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किसी घर में किसी बुजुर्ग की तबीयत लंबे समय से खराब हो और डॉक्टर भी इलाज की गुंजाइश खत्म होने की बात कह दें, तो परिवार के लिए वह वक्त कितना मुश्किल होता है, इसका अंदाजा लगाना भी आसान नहीं है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हेबेई प्रांत में भी एक परिवार कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहा था.
महिला कई साल से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी. परिवार के मुताबिक, उसे लंबे समय से सेरेब्रल थ्रोम्बोसिस की समस्या थी और बाद में वह गंभीर कैंसर की चपेट में भी आ गई थी. डॉक्टरों ने कथित तौर पर परिवार को बताया था कि अब कैंसर का इलाज संभव नहीं है. इसके बाद परिवार उसे घर ले आया और आखिरी दिनों में उसकी देखभाल करने लगा. फिर एक दिन परिवार को लगा कि महिला की मौत हो गई है. इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार को हिला दिया.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 8 सितंबर की रात परिवार के लोगों को महिला में जीवन के कोई साफ संकेत नजर नहीं आए. उसकी हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी, इसलिए परिवार वालों ने मान लिया कि उसकी मौत हो चुकी है. बाहर रहने वाले कुछ रिश्तेदारों के लौटने का इंतजार भी किया जा रहा था, जिससे वे आखिरी बार उसे देख सकें और अंतिम विदाई दे सकें. इसी इंतजार के दौरान महिला के शरीर को एक ऐसे ताबूत में रखा गया, जिसमें उसे ठंडा रखने के लिए रेफ्रिजरेशन की सुविधा थी. परिवार को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि अगले दिन यही ताबूत उनके लिए सबसे बड़ा डर और हैरानी का कारण बनने वाला है.
अगली शाम परिवार के लोग अपने काम में लगे थे. तभी महिला की बहू को ताबूत के अंदर से हल्की सी आवाज सुनाई दी. रिपोर्टों में इस आवाज को 'हम्मिंग' या धीमी कराह जैसी आवाज बताया गया है. पहले तो परिवार को यकीन ही नहीं हुआ कि आवाज ताबूत के अंदर से आ रही है. लेकिन जब आवाज दोबारा सुनाई दी तो उन्होंने तुरंत ताबूत खोला. ताबूत खुलते ही घरवालों ने जो देखा, उससे उनके होश उड़ गए. महिला में सांस के संकेत मौजूद थे. मतलब जिसे परिवार एक दिन पहले मृत समझ चुका था, उसमें अभी भी जीवन के संकेत दिखाई दे रहे थे.
महिला को ताबूत से बाहर निकाला गया. परिवार के मुताबिक, बाद में उसमें कुछ चेतना भी दिखाई दी. वह अपनी आंखें खोल पा रही थी, लेकिन उसकी हालत बेहद कमजोर थी. रिपोर्टों के अनुसार, वह ठीक से खाना या पानी भी नहीं ले पा रही थी. ताबूत से बाहर आने के बाद भी उसकी हालत सामान्य नहीं हुई थी. वह अभी भी बेहद गंभीर स्थिति में थी. 11 सितंबर को जब परिवार के दूसरे लोग उसके पास पहुंचे तो भी वह बेहद कमजोर थी. इसके बाद उसी रात उसकी मौत हो गई. 13 सितंबर को परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया.
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर महिला में बाद में सांस और चेतना के संकेत मिले, तो क्या वह पहले सच में मर चुकी थी? स्थानीय अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया कि महिला को जिस ताबूत में रखा गया था, वह डीप-फ्रीजिंग मोड में नहीं था. उसे सिर्फ रेफ्रिजरेशन मोड पर रखा गया था, जिससे शरीर को ठंडा रखा जा सके और बाहर से आने वाले रिश्तेदारों के पहुंचने तक अंतिम विदाई का इंतजार किया जा सके. एक स्थानीय अधिकारी ने इस मामले को 'apparent death' जैसी स्थिति से जोड़कर बताया. इसमें किसी व्यक्ति के शरीर के जरूरी संकेत इतने कमजोर हो सकते हैं कि वह बाहर से मृत जैसा दिखाई दे.
ऐसी स्थिति में सांस बहुत धीमी हो सकती है और दिल की धड़कन भी इतनी कमजोर हो सकती है कि सामान्य तरीके से उसे महसूस करना मुश्किल हो जाए. व्यक्ति गहरी बेहोशी जैसी स्थिति में भी जा सकता है. यही वजह है कि किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि सिर्फ इस आधार पर नहीं की जाती कि वह सांस लेता हुआ दिखाई नहीं दे रहा या उसकी नब्ज महसूस नहीं हो रही. मेडिकल प्रोफेशनल्स मौत की पुष्टि के लिए तय मानकों और जांच का इस्तेमाल करते हैं. इस मामले में भी स्थानीय रिपोर्टों में इसी तरह की संभावना जताई गई है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि महिला के साथ मेडिकल तौर पर वास्तव में क्या हुआ था. 'Apparent death' को इस घटना की संभावित वजह के तौर पर बताया गया है.
इस अजीब घटना की जानकारी परिवार के ही एक सदस्य ने चीन के सोशल मीडिया पर शेयर की. पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने घटना पर सवाल भी उठाए. कुछ यूजर्स को यकीन नहीं हुआ कि किसी महिला को मृत समझकर ताबूत में रखने के बाद वह दोबारा सांस कैसे लेने लगी. परिवार के सदस्य ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कोई अपने ही परिवार के सदस्य की जिंदगी और मौत को लेकर ऐसी कहानी क्यों बनाएगा. स्थानीय इलाके के कुछ लोगों ने भी घटना के बारे में सुनने की बात कही. चीनी मीडिया की रिपोर्टों में गांव के लोगों और एक स्थानीय अधिकारी से घटना की पुष्टि किए जाने की बात कही गई हैं.