी वजहों से इसकी संख्या लगातार घटती गई. अंत में इस प्रजाति का आखिरी जानवर 1936 में तस्मानिया के होबार्ट चिड़ियाघर में मर गया. इसके बाद से तस्मानियन टाइगर को विलुप्त माना जाता है.

कुछ महीने पहले भी मिला था ऐसा दुर्लभ नमूना

इस साल गर्मियों में भी तस्मानियन टाइगर के एक सिर की नीलामी ने लोगों का ध्यान खींचा था. यह नमूना विक्टोरियन दौर का बताया गया था और शुरुआत में इसे गलती से लोमड़ी का सिर समझ लिया गया था. बाद में कुछ लोगों ने इसकी असली पहचान पहचानी. इसके बाद नीलामी में इसकी कीमत हजारों पाउंड तक पहुंच गई. इस खोज की खबर दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंची. स्टोव के अनुसार, उस समय उन्हें लगा था कि ऐसा दुर्लभ नमूना मिलना जिंदगी में एक बार होने वाली घटना है. लेकिन कुछ ही हफ्तों के अंदर दूसरा अवशेष सामने आना उनके लिए भी चौंकाने वाला था. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक, रिसर्चर और कलेक्टर ऐसे अवशेषों की तलाश में अपनी जिंदगी लगा देते हैं. ऐसे में कुछ ही समय के अंतराल में दो नमूनों का उनके पास पहुंचना असाधारण है.

तस्मानिया से ब्रिटेन तक कैसे पहुंचा सिर?

इस अवशेष के इतिहास को लेकर भी दिलचस्प जानकारी सामने आई है. माना जाता है कि बीसवीं सदी की शुरुआत में तस्मानिया के शेफील्ड इलाके में एक किसान ने इस जानवर का शिकार किया था. इसके बाद साल 1905 में इसे ब्रिटेन लाया गया. हालांकि, इसके पूरे सफर और इतने लंबे समय तक सुरक्षित रहने की कहानी के बारे में अभी सीमित जानकारी मिल पाई है. इस तरह करीब एक सदी से ज्यादा समय तक पुरानी चीजों के बीच रखा यह अवशेष अब वैज्ञानिकों और दुर्लभ वस्तुओं को इकट्ठा करने वालों के लिए खास बन गया है.

दुनिया में मौजूद ऐसे सिरों में तीसरा अवशेष

ऑक्शनियम के अनुसार, ट्रेवर को टैक्सिडर्मी के जरिए सुरक्षित रखे गए तस्मानियन टाइगर के सिरों में दुनिया का केवल तीसरा अवशेष माना जा रहा है. टैक्सिडर्मी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मृत जानवर की बाहरी बनावट को सुरक्षित रखा जाता है. कंपनी का कहना है कि इतने दुर्लभ अवशेष का सामने आना बड़ी बात है. BBC को स्टोव ने बताया कि दो अवशेषों का इतने कम समय में मिलना इस प्रजाति के बचे हुए अवशेषों के बारे में नई जानकारी दे सकता है. इसे इंटरनेशनल थाइलेसिन स्पेसिमेन डेटाबेस में भी शामिल किया गया है. यह डेटाबेस दुनिया भर में मौजूद तस्मानियन टाइगर के अवशेषों का रिकॉर्ड रखने में मदद करता है.

विलुप्त जानवरों की कहानी समझने में मिलेगी मदद

इस डेटाबेस से जुड़े डॉ. स्टीफन स्लाइटहोम ने कहा कि ऐसे अवशेष विलुप्त हो चुकी प्रजातियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. उनके अनुसार, तस्मानियन टाइगर के नमूने बेहद दुर्लभ हैं और जूलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुओं में गिने जाते हैं. वैज्ञानिकों के लिए इनका महत्व केवल इनकी कीमत तक सीमित नहीं है. इनके जरिए किसी प्रजाति की बनावट, इतिहास और उसके विलुप्त होने से जुड़ी जानकारी को समझने में मदद मिल सकती है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES