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बगीचे में टाइल्स लगाने के लिए खोदी मिट्टी, नीचे से निकल आया 1100 साल पुराना खजाना: 18.5 किलो चांदी देखकर उड़े होश, मिला थॉर का हथौड़ा

डेनमार्क में एक शख्स अपने घर के बाहर नई टाइल्स लगाने के लिए जमीन तैयार कर रहा था. उसे क्या पता था कि घास, पत्थर और बजरी हटाते-हटाते उसके हाथ करीब 1000 साल पुराने ऐसे खजाने तक पहुंच जाएंगे, जो पूरे देश में अपनी तरह का सबसे बड़ा वाइकिंग सिल्वर होर्ड निकलेगा. जमीन के नीचे से करीब 700 चांदी की चीजें और टुकड़े मिले, जिनका कुल वजन लगभग 18.5 किलो है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Sep 23, 2026, 08:00 AM IST | Updated: Sep 24, 2026, 06:15 AM IST
Image Credit: घर के बगीचे में मिला खजाना
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सोचिए, कोई शख्स अपने घर के बाहर बैठकर बस बगीचे की जमीन ठीक कर रहा हो. मकसद भी कोई बड़ा नहीं है, बस उसको नई टाइल्स का टेरेस बनाना है. लेकिन अचानक जमीन के अंदर से ऐसी आवाज आए कि हाथ रुक जाए. पहले उसको लगा कि शायद कोई पुराना लोहे का टुकड़ा फंसा है. फिर मिट्टी हटाई और एक धातु की चीज हाथ में आई.

उसके बाद दूसरी, तीसरी और फिर लगातार कई चीजें निकलने लगीं. डेनमार्क के रीबिल्ड इलाके में कुछ ऐसा ही हुआ. फर्क सिर्फ इतना था कि जमीन से निकली चीजें कबाड़ नहीं, बल्कि वाइकिंग दौर की चांदी थीं, जिनका कुल वजन लगभग 18.5 किलो था. इनमें सिक्के, चांदी की छड़ें, गहने और थॉर का छोटा हथौड़ा भी शामिल है.

आधे घंटे की खुदाई में बदल गई कहानी

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, घर का मालिक रीबिल्ड इलाके में अपने बगीचे में नई टाइल वाली टेरेस बनाने की तैयारी कर रहा था. इसके लिए उसे घास, पत्थर और बजरी हटानी थी. काम देखने में रोजमर्रा के बगीचे के काम जैसा ही था. करीब आधे घंटे तक खुदाई करने के बाद उसके औजार की टक्कर जमीन के अंदर किसी चीज से हुई. आवाज कुछ अलग थी. उसे लगा कि शायद पुराना लोहा, तार या बाड़ का कोई हिस्सा जमीन में दबा होगा. लेकिन उसने जब मिट्टी को हाथ से हटाना शुरू किया तो मामला बदल गया. एक के बाद एक धातु की चीजें बाहर आने लगीं. पहले गहने, फिर सिक्के और चांदी की छड़ें. तब जाकर उसे अंदाजा हुआ कि उसके बगीचे के नीचे कुछ ऐसा दबा है, जिसकी कीमत सिर्फ चांदी के वजन से नहीं आंकी जा सकती.

मिट्टी के बर्तन में दबा था खजाना

पुरातत्वविदों के अनुसार, यह खजाना वाइकिंग दौर की 10वीं सदी का है. इसे जमीन के अंदर एक मिट्टी के बर्तन में रखा गया था. बाद में बर्तन का कुछ हिस्सा टूटने या खुलने के कारण कई चीजें आसपास की मिट्टी में फैल गईं. खुदाई के दौरान करीब 320 वस्तुएं और उनके टुकड़े उसी मूल मिट्टी के बर्तन के भीतर मिले. इनका वजन करीब 6.4 किलो बताया गया है. बाकी सामान बर्तन के आसपास की मिट्टी में मिला. पूरे खजाने में करीब 700 वस्तुएं और टुकड़े हैं और चांदी का कुल वजन लगभग 18.5 किलो है. संग्रहालय के मुताबिक, यह डेनमार्क में अब तक मिला सबसे बड़ा ज्ञात वाइकिंग सिल्वर होर्ड है.

सिक्के, गहने और चांदी की छड़ें

खजाना सिर्फ सिक्कों का ढेर नहीं है. इसमें चांदी की छड़ें, कंगन, गहने, अलग-अलग आकार के चांदी के टुकड़े और सिक्के मिले हैं. पुरातत्वविदों ने करीब 47 पूरे सिक्कों और सिक्कों के टुकड़ों की पहचान की है. इन चीजों को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि उस दौर में चांदी सिर्फ पहनने की चीज नहीं थी. उसका इस्तेमाल संपत्ति और लेन-देन के लिए भी होता था. कई चांदी की चीजें टुकड़ों में मिली हैं. इसका मतलब यह हो सकता है कि उस समय चांदी को वजन के हिसाब से भी इस्तेमाल किया जाता था. किसी चीज की कीमत उसके डिजाइन से ज्यादा उसके वजन और चांदी की मात्रा से तय हो सकती थी.

