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वाराणसी आने वाले ज्यादातर लोग यहां के घाट, गलियां, मंदिर, खाना और गंगा आरती देखने की इच्छा लेकर पहुंचते हैं. कोई शहर की पुरानी विरासत को करीब से देखना चाहता है तो कोई यहां की आध्यात्मिक दुनिया को समझने की कोशिश करता है. लेकिन स्पेन की कंटेंट क्रिएटर एंड्रिया पासपर के लिए वाराणसी की यात्रा इससे कहीं आगे निकल गई.
एंड्रिया ने अपनी यात्रा का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इसमें गंगा के किनारे के कई खूबसूरत और भावुक पल दिखाई देते हैं. कहीं घाटों पर लोग पूजा करते नजर आते हैं, कहीं गंगा में डुबकी लगाते श्रद्धालु दिखते हैं और कहीं फूलों के साथ जलते दीये नदी की लहरों पर तैरते नजर आते हैं.
एंड्रिया ने अपने वीडियो में गंगा को सिर्फ एक नदी के तौर पर नहीं देखा. उन्होंने इसे 'गंगा मां' कहा और बताया कि पीढ़ियों से यह नदी वाराणसी की जिंदगी और आस्था का हिस्सा रही है. उनके मुताबिक, किताबों में कर्म, मोक्ष और यहां के धार्मिक रीति-रिवाजों के बारे में पढ़ा जा सकता है. लेकिन सिर्फ पढ़ने से उस अनुभव को समझना आसान नहीं है. उनके लिए असली फर्क उस जगह पर पहुंचने के बाद महसूस हुई एनर्जी ने पैदा किया. एंड्रिया ने कहा कि आप पूरी कहानी पढ़ सकते हैं, यहां के रीति-रिवाजों को समझ सकते हैं, लेकिन वाराणसी में गंगा के सामने खड़े होने का अनुभव किताबें नहीं समझा सकतीं.
एंड्रिया के वीडियो का सबसे भावुक हिस्सा वह है, जब वह अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर के बारे में बताती हैं. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने गंगा में डुबकी लगाने का फैसला किया. गंगा के पानी में बैठने के दौरान वह रोने लगीं. उन्होंने बताया कि उनके आंसू गंगा के पानी में मिल गए. उस पल उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके अंदर जमा सारी चीजें धीरे-धीरे बाहर निकल रही हों. उन्होंने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे गंगा की सारी एनर्जी उनके भीतर से गुजर रही हो. उन्हें यह भी महसूस हुआ कि जैसे वह अपने मन का बोझ वहीं छोड़ पा रही हैं.
एंड्रिया के लिए इस अनुभव को समझाना आसान नहीं था. उन्होंने कहा कि उस पल उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे गंगा मां उन्हें गले लगा रही हों. यह अनुभव उनके लिए इसलिए भी खास था क्योंकि गंगा के किनारे सिर्फ धार्मिक रस्में नहीं होतीं. यहां अलग-अलग लोग अपनी जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव लेकर पहुंचते हैं. कोई प्रार्थना करता है, कोई आशीर्वाद मांगता है, कोई अपने किसी करीबी को याद करता है तो कोई दुख के समय यहां सुकून खोजता है. एंड्रिया ने इसी लंबे सिलसिले को महसूस करने की कोशिश की. उनके लिए गंगा में उतरना सिर्फ एक टूरिस्ट एक्टिविटी नहीं रहा, बल्कि एक निजी और भावुक पल बन गया.
वाराणसी को लेकर एंड्रिया ने एक और बात पर ध्यान दिया. वह थी गंगा के किनारे जिंदगी और मौत का एक साथ मौजूद होना. उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि इसी नदी के किनारे रोजमर्रा की जिंदगी भी चलती है और अंतिम संस्कार भी होते हैं. लोग गंगा के किनारे पूजा करते हैं, स्नान करते हैं, त्योहार मनाते हैं और दूसरी तरफ श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी चलती रहती है. एंड्रिया ने इस परंपरा को मोक्ष की मान्यता से जोड़ते हुए बताया कि हिंदू मान्यता में वाराणसी में मृत्यु और गंगा से जुड़ी आस्था का खास महत्व है.
अपनी पोस्ट के कैप्शन में एंड्रिया ने वाराणसी के अनुभव को एक लाइन में समेटने की कोशिश की. उन्होंने लिखा कि वाराणसी की एनर्जी पूरे शरीर में महसूस होती है. उन्होंने भारत को लेकर भी अपनी सोच शेयर की. उनके मुताबिक, भारत को सिर्फ आंखों से नहीं देखा जा सकता, बल्कि उसे आत्मा से महसूस करना पड़ता है. उनकी यह बात सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आई. खासकर उन लोगों ने इस अनुभव से खुद को जोड़कर देखा, जिन्होंने वाराणसी या गंगा के घाटों पर वक्त बिताया है.
एंड्रिया का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं. कई यूजर्स ने कहा कि उन्होंने भी वाराणसी और गंगा के किनारे ऐसी ही एनर्जी महसूस की है. एक यूजर ने लिखा कि वह इस बात की पुष्टि कर सकता है कि वाराणसी की वह एनर्जी सच में महसूस होती है. एक दूसरे यूजर ने गंगा को पवित्र बताते हुए अपनी राय रखी. वहीं, एक यूजर ने वाराणसी और गंगा के किनारे की सभ्यता की पुरानी विरासत का जिक्र करते हुए एंड्रिया को शुभकामनाएं दीं. लोगों ने खास तौर पर इस बात की तारीफ की कि उन्होंने शहर को सिर्फ घूमने की जगह के तौर पर नहीं देखा, बल्कि उसके भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलू को समझने की कोशिश की.