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24 घंटे की शिफ्ट में हांफ गए रोबोट: कूड़ा उठाने से लेकर शेल्फ सजाने तक में हुए फेल; शंघाई के स्टोर का वीडियो वायरल

इंसानों की जगह रोबोट काम करेंगे, यह चर्चा काफी समय से चल रही है. लेकिन चीन में हुआ एक नया प्रयोग बताता है कि मशीनों के लिए अभी यह रास्ता इतना आसान नहीं है. शंघाई की एक दुकान में 6 ह्यूमनॉइड रोबोट को लगातार 24 घंटे काम करने की जिम्मेदारी दी गई. इस दौरान उन्होंने 1,730 काम पूरे किए, लेकिन दो रोबोट अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभा पाए और काम में फेल हो गए.

24 घंटे की शिफ्ट में हांफ गए रोबोट: कूड़ा उठाने से लेकर शेल्फ सजाने तक में हुए फेल; शंघाई के स्टोर का वीडियो वायरल
Image Credit: x-@AGIBOTofficial | 24 घंटे की नौकरी में फेल हुए दो ह्यूमनॉइड रोबोट!

जब से ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने काम करना शुरू किया है, तब से लोगों को लगता है कि ये इंसानों का काम खत्म कर देंगे. चीन की रोबोट बनाने वाली कंपनी एजीबॉट ने इसको लेकर एक अनोखा प्रयोग किया. कंपनी ने शंघाई के शुहुई इलाके में मौजूद एक कन्वीनियंस स्टोर में अपने 6 ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किए. इन्हें पूरे 24 घंटे तक दुकान के अलग-अलग काम संभालने थे.

इस चैलेंज का नाम 'रोबोट्स नेवर क्लॉक आउट' रखा गया. इसका मकसद यह देखना था कि रोबोट सिर्फ कुछ मिनट के डेमो में ही अच्छे लगते हैं या फिर असली दुकान में भी लगातार काम कर सकते हैं. कंपनी ने इस पूरे एक्सपेरिमेंट की लाइवस्ट्रीमिंग भी की, जिससे लोग मशीनों के काम करने का तरीका देख सकें.

24 घंटे में किए 1,730 काम

इस एक्सपेरिमेंट के दौरान सभी 6 रोबोट ने मिलकर कुल 1,730 काम पूरे किए. इनमें ग्राहकों का स्वागत करने से लेकर सामान निकालकर देने, कॉफी बनाने और दुकान की सफाई तक की जिम्मेदारी शामिल थी. कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रोबोट ने 683 बार ग्राहकों का स्वागत किया. इसके अलावा 369 बार सामान निकालकर ग्राहकों तक पहुंचाया और 147 कप कॉफी तैयार की. उन्होंने 126 हॉट फूड ऑर्डर भी पूरे किए. दुकान की शेल्फ की जांच और सामान दोबारा भरने के 277 काम हुए. वहीं, टेबल साफ करने जैसे 128 काम भी रोबोटों ने किए. इसका मतलब पूरे दिन दुकान में आने वाले ग्राहकों और रोजमर्रा के कामों को संभालने की कोशिश मशीनों ने की.

दोपहर से लेकर सुबह तक परखी गई क्षमता

कंपनी ने इस चैलेंज को सिर्फ दिन के समय तक सीमित नहीं रखा था. रोबोटों की क्षमता परखने के लिए अलग-अलग समय को ध्यान में रखा गया. इसमें दोपहर के लंच टाइम की भीड़, शाम को आने वाले ग्राहक, रात की ड्यूटी और सुबह के नाश्ते का समय शामिल था. इसका मकसद यह समझना था कि जब दुकान में ग्राहकों की संख्या बदलती है और काम का दबाव बढ़ता है, तब रोबोट किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं. क्योंकि असली दुकान में हर काम तय समय और एक जैसे माहौल में नहीं होता.