अरब से लेकर इंग्लैंड तक के सिक्के

इस खजाने की खासियत सिर्फ इसका वजन नहीं है. इसमें अलग-अलग इलाकों से जुड़े सिक्के भी मिले हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां अरब दुनिया से जुड़े सिक्कों के साथ एंग्लो-सैक्सन इलाकों के सिक्के भी मिले हैं. यही चीज पुरातत्वविदों के लिए खास है. करीब एक हजार साल पहले यूरोप के इस हिस्से में रहने वाले लोगों का संपर्क कितनी दूर तक था, इसकी एक झलक इन सिक्कों से मिलती है. यानी जिस समय आज जैसी सड़कें, ट्रेनें या इंटरनेट जैसी कोई चीज नहीं थी, उस दौर में भी सामान, चांदी और सिक्के लंबी दूरी तय कर रहे थे. इन चीजों से वाइकिंग दौर के व्यापार और आर्थिक नेटवर्क को समझने में मदद मिल सकती है.

चांदी की छड़ पर लिखी है रहस्यमयी लिपि

खजाने में मिली एक चांदी की छड़ ने कहानी को और दिलचस्प बना दिया है. उस पर रनिक लिपि में कुछ निशान खुदे हुए हैं. संग्रहालय से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इसे संभव तौर पर 'hutu' पढ़ा जा सकता है. लेकिन इसका मतलब क्या है, यह अभी साफ नहीं है. क्या यह किसी व्यक्ति का नाम था? किसी मालिक की पहचान? या फिर कोई दूसरी निशानी? फिलहाल इसका पक्का जवाब नहीं है. यही एक छोटी सी लिखावट हजार साल पुराने खजाने के मालिक और उसके इस्तेमाल को समझने में पुरातत्वविदों के लिए अहम सुराग बन सकती है.

खजाने में मिला थॉर का छोटा हथौड़ा

चांदी के सिक्कों और गहनों के बीच एक छोटी सी चीज और मिली, जिसने सबका ध्यान खींचा- थॉर का हथौड़ा. वाइकिंग संस्कृति में थॉर एक प्रमुख देवता थे और उनका हथौड़ा धार्मिक पहचान से जुड़ा खास प्रतीक माना जाता था. खजाने में इसका मिलना बताता है कि इसमें सिर्फ आर्थिक कीमत वाली चीजें ही नहीं थीं, बल्कि धार्मिक या निजी महत्व की वस्तुएं भी शामिल थीं. कुछ चांदी की वस्तुओं पर नॉर्स प्रतीकों के साथ ईसाई क्रॉस जैसे निशान भी मिले हैं. यह उस दौर में बदलती धार्मिक दुनिया की झलक दे सकता है.

आखिर किसका था इतना बड़ा खजाना?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 18.5 किलो चांदी आखिर किसकी थी? पुरातत्वविदों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी रखने वाला व्यक्ति सामान्य आदमी नहीं रहा होगा. उसके पास पैसा, संपत्ति और दूर तक फैले व्यापारिक संपर्क रहे होंगे. संभव है कि वह अपने इलाके में प्रभावशाली व्यक्ति रहा हो. लेकिन उसका नाम क्या था, यह अभी पता नहीं है. इसी तरह यह भी साफ नहीं है कि उसने खजाना जमीन में क्यों छिपाया था. हो सकता है उस समय कोई खतरा रहा हो और उसने अपनी संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए उसे जमीन में दबा दिया हो. यह भी संभव है कि वह इसे वापस लेने की स्थिति में ही न रहा हो. लेकिन ये सिर्फ संभावनाएं हैं. पुरातत्वविदों के पास फिलहाल इसका पक्का जवाब नहीं है.

मालिक लौटकर क्यों नहीं आया?

वाइकिंग दौर में कीमती सामान को जमीन में छिपाना असामान्य नहीं माना जाता. जब हालात अस्थिर हों या यात्रा पर जाना हो, तो लोग अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए जमीन का सहारा ले सकते थे. लेकिन रीबिल्ड के इस खजाने के साथ एक बात आज भी रहस्य है- जिसने इसे छिपाया, वह इसे लेने वापस क्यों नहीं आया? करीब एक हजार साल तक चांदी उसी जमीन के नीचे पड़ी रही. ऊपर से वहां समय के साथ घर और बगीचा बन गया. पीढ़ियां गुजरती रहीं, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि पैरों के नीचे इतिहास का इतना बड़ा हिस्सा दबा हुआ है.

इस इलाके ने पहले भी खोले हैं पुराने राज

रीबिल्ड का यह इलाका पहले भी पुरानी दौलत और वाइकिंग दौर से जुड़े अवशेष दे चुका है. हाल के वर्षों में यहां सोने और चांदी की दूसरी वाइकिंग खोजें भी हुई हैं. इसी वजह से पुरातत्वविदों के लिए यह इलाका और ज्यादा दिलचस्प हो गया है. इतनी बड़ी मात्रा में चांदी का मिलना इस बात की तरफ इशारा करता है कि करीब एक हजार साल पहले यह इलाका सिर्फ कोई सामान्य जगह नहीं था. यहां धन, व्यापार और लोगों की आवाजाही का महत्व रहा होगा.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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