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भारत में गली-गली घूमते हैं कबाड़ीवाले: न्यूयॉर्क में कूड़ेदान से बोतलें बीनकर कमाते हैं लोग; जानिए क्या है 'कैनर्स' का काम

भारत में तो आपने कबाड़ीवाले को गली-गली घूमकर पुराने अखबार, प्लास्टिक की बोतलें और लोहे का सामान खरीदते देखा होगा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि दूसरे देशों में यह कैसे काम करता है? इसी पर अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वह बता रही हैं कि न्यूयॉर्क जैसे शहरों में यह कैसे काम करता है और इसको यहां क्या कहा जाता है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 19, 2026, 11:20 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 11:31 AM IST
Image Credit: @chillout_1588_usa | न्यूयॉर्क में कूड़ेदान से खाली बोतलें उठाकर कमाते हैं लोग!
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सुबह का वक्त हो और गली में अचानक आवाज सुनाई दे, 'लोहा दे दो, रद्दी पेपर दे दो, कबाड़ी वाले...' तो ज्यादातर भारतीय घरों में इसी आवाज से पहचाना जाता है. अगर घर में पुराने अखबार जमा हो गए हों, प्लास्टिक की बोतलें पड़ी हों या कोई पुराना सामान बेचना हो, तो अक्सर लोगों को कबाड़ीवाला ही याद आता है.

भारत में यह सिर्फ सामान खरीदने-बेचने का काम नहीं है. इससे बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है. कबाड़ी घरों से पुराना सामान इकट्ठा करते हैं और उसे आगे रीसाइक्लिंग के लिए बेच देते हैं. लेकिन अमेरिका में खाली बोतलों से पैसे कमाने का एक ऐसा तरीका भी है, जिसे देखकर भारतीयों को हैरानी हो सकती है. यहां कुछ राज्यों में तय नियमों के तहत बोतलें और कैन लौटाने पर पैसे वापस मिलते हैं. इसका मतलब है कि जिसे कई लोग इस्तेमाल के बाद बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसकी भी एक कीमत हो सकती है.

अमेरिका में इन्हें कहते हैं 'कैनर्स'

अमेरिका में इन्हीं खाली बोतलों और कैन को इकट्ठा करने वाले कुछ लोगों को 'कैनर्स' कहा जाता है. ये लोग इस्तेमाल के बाद फेंक दिए गए कैन और बोतलें जमा करते हैं. फिर बोतलों और कैन को रिटर्न सेंटर या मशीनों के जरिए वापस करके पैसे कमाते हैं. भारत में जहां कबाड़ी आमतौर पर घरों से अलग-अलग तरह का पुराना सामान खरीदते हैं, वहीं इस व्यवस्था में खास तौर पर उन बोतलों और कैन पर ध्यान दिया जाता है, जिन पर डिपॉजिट रिफंड का नियम लागू होता है. हालांकि, अमेरिका में हर जगह एक जैसा सिस्टम नहीं है. यहां नियम राज्य के हिसाब से बदलते हैं. इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि वहां हर खाली बोतल के बदले पैसे मिलते हैं या सभी लोग इसी तरीके से कमाई करते हैं.

पांच सेंट की बोतल से कैसे मिलते हैं पैसे?

भारतीय मूल की कंटेंट क्रिएटर स्वाति अग्रवाल गुप्ता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें उन्होंने अमेरिका में बोतलें इकट्ठा करने और उन्हें लौटाने की व्यवस्था के बारे में बताया. वीडियो में वह न्यूयॉर्क के बोतल रिटर्न सिस्टम का भी जिक्र करती हैं. वहां पेय पदार्थों की बोतल या कैन खरीदते समय ग्राहक से पांच सेंट का डिपॉजिट लिया जाता है. जब ग्राहक खाली कंटेनर को तय जगह पर वापस करता है, तो उसे ये पैसे वापस मिल सकते हैं. पांच सेंट की रकम भले ही भारतीय रुपये में कुछ ही रुपये के आसपास बैठे, लेकिन कई बोतलें इकट्ठा होने पर कुल रकम बढ़ सकती है. यही वजह है कि कुछ लोग खाली बोतलों और कैन को जमा करके उन्हें वापस करने का काम करते हैं. यहां एक बात समझना जरूरी है. यह हर बोतल को कबाड़ी के पास बेचने जैसा नहीं है.

