Robot Ambulance: जरा सोचिए कि आप किसी होटल या मॉल में गए हैं और वहां काम कर रहा एक ह्यूमनॉइड रोबोट अचानक चलते-चलते बंद हो जाए या उसका कोई पार्ट टूट जाए तो क्या होगा? अब तक ऐसे रोबोट्स को कंपनी वापस भेजकर हफ्तों इंतजार करना पड़ता था. लेकिन टेक्नोलॉजी के मामले में हमेशा दो कदम आगे रहने वाले जापान ने इसका एक बहुत ही गजब और अनोखा सॉल्यूशन ढूंढ निकाला है. जापान ने दुनिया की पहली 'रोबोट एम्बुलेंस' पेश की है, जो खराब रोबोट्स का ऑन-द-स्पॉट इलाज करेगी.
इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंग की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान की जानी-मानी टेक कंपनी जीएमओ इंटरनेट ग्रुप ने इस स्पेशल एम्बुलेंस को बनाया है. यह दिखने में एक मॉडर्न वैन जैसी है, जिसे खास तौर पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स की इमरजेंसी सर्विस और रोडसाइड असिस्टेंस के लिए डिजाइन किया गया है. अगर किसी ऑफिस, होटल, फैक्ट्री या वेयरहाउस में काम करने वाला रोबोट अचानक खराब हो जाता है, तो यह एम्बुलेंस तुरंत वहां पहुंचेगी. टोक्यो की सड़कों पर जल्द ही यह वैन दौड़ती हुई दिखाई देने वाली है.
यह सिर्फ एक नॉर्मल वैन नहीं है, बल्कि एक चलता-फिरता रोबोट वर्कशॉप है. इस एम्बुलेंस में एक्सपर्ट इंजीनियर्स की टीम, रोबोट्स के स्पेयर पार्ट्स, रिपेयरिंग के हाई-टेक टूल्स और सबसे खास बात एक एक्स्ट्रा 'स्पेयर रोबोट' भी मौजूद रहेगा. जैसे ही किसी कस्टमर का रोबोट खराब होगा, यह टीम तुरंत लोकेशन पर पहुंचेगी और मामले की जांच करेगी.
कंपनी के इंजीनियर शोता ताकिज़ावा ने बताया कि अगर रोबोट में कोई छोटी-मोटी खराबी होगी तो इंजीनियर्स उसे मौके पर ही ठीक कर देंगे. लेकिन अगर खराबी बड़ी हुई और रोबोट को वर्कशॉप ले जाना पड़ा, तो टीम कस्टमर का काम रोकने नहीं देगी. एम्बुलेंस में आया दूसरा नया रोबोट वहां 'स्टेपनी' यानी टेंपरेरी रिप्लेसमेंट के तौर पर काम करने के लिए रख दिया जाएगा. जब पुराना रोबोट ठीक हो जाएगा तो उसे वापस लाकर नया वाला ले जाया जाएगा.
आजकल दुनिया भर के होटलों, वेयरहाउस और फैक्ट्रियों में इंसानों की जगह ह्यूमनॉइड रोबोट्स काम कर रहे हैं. अगर 50 लाख से 1 करोड़ रुपये की कीमत वाला रोबोट अचानक बंद हो जाए तो कंपनी का काम ठप हो जाता है. मरम्मत के लिए रोबोट को बाहर भेजने में कई दिन लग जाते हैं. जीएमओ एयर के सीईओ तोमोहिरो उचिदा ने बताया कि इसी समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने रोबोट एम्बुलेंस और रिप्लेसमेंट सर्विस का आइडिया निकाला है ताकि बिजनेस का एक दिन भी वेस्ट न हो.
दिलचस्प बात यह है कि यह एम्बुलेंस खुद से बिना ड्राइवर के चलने वाली या रोबोट को ठीक करने वाली पूरी तरह से ऑटोमैटिक गाड़ी नहीं है. इसमें इंसान यानी इंजीनियर्स ही गाड़ी चलाएंगे और वही रोबोट्स की मरम्मत करेंगे. यह पुरानी और नई टेक्नोलॉजी का एक बहुत ही शानदार कॉम्बिनेशन है. फिलहाल कंपनी ने टोक्यो में अपने हेडक्वार्टर पर एक ही एम्बुलेंस तैनात की है, लेकिन डिमांड बढ़ते ही ऐसी कई गाड़ियों को सड़कों पर उतारा जाएगा.
जापान सरकार का लक्ष्य है कि साल 2040 तक देश की हेल्थकेयर से लेकर मैन्युफैक्चरिंग जैसी अलग-अलग इंडस्ट्रीज में करीब 1 करोड़ रोबोट्स काम करें. अमेरिका और चीन से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच जापान का यह नया कदम काफी गेम-चेंजिंग माना जा रहा है. अगर इतनी बड़ी संख्या में रोबोट्स काम करेंगे, तो जाहिर सी बात है कि उनके खराब होने पर तुरंत रिपेयरिंग और एम्बुलेंस जैसी सर्विसेज की डिमांड भी बहुत तेजी से बढ़ने वाली है.