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28 साल तक 58,000 KM पैदल दुनिया घूमे कार्ल बुशबी: किडनैपर्स, बर्फीले तूफान, मौत को मात देकर घर लौटे; अब बन रही डॉक्यूमेंट्री

कार्ल बुशबी की 28 साल और 36,000 मील लंबी पैदल यात्रा की कहानी, जिन्होंने रेगिस्तान, किडनैपर्स और ध्रुवीय भालुओं का सामना कर इतिहास रच दिया है.

Written ByAlkesh Kushwaha
Published: Oct 14, 2026, 01:55 PM IST|Updated: Oct 14, 2026, 02:04 PM IST
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28 साल तक 58,000 KM पैदल दुनिया घूमे कार्ल बुशबी: किडनैपर्स, बर्फीले तूफान, मौत को मात देकर घर लौटे; अब बन रही डॉक्यूमेंट्री
Image Credit: मौत के मुंह से बाहर निकलकर कार्ल बुशबी ने रचा इतिहास, 36000 मील पैदल चलकर पूरा किया मिशन (Photo: Karl Bushby/Instagram SS)

About the Author

Alkesh Kushwaha

Alkesh Kushwaha

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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ब्रिटेन के रहने वाले पूर्व सैनिक कार्ल बुशबी ने साल 1998 में अपने घर हुल्ल से एक ऐसा सफर शुरू किया था, जो किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा रोमांचक और खतरनाक था. उन्होंने बिना किसी वाहन की मदद लिए पैदल ही पूरी दुनिया नापने की ठानी थी. 28 साल, 36,000 मील का सफर (लगभग 58,000 किमी), रेगिस्तान की चिलचिलाती धूप, किडनैपर्स के साये और जानलेवा पोलर बीयर का सामना करते हुए आखिरकार कार्ल बुशबी अपने घर वापस लौट आए हैं.

कैसे हुई सफर की शुरुआत?

द गार्जियन की खबर के मुताबिक, कार्ल बुशबी ने साल 1998 में अपनी आर्मी की नौकरी छोड़ने के बाद दुनिया घूमने का फैसला किया था. उनका प्लान सिर्फ 12 साल में इस सफर को पूरा करने का था, लेकिन दुनिया के नियम, वित्तीय संकट, वीजा संबंधी समस्याएं और महामारियों के कारण इसे पूरा होने में 28 साल लग गए. उन्होंने अपने सफर के लिए दो कड़े नियम बनाए थे. पहला यह कि वे आगे बढ़ने के लिए किसी भी तरह के ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल नहीं करेंगे और दूसरा यह कि जब तक मिशन पूरा नहीं होता, वे पैदल चलकर ही घर वापस लौटेंगे. उनके साथ इस सफर में उनका एक कस्टमाइज्ड गोल्फ ट्रॉली था जिसे वे प्यार से बीस्ट कहते थे. इसमें उनके खाने-पीने का सामान, कैंपिंग का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स चीजें थीं.

karl bushbi traveller

रेगिस्तान, जंगल और मौत का सामना

साउथ अमेरिका के टिएरा डेल फ्यूगो से शुरू हुआ यह सफर आसान नहीं था. रास्ते में उन्हें पैटागोनिया के बर्फीले तूफानों, अटकामा रेगिस्तान की चिलचिलाती गर्मी और दुनिया के सबसे खतरनाक जंगलों में से एक डेरियन गैप से गुजरना पड़ा. कोलंबिया में उन्हें ड्रग तस्करों और चरमपंथियों का सामना करना पड़ा. कई बार उन्हें बंदूक की नोक पर बंधक बनाया गया, लेकिन अपनी सूझबूझ और पुराने अखबारों की कटिंग्स दिखाकर उन्होंने अपनी जान बचाई.

पेरू में उन्हें गंभीर पेट का संक्रमण हो गया था, जहां एक डॉक्टर परिवार ने उनकी जान बचाई. इसके अलावा उन्होंने अलास्का से रूस के बीच बेरिंग जलडमरूमध्य को पैदल और तैरकर पार किया, जहां उनका सामना एक विशालकाय पोलर बीयर से हुआ था.

karl bushbi traveller

कैसे इतने दिनों तक घर से दूर रहे?

इतनी लंबी और खतरनाक यात्रा का असर कार्ल बुशबी के निजी जीवन पर भी पड़ा. जब उन्होंने यह सफर शुरू किया था, तब उनका बेटा बहुत छोटा था और वे अपने परिवार से दूर हो गए थे. रास्ते में उन्हें कई बार प्यार भी मिला, लेकिन उनकी इस जुनूनी यात्रा के कारण उनके रिश्ते ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए. कार्ल खुद मानते हैं कि यह सफर पूरी तरह से स्वार्थी था क्योंकि उनका पूरा ध्यान सिर्फ खुद को और अपने मिशन को बचाने पर था. हालांकि आज उनका अपने बेटे के साथ रिश्ता अच्छा है और उनका बेटा उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करता है.

 

karl bushbi traveller

सफर पूरा होने पर क्या कहा?

28 साल के बाद जब कार्ल बुशबी ने 5 अक्टूबर को इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया और ब्रिटेन की धरती पर कदम रखा, तो उनका यह सफर पूरा हुआ. डोवर में उन्होंने अपने जीवन की पहली फिश एंड चिप्स खाई. आज 57 साल की उम्र में कार्ल बुशबी खुद को थोड़ा बदला हुआ महसूस करते हैं. उनका कहना है कि इस यात्रा ने उन्हें सिखाया है कि इस दुनिया में नफरत से ज्यादा इंसानियत जिंदा है. अब वे अपनी इस महागाथा पर एक किताब लिख रहे हैं और फिल्ममेकर वर्नेर हर्जोग उन पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बना रहे हैं.

 

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