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क्या हाथ में स्मार्टफोन ले रखा है? टाइम ट्रैवल का सबूत या सिर्फ आंखों का धोखा, 160 साल पुरानी इस तस्वीर क्या है सच

160 साल पुरानी 'द एक्सपेक्टेड वन' पेंटिंग में एक लड़की हाथ में स्मार्टफोन जैसी चीज पकड़े नजर आ रही है. क्या यह टाइम ट्रैवल का सबूत है या आंखों का धोखा? जानिए पूरी मिस्ट्री.

Written ByAlkesh Kushwaha
Published: Sep 04, 2026, 08:47 AM IST|Updated: Sep 04, 2026, 08:51 AM IST
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क्या हाथ में स्मार्टफोन ले रखा है? टाइम ट्रैवल का सबूत या सिर्फ आंखों का धोखा, 160 साल पुरानी इस तस्वीर क्या है सच
Image Credit: the expected one painting

About the Author

Alkesh Kushwaha

Alkesh Kushwaha

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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अगर आपसे कोई कहे कि आईफोन या स्मार्टफोन का आविष्कार 21वीं सदी में नहीं बल्कि 160 साल पहले ही हो गया था, तो आप शायद हंसी में उड़ा देंगे. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 1860 की एक पेंटिंग ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. इस तस्वीर में एक लड़की जिस स्टाइल में अपने हाथों में एक छोटी सी चीज पकड़े हुए चल रही है, उसे देखकर लोग दावा कर रहे हैं कि यह टाइम ट्रैवल का सबसे बड़ा और पक्का सबूत है.

इंटरनेट पर आए दिन तरह-तरह के दावे वायरल होते रहते हैं, लेकिन इस बार मामला किसी आधुनिक वीडियो का नहीं बल्कि एक पुरानी कलाकृति का है. जर्मनी के म्यूनिख शहर में एक मशहूर म्यूजियम है, जिसका नाम 'नॉये पिनाकोथेक' है. इस म्यूजियम में 19वीं सदी के एक प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई चित्रकार फर्डिनेंड जॉर्ज वाल्डमुलर की बनाई हुई एक पेंटिंग टंगी है. इस पेंटिंग का नाम है 'द एक्सपेक्टेड वन'. इसे करीब 1860 के आसपास बनाया गया था. लेकिन आजकल यह पेंटिंग अपनी कलाकारी से ज्यादा अपने अंदर छिपे एक रहस्य की वजह से चर्चा में है.

पेंटिंग में आखिर ऐसा क्या दिख गया?

इस पेंटिंग को ध्यान से देखने पर एक बहुत ही सुंदर ग्रामीण इलाका नजर आता है. चारों तरफ हरियाली है, पहाड़ियां हैं और एक धूल भरी पगडंडी बनी हुई है. रास्ते में एक युवा लड़की चलती हुई आ रही है और थोड़ी दूरी पर झाड़ियों के पीछे एक लड़का हाथ में फूल लिए उसका इंतजार कर रहा है. पहली नजर में यह एक बेहद सिंपल और रोमांटिक तस्वीर लगती है. लेकिन असली ट्विस्ट तब आता है जब आपकी नजर उस लड़की के हाथों पर पड़ती है. लड़की ने अपने दोनों हाथों से एक छोटी सी आयताकार चीज को पकड़ रखा है और उसका पूरा ध्यान नीचे उसी चीज पर टिका हुआ है.

 

Painting

 

बिल्कुल आज की जनरेशन जैसा स्टाइल

जिस तरह से वह लड़की उस चीज को पकड़े हुए है, उसकी उंगलियां और अंगूठे जिस पोजीशन में हैं, वह किसी भी आज के यंग इंसान जैसी लगती है जो सड़क पर चलते-चलते अपने स्मार्टफोन या आईफोन पर स्क्रॉल कर रहा हो. उसकी गर्दन नीचे झुकी है और वह दुनिया से बेखबर होकर अपनी उस चीज में खोई हुई है. साल 2017 के आसपास जब कुछ आर्ट लवर्स ने इस डिटेल पर ध्यान दिया, तो उन्होंने इसकी फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दी. इसके बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई कि क्या वह लड़की सच में कोई टाइम ट्रैवलर है जो 21वीं सदी से स्मार्टफोन लेकर 1860 में चली गई थी?

