VIP काफिला छोड़ थामा ऑटो का हैंडल: भारत की सड़कों पर तिपहिया दौड़ा रहे नॉर्वे के मेयर; VIDEO वायरल
विदेश में मेयर जैसी जिम्मेदारी संभालने वाला कोई शख्स अगर भारत घूमने आए, तो उससे लग्जरी कार या महंगे होटल की उम्मीद होना स्वाभाविक है. लेकिन नॉर्वे के पोरसैंजर शहर के मेयर जो इंगे हेसजेविक का अंदाज कुछ अलग निकला. वह भारत में किसी लग्जरी गाड़ी से नहीं, बल्कि ऑटो रिक्शा यानी टुक-टुक से सफर कर रहे हैं. उनके साथ 61 विदेशी टूरिस्ट 37 ऑटो लेकर भारत घूम रहे हैं.
भारत में घूमते हुए किसी विदेशी टूरिस्ट का ऑटो रिक्शा चलाना अपने आप में लोगों का ध्यान खींच सकता है. लेकिन जब पता चले कि ऑटो चलाने वाला शख्स नॉर्वे के एक शहर का मेयर है, तो कहानी और दिलचस्प हो जाती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में नॉर्वे के पोरसैंजर शहर के मेयर जो इंगे हेसजेविक ऑटो रिक्शा में बैठे नजर आ रहे हैं.
वीडियो गुजरात के रहने वाले चिंतन मौर्य ने शेयर किया. चिंतन की मुलाकात हेसजेविक से गुजरात के लिमड़ी में हुई थी. चिंतन ने बताया कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए 61 लोग 37 टुक-टुक लेकर भारत की यात्रा कर रहे हैं. जब उन्हें पता चला कि उनके सामने बैठे शख्स नॉर्वे के पोरसैंजर शहर के मेयर हैं, तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ.
गूगल पर प्रोफाइल देखी तो खुला मेयर का राज
चिंतन ने वीडियो में बताया कि उन्हें पहले सिर्फ इतना पता था कि यह विदेशी टूरिस्ट भारत में ऑटो लेकर घूम रहा है. बाद में उन्होंने गूगल पर हेसजेविक की प्रोफाइल देखी, तो पता चला कि वह नॉर्वे के पोरसैंजर म्यूनिसिपैलिटी के मेयर हैं. इसके बाद चिंतन ने उनकी सादगी की तारीफ करते हुए कहा कि इतना बड़ा पद संभालने के बावजूद वह भारत में टुक-टुक से घूम रहे हैं. हेसजेविक पास ही बैठे मुस्कुराते हुए अपना ड्रिंक पीते नजर आए. यही छोटा सा वीडियो सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद आ गया. लोगों के लिए सबसे दिलचस्प बात यह थी कि हजारों किलोमीटर दूर नॉर्वे से आया एक मेयर भारत की सड़कों पर बिल्कुल आम टूरिस्ट की तरह ऑटो चला रहा था.
61 लोग, 37 ऑटो और पूरा भारत घूमने का प्लान
यह कोई छोटी-मोटी रोड ट्रिप नहीं है. जानकारी के अनुसार, इस ग्रुप में 61 विदेशी टूरिस्ट शामिल हैं और उनके पास 37 ऑटो रिक्शा हैं. ये लोग ऑटो से भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहे हैं. ऑटो रिक्शा से लंबी दूरी तय करना आसान नहीं होता. रास्ते में मौसम बदलता है, सड़कें बदलती हैं और कभी-कभी गाड़ी भी परेशान करने लगती है. लेकिन इस ग्रुप ने शायद इसी अनुभव को अपनी यात्रा का सबसे खास हिस्सा बनाया है. जो इंगे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी भारत यात्रा से जुड़ी कई तस्वीरें और अपडेट शेयर किए हैं. इनमें वह अपने साथी के साथ ऑटो में बैठे और अलग-अलग जगहों पर घूमते नजर आते हैं.
