भारत घूमने आने वाले विदेशी टूरिस्ट अक्सर यहां की भीड़, रंग, खाना और संस्कृति की बातें करते हैं. लेकिन इशा ब्रैंडरहॉर्स्ट का अनुभव थोड़ा अलग था. वह भारत आईं तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि ऋषिकेश की एक छोटी सी सैर उनके लिए इतनी भावुक याद बन जाएगी.
स्टोरीटेलर और फिल्ममेकर के तौर पर काम करने वाली इशा ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में इसी अनुभव के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश के एक पुल पर चलते हुए अचानक उनके अंदर कुछ ऐसा हुआ, जिसे शब्दों में समझाना उनके लिए आसान नहीं था.
इशा ने वीडियो में बताया कि ऋषिकेश के पुल पर चलते समय उन्हें पहली बार किसी जगह से belonging यानी अपनेपन जैसा एहसास हुआ. यह एहसास इतना गहरा था कि उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे. उन्होंने बताया कि वह काफी समय से रो नहीं पाई थीं. उन्होंने खुद को बचाने के लिए अपने आसपास एक तरह की सख्त परत बना ली थी. शायद इसी वजह से भावनाओं को बाहर आने देना भी आसान नहीं था. लेकिन उस दिन ऋषिकेश में चलते हुए कुछ बदल गया. इशा के अनुसार, वह बस चलती रहीं और उनकी आंखों से आंसू निकलते रहे.
इशा ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि उस पल उन्हें लगा कि शायद पहली बार वह किसी जगह से सच में जुड़ी हुई हैं. यह सिर्फ घूमने या किसी खूबसूरत जगह को देखने जैसा अनुभव नहीं था. उनके लिए यह अंदर से आने वाला एहसास था. उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से खुद को संभालकर चल रही थीं और अपने आसपास एक सिक्योर दीवार बना रखी थी. लेकिन ऋषिकेश में वह दीवार जैसे कुछ देर के लिए हट गई.
ऋषिकेश उत्तराखंड का ऐसा शहर है, जहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. कोई योग सीखने आता है, कोई मेडिटेशन के लिए रुकता है तो कोई गंगा किनारे कुछ शांत पल बिताना चाहता है. यहां के घाट, मंदिर, आश्रम और गंगा पर बने पुल शहर को एक अलग पहचान देते हैं. खासकर विदेशी यात्रियों के बीच ऋषिकेश लंबे समय से लोकप्रिय है. इशा के वीडियो में भी इसी माहौल का असर दिखाई देता है. उन्होंने ऋषिकेश को सिर्फ एक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तरह नहीं देखा, बल्कि वहां उन्हें अपने साथ जुड़ा हुआ कोई एहसास मिला.
इशा ने वीडियो में कहा कि वह लंबे समय तक रो नहीं पाई थीं. उन्हें लगता था कि खुद को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने अपने चारों तरफ एक ठोस परत बना ली थी. ऐसे में जब ऋषिकेश में चलते हुए उनकी आंखों से आंसू निकले तो उनके लिए यह सिर्फ भावुक होने का पल नहीं था. यह शायद उन भावनाओं के बाहर आने का मौका भी था, जिन्हें वह काफी समय से अपने अंदर दबाकर रखे हुए थीं. उन्होंने बताया कि उस पल उन्हें पहली बार लगा कि वह किसी जगह की हैं.
इशा का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके अनुभव को अपने-अपने तरीके से समझाया. कई लोगों ने कहा कि ऋषिकेश का माहौल ही ऐसा है कि यहां आने वाले लोगों को एक अलग तरह की शांति महसूस होती है. एक यूजर ने लिखा कि ऋषिकेश की वाइब और atmosphere काफी अलग और मजबूत हैं. उसने बताया कि वहां जाने पर उसे भी हर बार कुछ ऐसा ही महसूस होता है. एक दूसरे यूजर ने कहा कि शायद यह उस जमीन से जुड़ाव था, जिसकी तलाश इशा को लंबे समय से थी. उसके मुताबिक, उन्होंने आखिरकार वह चीज खोज ली, जिसे वह ढूंढ रही थीं.
वीडियो पर आए कमेंट्स में कुछ लोगों ने इशा के अनुभव को आध्यात्मिक नजरिए से भी देखा. एक यूजर ने लिखा कि भारत के अलग-अलग शहरों की अपनी एक खास पहचान और आध्यात्मिक माहौल है. उसने ऋषिकेश को भगवान शिव से जुड़ा शहर बताते हुए कहा कि पवित्र जगहों के करीब जाने पर कई बार इंसान को ऐसे एहसास होते हैं, जिन्हें वह पहले शब्दों में समझ नहीं पाता. हालांकि, ये सोशल मीडिया यूजर्स की अपनी राय और व्यक्तिगत अनुभव हैं. इशा ने खुद अपने वीडियो में किसी धार्मिक दावे की बात नहीं की. उन्होंने मुख्य रूप से अपने अंदर आए भावनात्मक बदलाव और अपनेपन के एहसास के बारे में बताया.
इशा के वीडियो की सबसे दिलचस्प बात यही है कि वह ऋषिकेश की खूबसूरती से ज्यादा उस जगह के साथ अपने रिश्ते की बात करती नजर आती हैं. उनके लिए भारत की यात्रा सिर्फ घूमने और नई जगहें देखने तक सीमित नहीं रही. उन्होंने जिस तरह अपने पुराने भावनात्मक संघर्ष और फिर अचानक रो पड़ने के पल को बताया, उससे लगता है कि यह ट्रिप उनके लिए निजी तौर पर भी काफी मायने रखती है. उनकी कहानी सुनकर एक यूजर ने लिखा कि भारत कई बार इंसान के उस रूप को हिला देता है, जिसे वह लंबे समय से अपने बारे में बना चुका होता है. लगातार खुद को साबित करने और अपनी बनाई हुई पहचान को बचाने की कोशिश में इंसान असल जिंदगी जीना भूल सकता है.
इस पूरे वीडियो में एक और चीज लोगों को पसंद आई और वह है इशा और उनकी मां के बीच दिखाई देने वाला रिश्ता. अपनी मां के कॉलेज के पहले दिन उनके साथ जाना, हॉस्टल दिखाना और उनकी घबराहट को कैमरे में कैद करना किसी सामान्य कॉलेज व्लॉग जैसा लग सकता है. लेकिन इस कहानी में उम्र के साथ पढ़ाई को लेकर बनी धारणाओं को तोड़ने वाली बात भी है. इशा की मां खुद मजाक में कहती हैं कि जिस उम्र में उन्हें राम-ध्यान करना चाहिए, उस उम्र में उन्हें पढ़ने भेज दिया गया है. उनकी यह बात वीडियो में माहौल को हल्का कर देती है.
इशा के लिए ऋषिकेश की वह सैर शायद कुछ मिनटों की रही होगी, लेकिन उसका असर लंबे समय तक रहने वाला है. एक पुल पर चलते हुए अचानक रो पड़ना और किसी जगह को पहली बार अपना महसूस करना उनके लिए इस भारत यात्रा की सबसे खास याद बन गया. सोशल मीडिया पर उनका वीडियो लोगों को इसलिए भी पसंद आ रहा है क्योंकि इसमें कोई बड़ा दावा या चमक-दमक नहीं है. बस एक विदेशी महिला है, जो भारत में मिले एक ऐसे एहसास को लोगों के साथ साझा कर रही है, जिसे वह खुद भी पूरी तरह शब्दों में नहीं बांध पा रही.
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