एप्पल के आने से 147 साल पहले की बात

यह बात और भी ज्यादा रहस्यमयी इसलिए लगती है क्योंकि दुनिया का पहला आईफोन स्टीव जॉब्स की कंपनी एप्पल ने साल 2007 में लॉन्च किया था. अगर उससे भी पहले की टचस्क्रीन या कीपैड वाले मोबाइल की बात करें, तो नोकिया का पहला कीपैड वाला कम्युनिकेटर फोन 1996 में आया था. यानी 1860 में जब यह पेंटिंग बनाई गई थी, तब तो बिजली का इस्तेमाल भी ठीक से शुरू नहीं हुआ था, स्मार्टफोन की कल्पना करना तो बहुत दूर की बात है. ऐसे में 160 साल पहले किसी चित्रकार का ऐसी मुद्रा में लड़की को बनाना लोगों के होश उड़ा रहा है.

आर्ट एक्सपर्ट्स ने बताई असली सच्चाई

जब यह खबर बहुत ज्यादा फैल गई और लोग इसे टाइम ट्रैवल का पक्का सबूत मानने लगे, तब कला के जानकारों ने इस मिस्ट्री पर से पर्दा उठाया. पीटर रसेल नाम के एक व्यक्ति ने जब म्यूजियम में इस पेंटिंग को देखा, तो उन्होंने बताया कि यह सिर्फ हमारी सोच और टेक्नोलॉजी का फेर है. उन्होंने कहा कि अगर 1850 या 1860 के ज़माने का कोई भी इंसान इस पेंटिंग को देखता, तो वो तुरंत समझ जाता कि लड़की के हाथ में कोई मोबाइल नहीं बल्कि एक छोटी सी 'प्रार्थना की किताब' है. उस दौर में लड़कियां रास्ते में चलते-चलते पॉकेट साइज की धार्मिक किताबें पढ़ा करती थीं.

टेक्नोलॉजी ने बदला देखने का नजरिया

एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमारी सोच इस बात पर निर्भर करती है कि हम किस दौर में जी रहे हैं. 160 साल पहले लोग इसे एक संस्कारी लड़की मानते थे जो हाथ में बाइबल या प्रार्थना की किताब लिए जा रही है. लेकिन आज 21वीं सदी में हम हर वक्त अपने हाथों में स्मार्टफोन देखते हैं, इसलिए हमें उस लड़की के हाथ में किताब की जगह आईफोन और सोशल मीडिया नजर आने लगता है. यानी टाइम ट्रैवल का दावा असल में कोई साइंस का चमत्कार नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग का एक भ्रम है.

टिम कुक को भी दिखा था 350 साल पुराना आईफोन

दिलचस्प बात यह है कि ऐसा वाकया पहली बार नहीं हुआ है. साल 2016 में एप्पल कंपनी के सीईओ टिम कुक एम्सटर्डम के एक म्यूजियम में गए थे. वहां उन्होंने 350 साल पुरानी एक पेंटिंग देखी और मज़ाक में कहा कि उन्हें उस पेंटिंग में एक आदमी के हाथ में आईफोन दिखाई दे रहा है. उस पेंटिंग में भी एक व्यक्ति के हाथ में एक आयताकार चीज थी जिसे देखकर लगता था कि वह फोन पकड़कर बैठा है.

हालांकि टाइम ट्रैवल की थ्योरी पढ़ने और सुनने में बहुत रोमांचक लगती है, लेकिन इन पुरानी पेंटिंग्स से ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिलता. यह सिर्फ इस बात का सबूत है कि कैसे बदलती टेक्नोलॉजी ने हमारे चीजों को देखने और समझने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है. 160 साल पुरानी वह लड़की असल में अपनी पॉकेट बुक पढ़ रही थी, लेकिन आज का यूथ उसमें अपने 21वीं सदी के आईफोन को ढूंढ रहा है.
 

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