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'किराया जीरो, सुकून 100%': दिल्ली छोड़ सिक्किम के पहाड़ी गांव में बसी महिला ने बताया महीने का खर्च; बजट देख उड़े होश

दिल्ली में रहने का मतलब अक्सर लंबे ट्रैफिक, महंगे किराए और हर महीने बढ़ते खर्चों से जूझना होता है. लेकिन एक परिवार ने इस जिंदगी से अलग रास्ता चुन लिया. करीब दो दशक दिल्ली में बिताने के बाद 37 साल की एक महिला अपने परिवार के साथ सिक्किम के गांव में रहने चली गईं. यहां छह महीने बिताने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि उनका पूरा परिवार करीब 32 हजार रुपये महीने में कैसे गुजारा कर रहा है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Nov 07, 2026, 10:10 AM IST | Updated: Nov 07, 2026, 10:15 AM IST
Image Credit: @imahome1 | दिल्ली छोड़कर सिक्किम के गांव में बसी महिला!
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बड़े शहरों में रहने वाले कई लोग कभी न कभी ऐसी जिंदगी का सपना देखते हैं, जहां सुबह हॉर्न और ट्रैफिक के शोर से नहीं, बल्कि चिड़ियों की चहचहाहट से हो. जहां घर पहुंचने के लिए घंटों जाम में न फंसना पड़े और महीने की कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में न चला जाए. दिल्ली में करीब 20 साल बिताने के बाद एक परिवार ने भी कुछ ऐसा ही फैसला किया.

37 साल की इस महिला ने अपने परिवार के साथ राजधानी छोड़कर सिक्किम के एक गांव में रहने का फैसला किया. यहां उन्होंने अपने पुश्तैनी घर को नया ठिकाना बनाया. महिला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि गांव में रहने के बाद उनकी जिंदगी और महीने का बजट, दोनों काफी बदल गए हैं.

किराया नहीं देना पड़ता, इसलिए बच जाते हैं पैसे

महिला के अनुसार, परिवार का हर महीने का कुल खर्च करीब 32 हजार रुपये है. इसमें सबसे बड़ी राहत यह है कि घर का किराया नहीं देना पड़ता. दिल्ली जैसे शहर में घर का किराया कई परिवारों के बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता है. कई बार सैलरी का आधा पैसा इसी में चला जाता है. लेकिन सिक्किम के गांव में पुश्तैनी घर होने के कारण उन्हें हर महीने किराए की चिंता नहीं करनी पड़ती. इसी वजह से कम आमदनी में भी परिवार अपने जरूरी खर्च आसानी से संभाल पा रहा है.

राशन और सब्जियों पर खर्च होते हैं 15 हजार रुपये

महिला ने अपने वीडियो में महीने के खर्च का हिसाब भी बताया है. उनके अनुसार, परिवार का सबसे बड़ा खर्च राशन और सब्जियों पर होता है. इसके लिए हर महीने करीब 15 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं. गांव में रहने का एक फायदा यह भी है कि उन्हें आसपास उगी ताजी सब्जियां मिल जाती हैं. महिला ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली ऑर्गेनिक सब्जियां उनके खाने का अहम हिस्सा हैं. शहरों में जहां अच्छी और ताजी सब्जियां खरीदने के लिए भी अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ती है, वहीं गांव में यह सुविधा आसानी से मिल जाती है.

 

 

बेटियों की पढ़ाई पर हर महीने 7 हजार रुपये

परिवार में दो बेटियां हैं और उनकी पढ़ाई भी महीने के बजट का अहम हिस्सा है. वीडियो में महिला ने बताया कि दोनों बेटियों की स्कूल फीस और आने-जाने के किराए पर करीब 7 हजार रुपये खर्च होते हैं. परिवार ने गांव में रहने का फैसला जरूर किया है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को लेकर कोई समझौता नहीं किया. यही वजह है कि शिक्षा से जुड़े खर्च को भी उन्होंने अपने मासिक बजट में जगह दी है.

बिजली और पेट्रोल का बिल भी काफी कम

बड़े शहरों में बिजली और गाड़ी के ईंधन पर होने वाला खर्च भी कई बार जेब पर भारी पड़ता है. लेकिन महिला के बताए हिसाब से गांव में उनका बिजली बिल करीब 500 से 700 रुपये के बीच आता है. वहीं, पेट्रोल पर महीने में लगभग 1 हजार रुपये खर्च होते हैं. इस तरह बिजली और पेट्रोल का कुल खर्च करीब 1500 से 1700 रुपये बैठता है. गांव में कई जगह पैदल पहुंचना आसान होने के कारण परिवार को हर छोटे काम के लिए गाड़ी निकालने की जरूरत भी नहीं पड़ती.

घूमने-फिरने और दूसरे कामों के लिए 8 हजार रुपये

महिला ने बताया कि घर के छोटे-मोटे कामों और घूमने-फिरने के लिए भी परिवार अलग से पैसे रखता है. कपड़े धोने और रोजमर्रा के दूसरे कामों पर करीब 3 हजार रुपये खर्च होते हैं. वहीं, दोस्तों के साथ बाहर जाने और घूमने-फिरने के लिए लगभग 5 हजार रुपये का बजट है. हालांकि, परिवार की कोशिश रहती है कि आसपास की जगहों पर पैदल ही जाए. इससे कई बार घूमने-फिरने का खर्च भी नहीं आता. यानी हर बार बाहर निकलने के लिए गाड़ी या पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है.

सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आई नई जिंदगी

महिला की यह कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके फैसले की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि साफ हवा, साफ पानी और ताजी सब्जियों के बीच रहने का मौका मिलना अपने आप में बड़ी बात है. एक यूजर ने सिक्किम की तारीफ करते हुए लिखा कि आज के दौर में शुद्ध और ऑर्गेनिक सब्जियां मिलना किसी वरदान से कम नहीं है. वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि साफ हवा और साफ पानी ही जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी हैं.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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