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'यहां सब अपनी लेन में चलते हैं, कोई घूरता नहीं...' भूटान पहुंचकर भारतीय महिला ने बताई ऐसी बातें, VIDEO वायरल

भारत में पली-बढ़ी एक महिला ने भूटान पहुंचने के बाद वहां की साफ सड़कें, शांत ट्रैफिक, कम हॉर्न और सुरक्षित माहौल की तुलना भारत से की है. महिला का कहना है कि भारत में प्रदूषण, ट्रैफिक, हॉर्न और सड़क पर होने वाली अव्यवस्था को हमने इतना सामान्य मान लिया है कि कई बार हमें इसका एहसास भी नहीं होता.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 06, 2026, 10:56 AM IST | Updated: Oct 06, 2026, 11:14 AM IST
Image Credit: @finding.neha
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किसी दूसरे देश की यात्रा के दौरान कई बार ऐसी चीजें दिखाई देती हैं, जिन्हें हम अपने शहर में रहते हुए नोटिस ही नहीं करते. भारत में जन्मी और पली-बढ़ी कंटेंट क्रिएटर नेहा राणा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. भूटान की यात्रा के दौरान उन्होंने अपने आसपास के माहौल को ध्यान से देखा और फिर उसकी तुलना भारत से करने लगीं.

नेहा ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में पहले भारत की तरफ का नजारा दिखाया. इसके बाद कैमरा भूटान की तरफ गया. उनका कहना था कि बॉर्डर पार करने के बाद सड़क, ट्रैफिक और आसपास के माहौल में उन्हें काफी फर्क महसूस हुआ. भूटान की यात्रा के दौरान पहली बार उन्हें लगा कि रोजमर्रा की जिंदगी इससे बिल्कुल अलग भी हो सकती है.

भारत में ट्रैफिक और हॉर्न से लेकर घूरने तक का जिक्र

नेहा ने वीडियो में भारत की तरफ ट्रैफिक, गलत दिशा में चलती गाड़ियों, सड़क किनारे पड़े कचरे और बेवजह बजते हॉर्न का जिक्र किया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सड़क पर चलते समय पुरुषों के घूरने जैसी चीजों का सामना करना पड़ता है. उनका कहना था कि ऐसी चीजें भारत में इतनी आम हो गई हैं कि लोग कई बार उन्हें जिंदगी का सामान्य हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन भूटान पहुंचने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि सड़क पर चलने का अनुभव इससे काफी अलग हो सकता है.

'यहां खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया'

भूटान की सड़क पर पहुंचने के बाद नेहा ने वीडियो में अपना अनुभव बताते हुए कहा कि उन्हें वहां काफी सुरक्षित महसूस हुआ. उन्होंने सड़क पर बेवजह हॉर्न न बजने और साफ-सफाई पर ध्यान दिलाया. वीडियो में वह सड़क के किनारे चलते हुए नजर आती हैं. आसपास ट्रैफिक है, लोग सड़क पार कर रहे हैं और गाड़ियां चल रही हैं. लेकिन नेहा के अनुसार, पूरे माहौल में एक अलग तरह की शांति दिखाई देती है. उनके लिए यह इसलिए भी खास था क्योंकि सड़क पर भीड़ या गाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें वैसा तनाव महसूस नहीं हुआ, जैसा वह भारत की कई सड़कों पर महसूस करती हैं.

 

 

ट्रैफिक लाइट नहीं, फिर भी लोग अपनी लेन में

नेहा ने भूटान की ट्रैफिक व्यवस्था का एक और पहलू दिखाया. उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर ट्रैफिक लाइट नहीं होने के बावजूद गाड़ियां अपनी लेन में चल रही थीं. उन्होंने बताया कि सड़क पार करने वाले लोगों को देखकर गाड़ियां रुक जाती हैं और पैदल चलने वालों को रास्ता दिया जाता है. उनके लिए यह छोटी बात नहीं थी. उनका कहना था कि सड़क पर व्यवस्था सिर्फ ट्रैफिक लाइट या पुलिस के भरोसे नहीं चल रही थी, बल्कि लोग खुद भी नियमों का ध्यान रख रहे थे.

'मेरा मकसद भारत को नीचा दिखाना नहीं'

नेहा ने अपनी बात रखते हुए यह भी साफ किया कि उनका मकसद भारत को खराब या भूटान को परफेक्ट बताना नहीं है. वह असल में लोगों की जिम्मेदारी की बात करना चाहती थीं. उन्होंने कहा कि भूटान में लोगों को अपने आसपास की जगह की जिम्मेदारी लेते हुए देखकर उन्हें लगा कि भारत में भी अगर लोग अपने स्तर पर ऐसी जिम्मेदारी लेना शुरू करें तो काफी चीजें बदल सकती हैं. उनकी बात का सबसे बड़ा हिस्सा यही था कि सड़कें और शहर सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं होते. वहां रहने वाले लोगों का व्यवहार भी किसी जगह की तस्वीर तय करता है.

