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आमतौर पर लोग अपने घरों में पालतू जानवर रखने के शौकीन होते हैं. कोई कुत्ता पालता है तो किसी को बिल्ली पसंद होती है. बहुत से लोग घरों में खरगोश, तोता और कई अलग तरह के जानवर पालते हैं. ऐसे में कुछ लोग घर की बालकनी में पौधे लगाकर अपना समय बिताते हैं. लेकिन चीन के युवाओं के बीच इन दिनों एक ऐसा शौक चर्चा में है, जिसके बारे में सुनकर पहली बार में शायद आप भी हंस पड़ें.
यहां कुछ नौजवान लड़के साधारण ईंट पर काई उगा रहे हैं. वे उसे अपने घर में रखते हैं, समय-समय पर पानी छिड़कते हैं और धीरे-धीरे उसकी सतह पर फैलती हरियाली को देखते हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई लोग इसे सिर्फ पौधा उगाने का शौक नहीं, बल्कि एक साथी की तरह देख रहे हैं. युवाओं के अनुसार, इससे बिना किसी दबाव के एक अलग तरह का सुकून मिलता है. युवाओं के लिए यह तनाव दूर करने का तरीका बन गया है.
इस शौक का तरीका बेहद आसान है. इसके लिए किसी महंगे गमले, खाद या खास बीज की जरूरत नहीं पड़ती. एक साधारण ईंट लेनी होती है और दिन में कुछ बार उस पर पानी का छिड़काव करना होता है. हवा में मौजूद काई के छोटे-छोटे बीजाणु धीरे-धीरे ईंट की सतह पर जमने लगते हैं. नमी मिलने पर वहां काई उगने लगती है. कुछ समय बाद ईंट पर हरी परत दिखाई देने लगती है. इसकी एक और खासियत है. अगर कुछ दिनों तक पानी नहीं डाला जाए तो काई सूखकर खराब हो सकती है. इसके बाद दोबारा पानी मिलने पर वह फिर हरी दिखाई देने लगती है. इसका मतलब है कि पालतू जानवरों की तरह हर वक्त देखभाल की जरूरत भी नहीं पड़ती.
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह ट्रेंड तेजी से फेमस हो रहा है. वीबो पर इससे जुड़े हैशटैग को 50 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. लोग अपनी ईंटों की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं. किसी की ईंट पर थोड़ी काई उगी है तो किसी ने उसे पूरी तरह हरे रंग की चादर से ढक दिया है. इसके साथ ही लोग हीलिंग और स्ट्रेस रिलीफ जैसे हैशटैग भी इस्तेमाल कर रहे हैं. मतलब, उनके लिए यह सिर्फ एक अजीब शौक नहीं, बल्कि डेली रूटीन के तनाव को कम करने का तरीका बन चुका है.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के एक सोशल मीडिया यूजर ने इस शौक के बारे में बताया कि इसमें किसी तरह की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव नहीं है. न कोई टारगेट पूरा करना है और न ही यह देखना है कि दूसरे की ईंट पर कितनी तेजी से काई उग रही है. एक दूसरे यूजर ने इसे 'जीरो एनर्जी इमोशनल कंपनी' जैसा अनुभव बताया. उनका कहना था कि इसमें एक तरह का भरोसा और सुकून मिलता है, जो कई बार इंसानी रिश्तों में महसूस नहीं होता. शायद यही वजह है कि युवाओं को यह छोटा सा काम पसंद आ रहा है. ईंट पर काई कितनी बढ़ी, यह देखने के अलावा उन्हें कुछ साबित नहीं करना पड़ता.
इस ट्रेंड को चीन के युवाओं की बदलती सोच से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वहां नौकरी पाने की मुश्किल, काम का दबाव और भविष्य को लेकर चिंता युवाओं के लिए बड़ी परेशानियां बनी हुई हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन में 16 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी की दर भी चिंता का विषय रही है. वहीं, देश में जन्म दर गिरने के बाद शादी और परिवार को लेकर भी युवाओं की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है. ऐसे माहौल में कुछ युवा ट्रेडिशन से अलग अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं. वे शादी, परिवार और करियर की भागदौड़ के साथ आने वाले दबाव से दूर रहकर छोटी-छोटी चीजों में खुशी तलाश रहे हैं.
चीन में कुछ समय से 'लेटिंग फ्लैट' नाम की सोच भी चर्चा में रही है. इसका मतलब है कि जिंदगी में लगातार आगे निकलने और हर वक्त मुकाबले में बने रहने की दौड़ से थोड़ा पीछे हट जाना. इस सोच को मानने वाले लोग कम दबाव वाली जिंदगी को प्राथमिकता देते हैं. ईंट पर काई उगाने का शौक भी इसी नजरिए से जुड़ा दिखाई देता है. इसमें न कोई बड़ा खर्च है, न किसी नतीजे को लेकर चिंता और न ही दूसरों से आगे निकलने की होड़.
हालांकि, इस शौक को पूरी तरह खतरे से मुक्त नहीं माना जा सकता. लगातार नमी रहने से काई के साथ फफूंद भी पनप सकती है. इससे कुछ लोगों को एलर्जी, आंखों में खुजली और नाक बहने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. बीजिंग की कैपिटल नॉर्मल यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड मॉस प्रोफेसर श्यूडोंग ली ने भी इसे संभालते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है. उन्होंने ईंट को बंद या सुरक्षित जगह पर रखने और उसे छूते समय डिस्पोजेबल ग्लव्स व मास्क इस्तेमाल करने की बात कही है, जिससे बीजाणुओं के सीधे संपर्क से बचा जा सके.