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किसी घड़ी में सोना, हीरे या कीमती पत्थर लगे हों, यह आपने जरूर सुना होगा. लेकिन अगर उसी घड़ी के डायल में सीधे मंगल ग्रह से आया पत्थर लगा हो तो मामला काफी अलग हो जाता है. स्विट्जरलैंड की लग्जरी वॉच कंपनी लुई मोइनेट ने ऐसी ही एक खास घड़ी तैयार की है. इस घड़ी का नाम 'द ओनली इंडिया' रखा गया है.
कंपनी के मुताबिक यह भारत की संस्कृति, इतिहास और विरासत से प्रेरित कलेक्टर घड़ी है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके डायल में बिहार के शेरघाटी के पास गिरे मंगल ग्रह के उल्कापिंड का असली टुकड़ा इस्तेमाल किया गया है.
बताया जाता है कि 25 अगस्त 1865 को शेरघाटी के पास एक उल्कापिंड गिरा था. यह कोई सामान्य स्पेस से आया पत्थर नहीं था, बल्कि मंगल ग्रह से आया उल्कापिंड था. वैज्ञानिक नजरिए से ऐसे उल्कापिंड बेहद खास माने जाते हैं, क्योंकि धरती पर मंगल से आए पत्थरों के नमूने बहुत कम मिलते हैं. मूल शेरघाटी उल्कापिंड का कलेक्शन लंदन के म्यूजियम में रखा हुआ है. मंगल ग्रह से आए उल्कापिंडों को आम तौर पर शेरगोटी, नाखला और चासिग्नी जैसी श्रेणियों से जोड़ा जाता है. ऐसे में शेरघाटी से जुड़े इस दुर्लभ पदार्थ का एक टुकड़ा किसी लग्जरी घड़ी में इस्तेमाल होना इसे और खास बना देता है.
'द ओनली इंडिया' की खासियत सिर्फ इसका डिजाइन या इसमें इस्तेमाल हुआ उल्कापिंड नहीं है. कंपनी के अनुसार यह 1-ऑफ-1 कलेक्टर पीस है. इसका मतलब दुनिया में इस घड़ी का सिर्फ एक ही नमूना बनाया गया है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई इसे खरीदता है तो उसके पास इस मॉडल की इकलौती घड़ी होगी. कंपनी ने इसकी आधिकारिक कीमत सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन इसकी अनुमानित कीमत 2.1 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.
घड़ी को खास बनाने के लिए इसके केस में 18 कैरेट रेड गोल्ड का इस्तेमाल किया गया है. इसका डायल केस करीब 47 मिलीमीटर का है, इसलिए यह कलाई पर सामान्य ड्रेस वॉच की तुलना में काफी बड़ी नजर आएगी. केस के डिजाइन में भारतीय पहचान को भी जगह दी गई है. इसमें अशोक चक्र से प्रेरित 20 तीलियों वाला धर्म चक्र बनाया गया है. इस हिस्से पर हाथ से बारीक पेंटिंग की गई है, जिससे घड़ी के डिजाइन में एक अलग तरह की भारतीय झलक दिखाई देती है.
घड़ी में सिर्फ गोल्ड और उल्कापिंड ही नहीं है. इसके लग्स में चार रूबी यानी माणिक जड़े गए हैं. ये कीमती पत्थर घड़ी के बाहरी डिजाइन को और ज्यादा शाही लुक देते हैं. इसके अलावा डायल में असली मोर पंख का इस्तेमाल किया गया है. मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और भारतीय पहचान से उसका गहरा जुड़ाव है. इस तरह घड़ी में मंगल ग्रह से आया पत्थर और भारतीय प्रतीक एक साथ दिखाई देते हैं.