 

 

कूड़ेदान देखकर रास्ता ही भूल गया रोबोट

प्रयोग के दौरान चार रोबोट का प्रदर्शन ठीक रहा, लेकिन सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाला एक रोबोट ऐसी गलती कर बैठा कि उसकी ड्यूटी ही बिगड़ गई. आईटीहोम की रिपोर्ट के अनुसार, सफाई करने वाले इस रोबोट के रास्ते में एक भरा हुआ कूड़ेदान आ गया. उसे उठाने या उसके आसपास से निकलने के बजाय रोबोट अपने तय रास्ते से हट गया. इतना ही नहीं, वह दुकान से बाहर चला गया और फिर अपनी तय जगह पर वापस भी नहीं लौट पाया. यानी जिस मशीन को सफाई और कचरा संभालने का काम दिया गया था, वह एक साधारण सी रुकावट आने पर ही अपना रास्ता भूल गई.

दूसरा रोबोट शेल्फ पर सामान भरने में पिछड़ा

दूसरी मशीन को दुकान की शेल्फ पर नजर रखने और कम हो रहे सामान को दोबारा भरने की जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन वह भी उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाई. कंपनी के अनुसार, इस रोबोट में खुद से पहल करने की कमी दिखाई दी. वह शेल्फ की जांच और सामान भरने के काम में दुकान की रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा सका. दुकान में सामान लगातार बिकता रहता है. ऐसे में शेल्फ पर क्या कम हो रहा है और किस चीज को कब भरना है, इसका ध्यान रखना जरूरी होता है. लेकिन यह काम रोबोट के लिए आसान साबित नहीं हुआ.

सिर्फ समझदारी नहीं, हाथों का कंट्रोल भी जरूरी

इस प्रयोग ने एक बार फिर दिखाया कि रोबोट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर काम इंसान की तरह कर सकता है. मशीन को निर्देश समझने के साथ-साथ अपने आसपास की चीजों के हिसाब से सही कदम भी उठाने होते हैं. दुकान में कूड़ेदान हटाना, रास्ता बदलना या कम हो रहे सामान को पहचानकर भरना ऐसे काम हैं, जिनमें मशीन को कई छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. फिलहाल इन कामों में इंसानी मदद की जरूरत बनी हुई है.

अमेरिका में रोबोट डॉग को भी चाहिए इंसानी मदद

ऐसा नहीं है कि रोबोट को लेकर यह चुनौती सिर्फ चीन में सामने आई है. पिछले महीने अमेरिका के एक स्टार्टअप डाइमेंशनल ने सैन फ्रांसिस्को में अपने रोबोट डॉग को सड़कों पर घुमाने के लिए लोगों की भर्ती की थी. कंपनी के संस्थापक स्टैश पोमिचर के अनुसार, इस प्रयोग का मकसद रोबोट डॉग को शहर की सड़कों पर अपने आप चलने के लिए बेहतर बनाना था. उन्होंने माना कि AI एजेंट अभी हार्डवेयर को कंट्रोल करने में बहुत अच्छे नहीं हैं. कंपनी ने चीन, जर्मनी और अमेरिका की कंपनियों से 100 रोबोट डॉग और 50 ह्यूमनॉइड रोबोट खरीदे थे. इनमें सैन फ्रांसिस्को की सड़कों पर दिखे करीब 2,000 डॉलर कीमत वाले रोबोट डॉग चीन की कंपनी यूनिट्री के थे.

इंसानों की नौकरी लेना अभी आसान नहीं

शंघाई की दुकान में हुआ यह प्रयोग बताता है कि रोबोट कई काम तेजी से कर सकते हैं, लेकिन हर परिस्थिति को समझकर खुद फैसला लेना अभी भी उनके लिए मुश्किल है. 24 घंटे में 1,730 काम पूरे करना उनकी क्षमता जरूर दिखाता है, लेकिन दो मशीनों की नाकामी उनकी सीमाएं भी सामने लाती है. फिलहाल दुकान में ग्राहकों को संभालने, सफाई करने और सामान व्यवस्थित रखने जैसे कामों में इंसानी निगरानी की जरूरत बनी हुई है. ऐसे में रोबोट भले ही काम में हाथ बंटाने लगे हों, लेकिन इंसानों की जगह पूरी तरह लेने के लिए उन्हें अभी काफी कुछ सीखना बाकी है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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