राजस्थान के रेगिस्तान से शुरू हुआ सफर
मेयर के साथी ओयविंद हेसजेविक ने भी इस यात्रा की कई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं. उन्होंने बताया कि उनका यह सफर राजस्थान के रेगिस्तान से शुरू हुआ. वहां से वह दक्षिण-पश्चिम दिशा में आगे बढ़े और एक दिन पाकिस्तान की सीमा के करीब-करीब यात्रा की. उन्होंने बताया कि अंधेरे में ऑटो चलाने की सलाह नहीं दी गई थी. इसलिए शाम होते ही उन्होंने एक बॉर्डर शहर में रुकने के लिए होटल तलाश लिया. यह सफर सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं है. रास्ते में मिलने वाले लोगों, जगहों और स्थानीय माहौल को भी वे अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दिखा रहे हैं.
जैसलमेर पहुंचकर भी नहीं छोड़ा ऑटो
जो इंगे ने जैसलमेर से भी एक तस्वीर शेयर की. तस्वीर में वह अपने साथी के साथ ऑटो रिक्शा में बैठे दिखाई दे रहे हैं. पोस्ट में उन्होंने बताया कि वह भारत में रिक्शा खुद चला रहे हैं. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उस समय तक वे करीब 1400 किलोमीटर का सफर ऑटो से पूरा कर चुके थे. इसके बाद भी उनकी यात्रा खत्म नहीं हुई थी. बंगाल के दक्षिणी छोर तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब 2900 किलोमीटर और जाना था. इसका मतलब जिस ऑटो को आमतौर पर शहर की छोटी दूरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसी से यह विदेशी ग्रुप हजारों किलोमीटर की भारत यात्रा कर रहा है.
गोवा में ऑटो ने भी दे दिया जवाब
लंबे सफर में गाड़ी का थोड़ा-बहुत परेशान करना भी तय है. गोवा पहुंचने के बाद जो इंगे ने बताया कि उनका ऑटो पूरी तरह सही हालत में नहीं रहा. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि गोवा से वे सुरक्षित निकल गए, लेकिन ऑटो का एक साइड शीशा टूट गया और कुछ पुर्जे ढीले पड़ गए. मतलब यह यात्रा सिर्फ खूबसूरत जगहों की तस्वीरें लेने वाली ट्रिप नहीं है, बल्कि सड़क पर आने वाली छोटी-बड़ी मुश्किलों का भी हिस्सा है. फिर भी उन्होंने यात्रा जारी रखी. शायद इसी वजह से इस सफर की तस्वीरें बाकी विदेशी ट्रिप से कुछ अलग नजर आती हैं.
घूमने के साथ नेक काम भी कर रहे हैं
इस यात्रा का एक और पहलू लोगों को पसंद आ रहा है. जो इंगे ने बताया कि रिक्शा रेस में शामिल कई लोग किसी खास उद्देश्य के लिए चंदा जुटाते हैं. उन्होंने भी इस नेक काम में योगदान देने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि वे चंदा जुटाने के तरीके में बहुत माहिर नहीं हैं, इसलिए उन्होंने सीधे दान किया. इसके साथ एक लिंक भी शेयर किया गया, जिससे जो लोग मदद करने की स्थिति में हैं, वे इस काम में योगदान दे सकें. इसका मतलब भारत की यात्रा के दौरान मौज-मस्ती के साथ वे एक अच्छे काम से भी जुड़ रहे हैं.
सोशल मीडिया पर लोग बोले- 'नो एटीट्यूड'
नॉर्वे के मेयर का ऑटो से भारत घूमना सोशल मीडिया यूजर्स को खूब पसंद आ रहा है. चिंतन मौर्य के वीडियो पर लोगों ने उनकी सादगी की तारीफ की. एक यूजर ने लिखा कि यही वजह है कि नॉर्वे जैसे देश को खुशहाल देशों में गिना जाता है. एक अन्य यूजर ने कहा कि यह असली हीरो है, कोई एटीट्यूड नहीं. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि किसी बड़े पद पर बैठा व्यक्ति अगर आम लोगों की तरह सफर करे और स्थानीय चीजों को करीब से समझने की कोशिश करे, तो यह अपने आप में अच्छी बात है.