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न स्पाइडरमैन, न सुपरहीरो: चीन के लड़के ने बना डाला उड़ने वाला होवरबोर्ड, नदी-पहाड़ के ऊपर हवा में भरी उड़ान; VIDEO वायरल

फिल्मों में आपने स्पाइडरमैन और ग्रीन गोब्लिन जैसे किरदारों को हवा में उड़ते हुए देखा होगा, लेकिन चीन के एक 26 साल के लड़के ने इस कल्पना को हकीकत में बदलने की कोशिश की है. उसने करीब दो महीने की मेहनत से ऐसा उड़ने वाला होवरबोर्ड तैयार किया, जिस पर बैठकर वह यांग्त्जी नदी, पहाड़ों और शहर की सड़कों के ऊपर से गुजरा. इस अनोखे आविष्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है.

न स्पाइडरमैन, न सुपरहीरो: चीन के लड़के ने बना डाला उड़ने वाला होवरबोर्ड, नदी-पहाड़ के ऊपर हवा में भरी उड़ान; VIDEO वायरल
Image Credit: X-@sxrbggpp | चीनी लड़के ने बनाया हवा में उड़ने वाला होवरबोर्ड!

बचपन में हमने और आपने भी टीवी पर शक्तिमान या किसी सुपरहीरो को देखकर उड़ने का सपना देखा होगा. हम सबको उन्हें देखकर लगता था कि जैसे ये लोग आसमान में उड़ जाते हैं, क्या कभी हम भी ऐसे उड़ पाएंगे. क्या कभी कोई ऐसा यंत्र बनेगा, जिस पर सवार होकर हम भी आसमान में उड़ सकें. फिल्मों में दिखने वाला यह आइडिया अब चीन के एक युवा टेक एक्सपर्ट सॉन्ग शिंग्यू की वजह से चर्चा में है.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हुबेई प्रांत के एनशी में रहने वाले सॉन्ग सोशल मीडिया पर अमेजिंग आयू के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने खुद एक ऐसा होवरबोर्ड तैयार किया है, जो इंसान को हवा में उठा सकता है. उन्होंने इसका वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वह इस मशीन पर सवार होकर काफी ऊंचाई पर उड़ते नजर आए.

14 साल की उम्र में छोड़ दिया था स्कूल

सॉन्ग का सफर किसी बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू नहीं हुआ था. वह एक ग्रामीण परिवार से आते हैं. उन्होंने मात्र 14 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी और अपने पिता के लकड़ी के काम में हाथ बंटाने लगे. लेकिन उनके मन में मशीनों और उड़ने वाली चीजों को लेकर अलग ही उत्सुकता थी. एक टीवी कार्यक्रम में प्लेन की टेस्टिंग देखने के बाद उनकी दिलचस्पी एविएशन में बढ़ गई. इसके बाद उन्होंने कबाड़ में मिलने वाले सामान से अपना पहला मॉडल प्लेन बनाने की कोशिश शुरू कर दी. धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उनके काम को पसंद करने वाले लोग भी जुड़ने लगे. कुछ एविएशन के शौकीनों ने उनके प्रयोगों के लिए आर्थिक मदद भी दी.

कर्ज लेकर बनाई अपनी लैब

सॉन्ग के लिए अपने सपने को आगे बढ़ाना आसान नहीं था. जून 2022 में उन्होंने कर्ज लेकर एक पुरानी और खाली पड़ी शेड को अपनी लैब में बदल दिया. अब उनके पास ऐसी जगह थी, जहां वह बिना किसी रुकावट के अपने नए प्रयोग कर सकते थे. हालांकि, इसी दौरान उनके साथ धोखाधड़ी भी हुई और वह करीब 24 लाख युआन के कर्ज में डूब गए. भारतीय रुपये में यह रकम काफी बड़ी है. मुश्किल वक्त में टेक्नोलॉजी कंपनी इंस्टा360 ने उनकी मदद की और उनके काम के लिए 18 लाख युआन की फंडिंग दी.

 

 

कभी तेज हवा ने तोड़ा सपना, कभी जान पर बन आई

सॉन्ग के प्रयोगों में कई बार ऐसा हुआ, जब उनकी महीनों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई. मई 2024 में उन्होंने रिमोट से चलने वाला एक प्लेन तैयार करने में 22 दिन लगाए थे. उनका प्लान था कि हीलियम गैस से भरे गुब्बारे की मदद से इसे ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचाया जाए. लेकिन लॉन्च से पहले तेज हवाओं ने उनका कैंप और तैयार किया गया सामान तहस-नहस कर दिया. इस नाकामी के बावजूद उन्होंने काम नहीं छोड़ा.

