)
झोंग जुआनजुआन की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि कंप्यूटर गेम उनके परिवार के लिए हमेशा से खुशी की चीज नहीं रहे. करीब दो दशक पहले उनका बेटा सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता था. उस दौरान उसे गेम खेलने की ऐसी आदत लगी कि पढ़ाई पर असर पड़ने लगा.
बेटे की इस आदत से झोंग काफी परेशान रहती थीं. कई बार वह उसे ढूंढने के लिए स्थानीय इंटरनेट कैफे तक पहुंच जाती थीं. कभी समझाकर वापस लातीं तो कभी गुस्से में उसे वहां से खींचकर घर ले आती थीं. उस समय शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन यही गेम उनके जीवन का अहम हिस्सा बन जाएंगे.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, झोंग की जिंदगी में बड़ा बदलाव साल 2020 में आया. तब उनका बेटा सुोडे नौकरी छोड़ चुका था और घर पर काफी समय कंप्यूटर गेम खेलने में बिताता था. झोंग ने देखा कि बेटा घंटों स्क्रीन के सामने बैठा रहता है. इस बार उन्होंने बेटे को डांटने के बजाय कुछ अलग करने की सोची. उनके मन में सवाल आया कि आखिर इन गेम्स में ऐसा क्या है, जो लोगों को घंटों अपने साथ जोड़े रखता है? बस, इसी सवाल ने उन्हें खुद गेम खेलने के लिए कंप्यूटर के सामने बैठा दिया.
शुरुआत में झोंग के लिए गेम खेलना बिल्कुल आसान नहीं था. उनका बेटा सुोडे भी मां को गेमिंग में दिलचस्पी लेते देखकर हैरान था. लेकिन उसने मां का मजाक उड़ाने के बजाय उन्हें गेम खेलना सिखाना शुरू किया. सुोडे धीरे-धीरे उन्हें गेम के कंट्रोल, मूवमेंट और बाकी चीजें समझाने लगा. झोंग के सामने एक और मुश्किल थी. उनकी नजर पहले जैसी तेज नहीं रही थी और उम्र के साथ रिएक्शन टाइम भी कम हो गया था. बेटे के अनुसार, शुरुआत में उनकी हालत ऐसी थी कि गेम में सीधा चलना भी मुश्किल होता था. वह दीवार से टकराकर घूम जाती थीं और सीढ़ियां चढ़ने में भी परेशान होती थीं.
शुरुआती मुश्किलों के बावजूद झोंग ने गेम छोड़ने का फैसला नहीं किया. उन्होंने लगातार प्रैक्टिस की. धीरे-धीरे उनके हाथ गेम के कंट्रोल के साथ सेट होने लगे और वह पहले से बेहतर खेलने लगीं. यही वह हिस्सा है, जिसने उनकी कहानी को खास बनाया. उनके पास कोई महंगा गेमिंग सेटअप नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने घंटों खेलते हुए अपने स्किल को इतना बेहतर कर लिया कि लोग उन्हें देखने के लिए लाइव आने लगे. झोंग मुख्य रूप से शूटिंग गेम्स खेलती हैं और अब तक गेमिंग में हजारों घंटे बिता चुकी हैं.