 

 

सुपरमार्केट की मशीन में डालो बोतल, फिर मिलेगी रसीद

इस व्यवस्था का एक दिलचस्प हिस्सा है रिवर्स वेंडिंग मशीन. अमेरिका के कुछ सुपरमार्केट और बोतल रिटर्न सेंटर पर ऐसी मशीनें लगाई जाती हैं, जिनमें तय नियमों के अनुसार खाली बोतलें और कैन जमा किए जा सकते हैं. मशीन कंटेनर को पहचानकर स्वीकार करती है. इसके बाद जमा की गई बोतलों की संख्या और लागू रिफंड के हिसाब से रसीद मिल सकती है. उस रसीद को संबंधित काउंटर पर देकर पैसे वापस लिए जा सकते हैं. कुछ जगह पेमेंट का तरीका अलग भी हो सकता है. इससे लोगों को हर बोतल के लिए किसी दुकानदार या कबाड़ी से कीमत तय करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, मशीन में हर तरह की बोतल स्वीकार नहीं होती. कंटेनर का प्रकार, उस पर लगा निशान और स्थानीय नियम मायने रखते हैं.

बुजुर्ग महिला की बोतलें देखकर स्वाति भी हुईं हैरान

स्वाति के वीडियो में एक बुजुर्ग महिला का भी जिक्र है, जो खाली बोतलें जमा करती हैं. वीडियो के अनुसार, वह बोतलों को एक कार्ट में रखकर ले जाती हैं और बाद में उन्हें लौटाकर पैसे हासिल करती हैं. स्वाति इस व्यवस्था को देखकर लोगों को बताती हैं कि अमेरिका में कुछ लोग इस तरह खाली बोतलों को अपनी कमाई का जरिया बनाते हैं. उन्होंने अपने वीडियो में बोतलें जमा करने वाली महिला की मदद करने का भी जिक्र किया. यह नजारा इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि भारत में लोग अक्सर खाली बोतलों को कबाड़ी को बेच देते हैं या कचरे में डाल देते हैं. लेकिन डिपॉजिट वाले राज्यों में उन बोतलों को वापस करने पर पहले से जमा पैसे लौटाए जाते हैं.

सोशल मीडिया पर भारत और अमेरिका की तुलना

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भारत और अमेरिका के कबाड़ी सिस्टम की तुलना करने लगे. कुछ लोगों को मशीन के जरिए बोतलें लौटाने का तरीका पसंद आया, तो कुछ ने भारत के कबाड़ीवालों की अहमियत की ओर ध्यान दिलाया. दरअसल, भारत में कबाड़ी घर-घर जाकर पुराने अखबार, गत्ता, लोहा, प्लास्टिक और दूसरी चीजें खरीदते हैं. इसके बाद इन सामानों को छांटकर आगे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में छोटे कबाड़ी से लेकर बड़े कबाड़ कारोबारियों तक कई लोगों की भूमिका होती है. वहीं, अमेरिका के बोतल डिपॉजिट सिस्टम में खास तरह के कंटेनरों को लौटाने पर जोर रहता है. दोनों तरीकों का मकसद इस्तेमाल हो चुके सामान को दोबारा काम में लाना है, लेकिन इनकी प्रक्रिया और पेमेंट का तरीका अलग है.

क्या अमेरिका में बोतलें इकट्ठा करके अच्छी कमाई हो सकती है?

अब यह सवाल भी लोगों के मन में आ सकता है कि क्या सिर्फ बोतलें इकट्ठा करके अच्छी कमाई की जा सकती है. इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति कितनी बोतलें जमा करता है, उसके इलाके में कौन से नियम लागू हैं और बोतलें लौटाने की सुविधा कितनी आसानी से उपलब्ध है. एक-दो बोतलों से मिलने वाली रकम बहुत कम हो सकती है. लेकिन ज्यादा संख्या में बोतलें और कैन जमा करने पर रिफंड की कुल रकम बढ़ सकती है. फिर भी इसे हर व्यक्ति के लिए पक्की कमाई का जरिया नहीं माना जा सकता. इसमें समय और मेहनत भी लगती है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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