90 साल की उम्र में भी फिट है बॉडी! जापानी बॉडीबिल्डर की उन आदतों को जानिए, जो उम्र को भी दे सकती हैं मात
90 साल की उम्र में जहां ज्यादातर लोग बढ़ती उम्र के साथ कमजोरी और मसल्स लॉस को जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, वहीं जापान के बॉडीबिल्डर तोशिसुके कानाजावा ने इसी उम्र में स्टेज पर उतरकर नया उदाहरण पेश किया है. 90वें जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद उन्होंने ऑल जापान मास्टर्स फिटनेस चैंपियनशिप में 85+ कैटेगरी जीती. उनकी कहानी बताती है कि उम्र बढ़ना तय है, लेकिन शरीर को एक्टिव और मजबूत बनाए रखना काफी हद तक हम पर निर्भर करता है.
उम्र बढ़ने के साथ जहां ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी की रफ्तार धीमी कर देते हैं, वहीं जापान के तोशिसुके कानाजावा ने 90 साल की उम्र में भी अपने जुनून को नहीं छोड़ा. हाल ही में उन्होंने हिरोशिमा में हुए ऑल जापान मास्टर्स फिटनेस चैंपियनशिप में 85 साल और उससे ज्यादा उम्र की कैटेगरी में जीत हासिल की.
खास बात यह रही कि यह जीत उनके 90वें जन्मदिन के ठीक अगले दिन मिली. प्रतियोगिता में 41 से लेकर 90 साल तक की उम्र के करीब 200 खिलाड़ियों ने अलग-अलग 13 एज ग्रुप में हिस्सा लिया था. कानाजावा को अपनी कैटेगरी में छह दूसरे खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ा.
एक मिनट की परफॉर्मेंस ने जीत लिया दिल
कानाजावा की कैटेगरी में पहले सभी खिलाड़ियों ने सिंक्रोनाइज्ड प्रिलिमिनरी राउंड में हिस्सा लिया. इसके बाद बारी आई इंडिविजुअल फ्री पोजिंग रूटीन की. स्टेज पर कानाजावा ने करीब एक मिनट तक अपनी बॉडीबिल्डिंग पोजिंग दिखाई. उनकी परफॉर्मेंस पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और आखिरकार उन्होंने अपनी कैटेगरी का खिताब अपने नाम कर लिया. यह उनके लिए कोई पहला बड़ा खिताब नहीं था. इस जीत के साथ उनके मास्टर्स करियर की चैंपियनशिप जीतों की संख्या 17 बताई गई है. इनमें 15 जापान मास्टर्स टाइटल और दो जापान चैंपियनशिप टाइटल शामिल हैं.
20 साल की उम्र में शुरू हुआ था बॉडीबिल्डिंग का सफर
कानाजावा की फिटनेस कहानी अचानक 80 या 90 की उम्र में शुरू नहीं हुई. इसका कनेक्शन उनकी जवानी से है. उन्होंने शुरुआत एक कॉम्पिटिटिव स्विमर के तौर पर की थी. करीब 20 साल की उम्र में उन्होंने बॉडीबिल्डिंग की दुनिया में कदम रखा. शुरुआत के कुछ सालों में ही उन्हें बड़ी सफलता मिलने लगी. 24 साल की उम्र में उन्होंने प्रतिष्ठित मिस्टर जापान का खिताब जीता. तीन साल बाद 27 की उम्र में उन्होंने एक बार फिर यही टाइटल अपने नाम किया. इतनी कम उम्र में मिली इस सफलता के बावजूद उन्होंने 34 साल की उम्र में कॉम्पिटिशन बॉडीबिल्डिंग से दूरी बना ली.
16 साल तक खेल से पूरी तरह दूर रहे
कानाजावा के जीवन में इसके बाद एक लंबा ब्रेक आया. उन्होंने करीब 16 साल तक बॉडीबिल्डिंग की प्रतियोगिताओं से दूरी बनाए रखी. लेकिन 50 की उम्र में उन्होंने फिर से ट्रेनिंग शुरू करने का फैसला किया. इसकी वजह सिर्फ खुद को फिट रखना नहीं थी. वह अपनी पत्नी को भी मोटिवेट करना चाहते थे, जो अक्सर बीमार रहती थीं. कानाजावा की वापसी का यह फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ. 50 की उम्र में शुरू हुई दूसरी पारी ने उन्हें फिर प्रतियोगिता के स्टेज तक पहुंचा दिया.