साल 2022 में झोंग ने अपने गेमिंग सेशन की लाइवस्ट्रीमिंग शुरू कर दी. शुरुआत में शायद उनके लिए यह सिर्फ एक नया एक्सपीरियंस था, लेकिन इंटरनेट पर लोगों को उनकी कहानी और खेलने का अंदाज पसंद आने लगा. लाइवस्ट्रीम में एक उम्रदराज महिला को तेजी से शूटिंग गेम खेलते देखकर दर्शकों को भी हैरानी होती थी. धीरे-धीरे उनके लाइव सेशन देखने वालों की संख्या बढ़ने लगी. ऑनलाइन दुनिया में वह 'आंटी जुआन' के नाम से पहचानी जाने लगीं. उनकी खासियत सिर्फ उम्र नहीं थी. वह सच में गेम को गंभीरता से खेलती थीं और अपनी गलतियों से सीखते हुए लगातार बेहतर होती गईं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, झोंग अब तक 8 हजार घंटे से ज्यादा समय गेम खेलने में बिता चुकी हैं. वह ज्यादातर शूटिंग वाले गेम्स पसंद करती हैं. सोचिए, जिस महिला ने कभी अपने बेटे को गेमिंग से दूर करने के लिए इंटरनेट कैफे के चक्कर लगाए थे, वही महिला कुछ साल बाद खुद गेमिंग की दुनिया में हजारों घंटे दे चुकी है. उनकी कहानी का यही उलटफेर सोशल मीडिया पर लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है. यह सिर्फ एक बुजुर्ग महिला के गेम खेलने की कहानी नहीं रह गई, बल्कि यह भी दिखाती है कि किसी चीज को समझने के लिए कभी-कभी उसे खुद करके देखना पड़ता है.
झोंग की लोकप्रियता दिसंबर 2024 में एक नए मुकाम पर पहुंची. उन्हें 'काउंटर-स्ट्राइक: ग्लोबल ऑफेंसिव' के एक ऑनलाइन एग्जिबिशन मैच में खेलने के लिए बुलाया गया. यह उनके लिए बड़ी बात थी, क्योंकि अब वह सिर्फ घर पर गेम खेलने वाली महिला नहीं थीं. गेमिंग कम्युनिटी के बाहर भी लोग उन्हें पहचानने लगे थे. एक ऐसी महिला, जिसने जिंदगी का बड़ा हिस्सा काम और परिवार में बिताया और सिर्फ प्राइमरी स्कूल तक पढ़ाई की, अब ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी थी.
झोंग की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद उनका मां-बेटे वाला रिश्ता है. कभी उन्हें लगता था कि उनका बेटा गेम में अपना समय बर्बाद कर रहा है. लेकिन बाद में उन्होंने उसी दुनिया को समझने की कोशिश की. इस कोशिश में उनके बेटे ने भी उनका साथ दिया. उसने मां को गेम सिखाया, उनकी शुरुआती गलतियों पर धैर्य रखा और धीरे-धीरे उन्हें बेहतर खिलाड़ी बनने में मदद की. इसका मतलब है कि जिस गेमिंग को कभी मां-बेटे के बीच परेशानी की वजह माना जाता था, वही आगे चलकर दोनों के बीच एक नया कनेक्शन बन गया.
झोंग जुआनजुआन की कहानी को देखकर सबसे बड़ी बात यही समझ आती है कि नई चीज सीखने के लिए उम्र कोई आखिरी सीमा नहीं है. उनके सामने नजर कमजोर होने और रिएक्शन टाइम धीमा होने जैसी दिक्कतें थीं, लेकिन उन्होंने इन्हें बहाना नहीं बनाया. उन्होंने शुरुआत में गलतियां कीं, दीवारों से टकराईं, गेम में रास्ता ढूंढने में परेशान हुईं, लेकिन खेलना बंद नहीं किया. धीरे-धीरे वही महिला हजारों घंटे की प्रैक्टिस के बाद ऑनलाइन लोगों को गेम खेलते हुए नजर आने लगीं.
झोंग की कहानी में सबसे खास बात यही है कि उन्होंने गेमिंग की दुनिया में कदम स्टार बनने के लिए नहीं रखा था. उनकी शुरुआत तो सिर्फ अपने बेटे को समझने की कोशिश से हुई थी. लेकिन उस कोशिश ने उनकी जिंदगी को ही एक नया मोड़ दे दिया. आज 'आंटी जुआन' के लाइव गेमिंग सेशन हजारों लोगों को अपनी तरफ खींचते हैं और उनकी कहानी उन लोगों के लिए भी एक मिसाल बन गई है, जो मानते हैं कि सीखने और कुछ नया शुरू करने की कोई उम्र नहीं होती. कभी बेटे को गेम खेलने से रोकने वाली मां ने आखिरकार उसी गेम को खुद समझा, सीखा और अपनी पहचान बना ली.