पैराशूट नहीं खुला तो बाल-बाल बची जान

इसके करीब छह महीने बाद सॉन्ग ने एक और खतरनाक प्रयोग किया. इस बार वह करीब 5,000 मीटर की ऊंचाई पर हेलिकॉप्टर से कूदे. उन्होंने अपने बनाए जेट से चलने वाले उड़ने के गैजेट को पहन रखा था. लेकिन हवा में उनका मेन पैराशूट नहीं खुला. उस समय उनके पास दूसरा पैराशूट ही आखिरी सहारा था. यह भी जमीन से करीब 600 मीटर ऊपर जाकर खुला. इस घटना में किसी तरह उनकी जान बच सकी. इस छलांग से कुछ घंटे पहले सॉन्ग ने अपना आखिरी मैसेज भी रिकॉर्ड किया था. उसमें उन्होंने बताया था कि ऐसे प्रयोग उन्हें जिंदगी का असली एहसास कराते हैं. हालांकि, उन्होंने लोगों को चेतावनी भी दी थी कि बिना तैयारी के उनके जैसे खतरनाक प्रयोग करने की कोशिश न करें.

आसमान में ले गए पूरा ड्राइंग रूम

सॉन्ग के प्रयोग सिर्फ उड़ने वाली मशीनों तक सीमित नहीं रहे. पिछले साल सितंबर में उन्होंने गर्म हवा के गुब्बारे की मदद से पूरा सजा हुआ ड्राइंग रूम आसमान में पहुंचा दिया था. हैरानी की बात यह थी कि हवा में लटके इस कमरे में उन्होंने अंडे फ्राई किए और सैंडविच भी बनाए. इस प्रयोग का मकसद भी कुछ अलग करके दिखाना था.

ग्रीन गोब्लिन के ग्लाइडर से आया होवरबोर्ड का आइडिया

इस बार सॉन्ग के दिमाग में स्पाइडरमैन की कहानी का एक किरदार ग्रीन गोब्लिन था. वह उसी तरह का उड़ने वाला ग्लाइडर बनाना चाहते थे, जिस पर बैठकर यह किरदार हवा में सफर करता है. शुरुआत में उन्होंने छोटे टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल किया, लेकिन टेस्टिंग के दौरान मशीन में आग लग गई. इसके बाद उन्होंने डिजाइन में बदलाव किया और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से नया डिवाइस तैयार किया. कई कोशिशों के बाद उन्होंने ऐसा होवरबोर्ड बनाया, जिसे चार बड़े लोगों का वजन उठाने के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसमें AI की मदद से निगरानी करने वाला सिस्टम भी लगाया गया है. खुद इसे चलाने से पहले सॉन्ग ने लंबे समय तक बैलेंस बनाने की ट्रेनिंग ली.

नदी और पहाड़ों के ऊपर भरी उड़ान

अक्टूबर में चीन की नेशनल डे की छुट्टियों के दौरान सॉन्ग ने हुबेई के एनशी में अपने होवरबोर्ड का बड़ा टेस्ट किया. इस दौरान वह यांग्त्जी नदी के ऊपर से गुजरे. इसके बाद उन्होंने पहाड़ी चोटियों और शहर की सड़कों के ऊपर भी उड़ान भरी. वीडियो में वह जमीन से काफी ऊंचाई पर इस डिवाइस पर सवार दिखाई देते हैं. आखिर में उन्होंने एक घाटी में सुरक्षित लैंडिंग की. इस टेस्ट के बाद उनके बनाए होवरबोर्ड की चर्चा सोशल मीडिया पर होने लगी.

असफलता से डरते नहीं हैं सॉन्ग

सॉन्ग का कहना है कि उन्होंने अपनी शुरुआत लगभग खाली हाथों से की थी. इसलिए अब उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ नहीं है. उनका मानना है कि असफलता के डर से रुकने के बजाय आगे बढ़ते रहना बेहतर है. हालांकि, उनके प्रयोग जितने दिलचस्प हैं, उतने ही खतरनाक भी हैं. फिलहाल उनका यह होवरबोर्ड लोगों के लिए किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन से कम नहीं है. अब देखना होगा कि सॉन्ग अपनी इस खोज को आगे किस स्तर तक ले जाते हैं.

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Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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