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गेमिंग वीडियो के व्यूज बढ़ाने का ऐसा जुनून: 9 साल के बच्चे ने YouTube Ads पर खर्च कर दिए 1.13 करोड़, पिता से कंपनी की फाइनेंस टीम ने मांगा हिसाब

एक पिता का दावा है कि उसके 9 साल के बेटे ने अपने Minecraft और Roblox गेमिंग वीडियो के व्यूज बढ़ाने के लिए YouTube Ads पर करीब 1.13 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रकम उसके पिता के कंपनी क्रेडिट कार्ड से गई. करीब तीन हफ्ते तक हुए इस खर्च का पता तब चला, जब कंपनी की Finance Team ने पिता से पूरे पैसे का हिसाब मांग लिया.

गेमिंग वीडियो के व्यूज बढ़ाने का ऐसा जुनून: 9 साल के बच्चे ने YouTube Ads पर खर्च कर दिए 1.13 करोड़, पिता से कंपनी की फाइनेंस टीम ने मांगा हिसाब
Image Credit: 9 साल के बच्चे ने यूट्यूब पर करोड़ों खर्च किए

बच्चों का गेमिंग वीडियो बनाना और YouTube पर उसे अपलोड करना आजकल कोई नई बात नहीं है. लेकिन अगर कोई बच्चा अपने वीडियो के व्यूज बढ़ाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर दे, तो मामला अचानक काफी बड़ा हो जाता है. ऐसा ही एक दावा Dave नाम के शख्स ने एक YouTube वीडियो में किया है.

15 सितंबर को अपलोड किए गए वीडियो में Dave ने बताया कि उनके 9 साल के बेटे Mike ने Minecraft और Roblox से जुड़े गेमिंग वीडियो के व्यूज बढ़ाने के लिए YouTube पर बड़े-बड़े Ad Campaign चला दिए. शुरुआत में यह सब इतना बड़ा नहीं लग रहा था. लेकिन जब कंपनी का बिल सामने आया तो Dave के होश उड़ गए.

कंपनी के कार्ड से गायब हुए 1.13 करोड़

Dave के मुताबिक, उन्हें अचानक कंपनी के एक कमरे में बुलाया गया. वहां उनके मैनेजर, कॉर्पोरेट स्टाफ और Finance Team के लोग मौजूद थे. इसके बाद उनके सामने कुछ टेबल और खर्च का पूरा ब्रेकडाउन रखा गया. कंपनी ने उनसे पूछा कि उनके कार्ड से करीब 1.18 लाख डॉलर यानी लगभग 1.13 करोड़ रुपये कहां खर्च हो गए. Dave ने बताया कि उस समय उनके पास इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं था. लेकिन जब उन्होंने ट्रांजैक्शन की डिटेल देखी तो धीरे-धीरे पूरा मामला उनकी समझ में आने लगा. पैसा YouTube पर चलाए गए Ads में जा रहा था.

तीन हफ्ते तक चलता रहा पूरा खेल

Dave के मुताबिक, उनके बेटे ने करीब तीन हफ्ते तक YouTube पर Ad Campaign चलाए. इसका मकसद अपने गेमिंग वीडियो के व्यूज बढ़ाना था. मतलब बच्चा सिर्फ वीडियो बनाकर उसे अपलोड नहीं कर रहा था, बल्कि उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बाकायदा पैसे खर्च कर रहा था. समस्या सिर्फ इतनी नहीं थी कि खर्च बहुत ज्यादा था. असली परेशानी यह थी कि इस पूरे खर्च के लिए जिस कार्ड का इस्तेमाल हुआ, वह कंपनी का कार्ड था.

कार्ड Google अकाउंट में सेव था

Dave ने बताया कि गलती की शुरुआत उनसे ही हुई थी. जब उनके बेटे को Robux खरीदकर देने की जरूरत पड़ी थी, तब उन्होंने खुद कंपनी के कार्ड की जानकारी इस्तेमाल की थी. कार्ड की डिटेल उस Google अकाउंट में सेव हो गई, जिसमें Dave का Work Email, Calendar और दूसरी ऑफिस से जुड़ी चीजें भी मौजूद थीं. यहीं से मामला बिगड़ गया. बेटे को उसी अकाउंट के जरिए कंपनी के कार्ड तक पहुंच मिल गई और फिर उसने YouTube Ads के लिए उसी पेमेंट मेथड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. Dave ने माना कि कंपनी के कार्ड को इस तरह सेव छोड़ना उनकी बड़ी गलती थी.