30 साल में पहली बार महसूस हुआ यह फर्क 

अपने पोस्ट के कैप्शन में नेहा ने बताया कि वह भारत में ही पैदा हुईं और यहीं पली-बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि करीब 30 साल की उम्र तक उन्होंने दूसरे देश की यात्रा नहीं की थी. इस वजह से प्रदूषण, हॉर्न, ट्रैफिक जाम, अव्यवस्थित सड़कें और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं उनके लिए हर रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं. लेकिन भूटान पहुंचने के बाद पहली बार उन्हें लगा कि सामान्य जिंदगी का अनुभव इससे अलग भी हो सकता है. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा सोचने पर मजबूर कर गई.

'यहां जो सामान्य है, वह भारत में अलग क्यों लगता है?'

नेहा ने कहा कि भूटान में साफ हवा, कम शोर, शांत सड़कें और सुरक्षित माहौल उन्हें किसी खास सुविधा जैसे नहीं लगे. बल्कि उन्हें यह सब वहां की सामान्य जिंदगी का हिस्सा लगा. उन्होंने रात में अकेले चलने को लेकर भी अपने अनुभव का जिक्र किया. उनका कहना था कि उन्हें लगातार अपनी सुरक्षा के बारे में सोचने की जरूरत महसूस नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वहां बेवजह घूरने जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. यही तुलना उनके वीडियो का सबसे अहम हिस्सा बन गई. सवाल यह नहीं था कि भूटान भारत से बेहतर है या नहीं. सवाल यह था कि ऐसी कई बुनियादी चीजें भारत के शहरों में भी सामान्य क्यों नहीं हो सकतीं.

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- बात में दम है

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं. कई लोगों ने नेहा की बात का समर्थन किया और कहा कि भारत को सबसे पहले लोगों को अपनी जिम्मेदारी और सड़क पर अपने व्यवहार पर ध्यान देने की जरूरत है. एक यूजर ने लिखा कि हमें सिर्फ बुनियादी नागरिक समझ की जरूरत है. एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में बहुत सी परेशानियां ऐसी हैं, जिन्हें लोगों के व्यवहार में बदलाव से कम किया जा सकता है. एक और यूजर ने तो यहां तक लिखा कि उसने भारत के अलावा किसी दूसरे देश में इस तरह हॉर्न की आवाज नहीं सुनी. वहीं एक अन्य कमेंट में कहा गया कि भारत की करीब 60 फीसदी समस्याएं लोगों के स्तर से जुड़ी हुई हैं.

कुछ लोगों ने तुलना पर भी उठाए सवाल

हालांकि, हर कोई इस तुलना से सहमत नहीं था. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि भारत और भूटान की सीधी तुलना करना सही नहीं होगा. दोनों देशों की आबादी, शहरों का साइज, जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक स्थिति काफी अलग है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत के हर हिस्से की तस्वीर एक जैसी नहीं है. देश में कई ऐसे शहर और इलाके हैं, जहां लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं, कम हॉर्न बजाते हैं और सार्वजनिक जगहों की सफाई का ध्यान रखते हैं. एक यूजर ने खास तौर पर बॉर्डर इलाके की तुलना पूरे भारत से करने पर सवाल उठाया और कहा कि भारत बहुत ज्यादा आबादी वाला देश है और कई जगहों पर सड़कें बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के तौर पर इस्तेमाल होती हैं.

भारत में भी ऐसे कई शहर और इलाके मौजूद हैं

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारत के अंदर ही कई जगहों पर ट्रैफिक और लोगों के व्यवहार की तस्वीर बाकी बड़े शहरों से अलग दिखाई देती है. सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों का उदाहरण देते हुए यूजर्स ने कहा कि वहां भी कई जगहों पर बेवजह हॉर्न और सड़क पर अव्यवस्था कम देखने को मिलती है. मतलब सवाल सिर्फ देश बनाम देश का नहीं है. असल सवाल यह है कि किसी जगह के लोग अपने आसपास की सड़क, पब्लिक जगहों और दूसरे लोगों के प्रति कितनी जिम्मेदारी दिखाते हैं.

भूटान की यात्रा ने महिला को सोचने पर मजबूर किया

नेहा का वीडियो इसी वजह से चर्चा में है. क्योंकि उन्होंने भारत को छोड़कर किसी दूसरे देश को चुनने की बात नहीं की, बल्कि अपने पर्सनल अनुभव के आधार पर एक फर्क दिखाया. उनकी बात का केंद्र साफ हवा या शांत सड़क से ज्यादा वह एहसास था, जो किसी व्यक्ति को अपने आसपास के माहौल से मिलता है. भूटान में उन्हें लगा कि सड़क पर चलना, ट्रैफिक के बीच से गुजरना और अकेले बाहर निकलना इतना तनाव वाला काम नहीं है. इस अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि भारत के शहरों में भी ऐसी छोटी-छोटी चीजों को बेहतर बनाने की शुरुआत आखिर कहां से हो सकती है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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