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यहां हर मोड़ पर दिखते हैं हमशक्ल! केरल के इस गांव में रहते हैं 400 से ज्यादा जुड़वां लोग, रहस्य देख चकराया वैज्ञानिकों का भी सिर

केरल के मलप्पुरम जिले का कोडिन्ही गांव पहली नजर में बिल्कुल आम गांव जैसा लगता है. हरे-भरे पेड़, संकरी सड़कें, छोटे-बड़े घर और गांव की अपनी शांत जिंदगी. लेकिन यहां कुछ देर घूमते ही एक चीज बार-बार नजर आने लगती है- एक जैसे दिखने वाले बच्चे, भाई-बहन और कई बार एक ही परिवार में जुड़वां बच्चों की एक से ज्यादा जोड़ियां. इसी वजह से कोडिन्ही को भारत का 'ट्विन विलेज' कहा जाता है.

Written BySantosh Kumar Mishra
Published: Sep 03, 2026, 01:16 PM IST|Updated: Sep 03, 2026, 01:29 PM IST
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यहां हर मोड़ पर दिखते हैं हमशक्ल! केरल के इस गांव में रहते हैं 400 से ज्यादा जुड़वां लोग, रहस्य देख चकराया वैज्ञानिकों का भी सिर
Image Credit: केरल का जुड़वां बच्चों वाला अनोखा गांव!

About the Author

Santosh Kumar Mishra

Santosh Kumar Mishra

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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कोडिन्ही के जुड़वां बच्चों की कहानी किसी बड़ी रिसर्च लैब से नहीं, बल्कि एक स्कूल की क्लास से शुरू हुई थी. साल 2006 में आठवीं क्लास में पढ़ने वाली जुड़वां बहनों समीरा और फमीना ने अपने आसपास कुछ ऐसा नोटिस किया, जो शायद किसी और को उतना असामान्य नहीं लगा था.

दोनों बहनों ने देखा कि उनकी क्लास में ही कई बच्चे जुड़वां थे. बताया जाता है कि उस समय उनकी क्लास में करीब आठ जुड़वां जोड़ियां थीं. दोनों को यह संख्या कुछ ज्यादा लगी. स्कूल के एक असाइनमेंट के लिए उन्होंने इस पर छोटा सा सर्वे करने का फैसला किया. सर्वे के दौरान जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने गांव वालों का ध्यान भी इस तरफ खींचा. दोनों बहनों को अपने स्कूल में करीब 24 जुड़वां जोड़ियां मिली. इसके बाद गांव में इस अजीब संयोग को लेकर चर्चा शुरू हुई और लोगों ने अपने आसपास के परिवारों को भी गिनना शुरू किया. यहां करीब 400 से 550 जुड़वां जोड़ियों की मौजूदगी बताई जाती है, जबकि वैज्ञानिक आज भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस गांव में जुड़वां बच्चों के जन्म की दर इतनी ज्यादा क्यों है.

कुछ साल में सामने आ गई बड़ी तस्वीर

2006 की उस छोटी सी कोशिश के बाद 2008 में गांव में एक बड़ा सर्वे किया गया. तब कोडिन्ही में करीब 280 जुड़वां जोड़ियों की जानकारी सामने आने की बात कही गई. इसके बाद धीरे-धीरे यह गांव सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि देश और विदेश में भी चर्चा का विषय बन गया. मई 2026 की NDTV रिपोर्ट के में बताया गया था कि करीब 2,000 परिवारों वाले कोडिन्ही में अनुमानित 400 से 550 जुड़वां जोड़ियां रहती हैं. गांव में जुड़वां बच्चों के जन्म की दर करीब 42 से 45 जुड़वां जन्म प्रति 1,000 जन्म बताई जाती है. यह भारत में सामान्य तौर पर देखी जाने वाली दर से काफी ज्यादा है. यही आंकड़ा इस गांव को वैज्ञानिकों के लिए खास बनाता है. क्योंकि यहां जुड़वां होना सिर्फ एक-दो परिवारों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि कई पीढ़ियों और परिवारों में दिखाई देने वाला पैटर्न बताया जाता है.

यहां जुड़वां होना कोई बड़ी बात नहीं

बाहर से आने वाले किसी व्यक्ति के लिए एक जैसे दिखने वाले दो बच्चों को देखकर दोबारा देखना स्वाभाविक है. लेकिन कोडिन्ही के लोगों के लिए यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. यहां स्कूल में एक जैसे दिखने वाले बच्चे साथ पढ़ते हैं. गांव की गलियों में घूमते हुए आपको एक जैसी शक्ल वाले भाई-बहन मिल सकते हैं. कई परिवारों में तो जुड़वां बच्चों की एक से ज्यादा जोड़ियां होने की बात भी सामने आती है. मतलब जो चीज किसी दूसरे गांव में असाधारण लग सकती है, वह कोडिन्ही में बिल्कुल सामान्य है. यही इस जगह को और दिलचस्प बनाता है.