पत्नी को हिम्मत देने के लिए खुद को बनाया मिसाल
कानाजावा की कहानी का यह हिस्सा इसे बाकी फिटनेस स्टोरीज से अलग करता है. उन्होंने अपनी ट्रेनिंग को सिर्फ मसल्स और मेडल तक सीमित नहीं रखा. पत्नी की तबीयत खराब रहने के दौरान वह खुद लगातार एक्सरसाइज और ट्रेनिंग करते रहे. उनका मकसद था कि पत्नी उन्हें देखकर हिम्मत लें और मुश्किल समय में खुद को कमजोर महसूस न करें. धीरे-धीरे ट्रेनिंग उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई. उम्र बढ़ती गई, लेकिन वर्कआउट से उनका रिश्ता नहीं टूटा.
मांस और मछली छोड़कर अपनाई सख्त डाइट
कानाजावा अपनी फिटनेस के लिए सिर्फ जिम पर निर्भर नहीं रहते. उनकी डाइट भी काफी सख्त बताई जाती है. उन्होंने कई दशक पहले मांस और मछली खाना छोड़ दिया. उनकी डाइट में ब्राउन राइस, नाट्टो यानी फर्मेंटेड सोयाबीन, अंडे और मिसो सूप जैसी चीजें शामिल रहती हैं. कॉन्टेस्ट के दौरान बॉडी को लीन रखने के लिए वह खाने को लेकर खास सावधानी बरतते हैं. उनका मानना है कि लंबे समय तक फिट रहने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना काफी नहीं है, बल्कि खान-पान और रोज की आदतों पर भी उतना ही कंट्रोल जरूरी है.
कहते हैं- हर साल झुर्रियां बढ़ती हैं, ताकत घटती है
90 साल की उम्र में भी ट्रेनिंग जारी रखने के पीछे कानाजावा का नजरिया बेहद सीधा है. उन्होंने अपनी जीत के बाद कहा कि हर साल शरीर पर झुर्रियां बढ़ती हैं और ताकत कम होती जाती है. लेकिन वह इस बदलाव को स्वीकार करके रुकने के बजाय मेहनत के जरिए उससे मुकाबला करना अपनी जिंदगी का तरीका मानते हैं. यही सोच शायद उन्हें आज भी दूसरे लोगों से अलग बनाती है. उनके लिए उम्र कोई ऐसी दीवार नहीं है, जिसके बाद सपनों पर रोक लग जाए.
अगला लक्ष्य भी तैयार है
कानाजावा की उम्र 90 पार कर चुकी है, लेकिन उनकी लिस्ट में आगे के लक्ष्य अभी खत्म नहीं हुए हैं. वह ट्रेनिंग जारी रखे हुए हैं और आगे भी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी 17वीं नेशनल टाइटल जीत की खुशी साझा करते हुए अपने समर्थकों का शुक्रिया अदा किया. साथ ही जापान चैंपियनशिप में आगे भी हिस्सा लेने की बात कही.
उम्र नहीं, आदतें तय करती हैं कितनी दूर जाना है
तोशिसुके कानाजावा की कहानी का सबसे बड़ा सबक उनका 17वां खिताब नहीं है. असली कहानी यह है कि उन्होंने करीब सात दशक पहले शुरू किए जुनून को उम्र के साथ खत्म नहीं होने दिया. 20 की उम्र में शुरू हुआ बॉडीबिल्डिंग का सफर, 34 पर आया ब्रेक, 50 पर हुई वापसी और 90 की उम्र में फिर स्टेज पर खड़े होने तक का सफर बताता है कि फिटनेस किसी एक उम्र की चीज नहीं है. उनकी कहानी यह भी याद दिलाती है कि शरीर की उम्र बढ़ सकती है, ताकत में उतार-चढ़ाव आ सकता है और जिंदगी में लंबे ब्रेक भी आ सकते हैं. लेकिन अगर जुनून जिंदा रहे तो वापसी का रास्ता हमेशा खुला रहता है.