'उसे पता नहीं था ये असली पैसे हैं'

Dave ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि Mike अभी सिर्फ 9 साल का है. उनके मुताबिक, बच्चे को शायद पूरी तरह समझ नहीं था कि कंपनी का कार्ड क्या होता है और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली इतनी बड़ी रकम असल जिंदगी में कितनी बड़ी होती है. उन्होंने कहा कि एक बच्चे के तौर पर Mike ने जो किया, उसकी पूरी जिम्मेदारी उस पर डालना सही नहीं होगा. Dave ने माना कि एक बड़े व्यक्ति के तौर पर उन्हें पहले से सीमाएं तय करनी चाहिए थीं और बच्चे के लिए अलग पेमेंट कार्ड या अलग अकाउंट का इस्तेमाल करना चाहिए था. उन्होंने यह भी बताया कि Mike ने 8 साल की उम्र से गेमिंग वीडियो बनाना शुरू किया था. वह PS5 से सीधे गेम स्ट्रीम करता था और शुरुआत में किसी खास एडिटिंग सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल नहीं करता था.

पिता ने पूछा- अब क्या कहना है?

जब Dave ने अपने बेटे को बताया कि कंपनी के कार्ड से कितना बड़ा खर्च हो चुका है और उससे पूछा कि अब वह क्या कहना चाहता है, तो बच्चे ने जवाब दिया, 'I'm definitely cooked.' आसान भाषा में कहें तो उसे समझ आ गया था कि अब उसकी मुश्किल बढ़ने वाली है. इस एक लाइन ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया. क्योंकि लोगों को यह जवाब सुनकर लगा कि बच्चे को कम से कम इतना अंदाजा तो था कि उसने कुछ ऐसा किया है, जिसके लिए उसे डांट पड़ सकती है.

सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

Dave के वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने देखा. आखिरी अपडेट तक वीडियो को 11 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके थे और सैकड़ों कमेंट आए. कुछ लोगों ने कहा कि बच्चों को किसी भी तरह के Payment Method की खुली पहुंच देना खतरनाक हो सकता है. एक यूजर ने अपने एक परिचित का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके बच्चे ने Fortnite Skins पर हजारों डॉलर खर्च कर दिए थे. एक दूसरे यूजर ने कहा कि वह अपने बच्चे को किसी भी तरह का कार्ड इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता. वहीं कुछ लोगों ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या 9 साल के बच्चे को वास्तव में इतनी बड़ी रकम खर्च करने का मतलब समझ में आ सकता था.

'इतने पैसे कटे, अंदाजा कैसे नहीं हुआ?'

सोशल मीडिया पर एक वर्ग ऐसा भी था, जिसने बच्चे की उम्र को लेकर सवाल उठाए. कुछ लोगों का कहना था कि अगर बच्चा इतना बड़ा Ad Campaign चला सकता है, तो उसे यह अंदाजा भी रहा होगा कि वह क्या कर रहा है. एक यूजर ने यहां तक कहा कि अगर बच्चा खुद कह रहा है कि वह 'कुक्ड' है, तो शायद उसे पता था कि उसने कुछ गलत किया है. हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों की राय अलग-अलग है और इस पूरे मामले की जानकारी फिलहाल पिता के बताए घटनाक्रम पर आधारित है.

गलती बच्चे की या सिस्टम की?

इस घटना ने सिर्फ बच्चे के खर्च को लेकर ही सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि यह भी दिखाया कि ऑनलाइन पेमेंट और सेव किए गए कार्ड को लेकर कितनी सावधानी जरूरी है. एक तरफ 9 साल के बच्चे ने कंपनी के कार्ड से करोड़ों रुपये के Ads चला दिए. दूसरी तरफ कार्ड पहले से ऐसे Google अकाउंट में सेव था, जिसकी पहुंच बच्चे तक थी. Dave खुद भी मानते हैं कि उन्हें कंपनी के कार्ड को बच्चे के इस्तेमाल वाले अकाउंट से अलग रखना चाहिए था.

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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