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल

कोडिन्ही में इतने ज्यादा जुड़वां बच्चे क्यों पैदा होते हैं? इस सवाल का जवाब आज भी पूरी तरह नहीं मिला है. वैज्ञानिकों ने इस घटना के पीछे कई संभावित वजहों पर विचार किया है. इनमें जेनेटिक्स यानी आनुवंशिक कारण, गांव का पर्यावरण, खान-पान और यहां तक कि स्थानीय पानी भी शामिल है. लेकिन अभी तक किसी एक वजह को इस असामान्य ट्विनिंग रेट का पक्का कारण नहीं माना जा सका है. यही वजह है कि कोडिन्ही की कहानी सिर्फ एक वायरल या अजीबोगरीब किस्सा नहीं है. यह वैज्ञानिकों के लिए भी एक दिलचस्प रिसर्च केस बन चुकी है.

जुड़वां बच्चों के सैंपल भी लिए गए

इस रहस्य को समझने के लिए देश के अलग-अलग संस्थानों से जुड़े रिसर्चर्स गांव तक पहुंचे हैं. 2016 में CSIR-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम ने भी कोडिन्ही का दौरा किया था. रिसर्चर्स ने जुड़वां बच्चों और उनके परिवारों से जुड़े सैंपल जुटाए, जिससे यह समझने की कोशिश की जा सके कि क्या इसके पीछे कोई खास जेनेटिक पैटर्न मौजूद है. हालांकि रिसर्च के बाद भी ऐसा कोई एक कारण सामने नहीं आया, जिसके आधार पर कहा जा सके कि कोडिन्ही में इतनी ज्यादा जुड़वां जोड़ियां सिर्फ इसी वजह से पैदा होती हैं.

क्या पानी या खान-पान है वजह?

कोडिन्ही के बारे में समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं. कुछ लोगों ने यहां के पानी को इसकी वजह माना तो कुछ ने खान-पान और स्थानीय जीवनशैली की तरफ इशारा किया. लेकिन किसी भी एक दावे को वैज्ञानिक तौर पर अंतिम जवाब नहीं माना गया है. जुड़वां बच्चों का जन्म कई अलग-अलग जैविक और आनुवंशिक कारणों से जुड़ा हो सकता है. इसलिए सिर्फ किसी एक चीज, जैसे पानी या खाने को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा. कोडिन्ही की खासियत यही है कि यहां मौजूद आंकड़े वैज्ञानिकों को लगातार नए सवाल देते हैं, लेकिन अभी तक कोई आसान जवाब नहीं मिला है.

'ट्विन विलेज' बन गई गांव की पहचान

समय के साथ कोडिन्ही के लोगों ने इस अनोखी पहचान को अपना लिया. यहां जुड़वां बच्चों के परिवारों को जोड़ने के लिए ट्विन्स एंड किन्स एसोसिएशन यानी TAKA भी बनाई गई. ऐसे परिवारों के लिए यह संगठन काफी खास है. आम जगहों पर जुड़वां बच्चों के माता-पिता को अपने अनुभव शेयर करने के लिए शायद बहुत कम लोग मिलते हैं. लेकिन कोडिन्ही में उनके आसपास ऐसे कई परिवार हैं, जो बिल्कुल उसी अनुभव से गुजर रहे हैं. गांव के अंदर लगा बोर्ड भी इसकी पहचान को मजेदार अंदाज में पेश करता है. इसे 'God's Own Twins Village' कहा जाता है, जो केरल के मशहूर 'God's Own Country' वाले टूरिज्म टैगलाइन की याद दिलाता है.

गांव वालों के लिए रहस्य, दुनिया के लिए रिसर्च

कोडिन्ही की सबसे दिलचस्प बात यही है कि यहां के लोगों के लिए जुड़वां बच्चों की मौजूदगी कोई रहस्य नहीं है. वे इनके साथ बड़े हुए हैं, स्कूल गए हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में इन्हें देखते आए हैं. लेकिन गांव से बाहर के लोगों और वैज्ञानिकों के लिए यह अब भी एक सवाल है. आखिर करीब 2,000 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में जुड़वां जन्म की दर इतनी ज्यादा कैसे हो गई? क्या इसके पीछे पीढ़ियों से चला आ रहा कोई जेनेटिक कनेक्शन है? क्या पर्यावरण का कोई असर है? या फिर कई छोटी-छोटी वजहें मिलकर यह तस्वीर बनाती हैं? फिलहाल इन सवालों का पक्का जवाब नहीं है.

कोडिन्ही में ‘डबल’ दिखना है बिल्कुल नॉर्मल

2006 में दो स्कूली बहनों ने अपनी क्लास में कुछ अजीब देखा था. उन्होंने गिनती शुरू की और एक छोटी सी जिज्ञासा ने पूरे गांव को दुनिया के सामने ला दिया. आज कोडिन्ही की पहचान सिर्फ केरल के एक शांत गांव की नहीं है. यह ऐसी जगह बन चुका है, जहां जुड़वां होना कोई हैरानी की बात नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. विज्ञान अभी इस पहेली का पूरा जवाब तलाश रहा है. तब तक कोडिन्ही की गलियों में एक जैसे चेहरे नजर आते रहेंगे और हर नई जुड़वां जोड़ी इस गांव की कहानी में एक और पन्ना जोड़ती रहेगी. शायद यही वजह है कि केरल का यह छोटा सा गांव दुनिया के लिए अब भी एक दिलचस्प सवाल बना हुआ है- आखिर यहां हर तरफ 'डबल' क्यों दिखाई देता है?

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