बाहर से देखने पर घड़ी जितनी खास है, अंदर से भी इसमें काफी महंगा और जटिल मैकेनिकल सिस्टम लगाया गया है. 'द ओनली इंडिया' में लुई मोइनेट का LM-35 टूरबिलॉन मूवमेंट दिया गया है. इस सिस्टम का घूमता हुआ हिस्सा डायल की तरफ से भी दिखाई देता है. टूरबिलॉन मैकेनिकल घड़ियों की जटिल तकनीक के लिए जाना जाता है और लग्जरी वॉच इंडस्ट्री में इसे खास जगह हासिल है.
कंपनी के मुताबिक इस मूवमेंट को इंटरनेशनल क्रोनोमेट्री प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार भी मिला है. लेकिन इस उपलब्धि तक पहुंचने से पहले मूवमेंट की लंबी टेस्टिंग की गई थी. बताया गया है कि इसे करीब चार महीने तक जांचा गया और 150 से ज्यादा झटकों से गुजारा गया. घड़ी में मैन्युअल वाइंडिंग सिस्टम दिया गया है और यह एक बार पूरी तरह वाइंड होने के बाद करीब 72 घंटे तक चल सकती है. इसकी फ्रीक्वेंसी 21,600 कंपन प्रति घंटे है.
यह घड़ी सिर्फ दिखने के लिए नहीं बनाई गई है. इसके केस में 30 मीटर तक पानी से बचाव की क्षमता भी बताई गई है. हालांकि इतनी महंगी और कलेक्टर घड़ी को हर रोज इस्तेमाल करने के बजाय संभालकर रखना ही इसके खरीदार के लिए ज्यादा अहम होगा. घड़ी का बड़ा केस, टूरबिलॉन मूवमेंट और हाथ से किए गए डिजाइन वर्क इसे सामान्य लग्जरी वॉच से काफी अलग कैटेगरी में रखते हैं.
'द ओनली इंडिया' को देखने पर इसकी पूरी कहानी दो अलग दुनियाओं को जोड़ती नजर आती है. एक तरफ बिहार की जमीन से जुड़ा करीब डेढ़ सदी पुराना मंगल ग्रह का उल्कापिंड है, तो दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड की लग्जरी घड़ी बनाने की परंपरा. इसके डिजाइन में अशोक चक्र, मोर पंख और माणिक जैसे भारतीय तत्व शामिल किए गए हैं. वहीं दूसरी ओर इसके अंदर हाई-एंड मैकेनिकल मूवमेंट दिया गया है. यही कॉम्बिनेशन इसे सिर्फ समय देखने वाली घड़ी से आगे ले जाता है.
यह घड़ी सामान्य वॉच स्टोर पर रखी मिलने वाली चीज नहीं है. क्योंकि यह सिर्फ एक पीस है, इसलिए इसे खरीदने के लिए लुई मोइनेट या उसके अधिकृत रिटेलर से संपर्क करना होगा. भारत में कंपनी की अन्य घड़ियां अधिकृत रिटेलर्स के जरिए उपलब्ध हैं. अगर कोई कलेक्टर इस घड़ी को खरीदना चाहता है तो उसे कीमत के साथ टैक्स, डिलीवरी, ऑथेंटिसिटी सर्टिफिकेट और वारंटी जैसी जानकारी भी लेनी होगी.
'द ओनली इंडिया' की असली खासियत इसकी कीमत से ज्यादा इसकी कहानी है. करीब 161 साल पहले बिहार में गिरा मंगल ग्रह का एक टुकड़ा आज एक ऐसी घड़ी के डायल में मौजूद है, जिसे दुनिया में सिर्फ एक बनाया गया है. 18 कैरेट रेड गोल्ड, चार माणिक, मोर पंख और भारतीय प्रतीकों से सजी यह घड़ी स्विस वॉचमेकिंग और भारतीय विरासत का अनोखा मेल पेश करती है. अगर इसकी अनुमानित कीमत 2 करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो इसकी सबसे बड़ी कीमत शायद वह कहानी है, जो इसे बाकी सभी घड़ियों से हमेशा के लिए अलग करती है.