सोशल मीडिया पर चीन की स्मार्ट टेक्नोलॉजी से जुड़े कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस वीडियो में आप स्मार्ट डस्टबिन को देख सकते हैं. यह सिर्फ आम डस्टबिन की तरह कचरा जमा करने का काम नहीं करता, बल्कि यह डस्टबिन लोगों से बातें करता है और उनकी बातें सुनता है.
इसके साथ यूजर आवाज के जरिए बातचीत या कमांड कर सकता है. मतलब, अगर आपको डस्टबिन का ढक्कन खोलना है तो सिस्टम को वॉयस कमांड दी जा सकती है. आवाज पहचानने के बाद स्मार्ट सिस्टम उस निर्देश के मुताबिक ढक्कन खोल सकता है. इसका मतलब है कि जहां आम डस्टबिन के सामने जाकर हाथ से ढक्कन उठाना पड़ता है, वहीं स्मार्ट सिस्टम में मशीन आपकी आवाज पर प्रतिक्रिया दे सकती है.
बाहर से देखने पर स्मार्ट डस्टबिन भले ही एक सामान्य कूड़ेदान जैसा दिखाई दे, लेकिन इसके अंदर कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स काम करते हैं. ऐसे सिस्टम में माइक्रोफोन, सेंसर, कंट्रोल यूनिट, मोटर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा सकता है. माइक्रोफोन आसपास मौजूद आवाज को पकड़ता है. सिस्टम उस आवाज में दिए गए कमांड को समझने की कोशिश करता है. अगर कमांड ढक्कन खोलने की है तो कंट्रोल सिस्टम मोटर को एक्टिव कर सकता है. मोटर ढक्कन को ऊपर उठाती है और कचरा डालने के बाद ढक्कन वापस बंद हो सकता है. मतलब, डस्टबिन अपने आप इंसानों की तरह 'सोच' नहीं रहा. उसके पीछे कई टेक्नोलॉजी मिलकर काम करती हैं.
यही बात इस टेक्नोलॉजी को सोशल मीडिया पर ज्यादा दिलचस्प बना रही है. कुछ स्मार्ट डस्टबिन या स्मार्ट वेस्ट सिस्टम वॉयस इंटरैक्शन के लिए तैयार किए जा सकते हैं. ऐसे सिस्टम यूजर की आवाज सुनकर तय कमांड पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं. हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. हर स्मार्ट डस्टबिन में बातचीत करने या सवालों का जवाब देने की सुविधा नहीं होती. अलग-अलग मॉडल में अलग फीचर्स हो सकते हैं. किसी मॉडल में सिर्फ सेंसर से ढक्कन खुल सकता है, किसी में वॉयस कमांड हो सकती है और किसी ज्यादा एडवांस सिस्टम में AI आधारित इंटरैक्शन भी जोड़ा जा सकता है.
स्मार्ट डस्टबिन का एक फायदा यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए बार-बार हाथ से छूने की जरूरत कम हो सकती है. आवाज या सेंसर के जरिए ढक्कन खुलने पर यूजर सीधे कचरा अंदर डाल सकता है. इसी तरह कई ऑटोमैटिक डस्टबिन में मोशन सेंसर का इस्तेमाल होता है. जैसे ही कोई व्यक्ति डस्टबिन के पास हाथ लेकर जाता है, सेंसर उस हलचल को पहचानकर ढक्कन खोल देता है. AI और वॉयस कमांड इसमें एक और लेयर जोड़ देते हैं. मतलब, मशीन सिर्फ किसी की मौजूदगी महसूस करने के बजाय दिए गए निर्देश को समझने की कोशिश कर सकती है.
स्मार्ट डस्टबिन की कहानी सिर्फ आवाज सुनने तक सीमित नहीं है. कुछ एडवांस वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरे को अलग-अलग कैटेगरी में बांटने की दिशा में भी काम कर सकते हैं. आमतौर पर कचरे को रिसाइक्लेबल, फूड वेस्ट और दूसरे कचरे जैसी कैटेगरी में अलग करना जरूरी होता है. अगर किसी सिस्टम में अलग-अलग कम्पार्टमेंट दिए गए हैं तो सेंसर या सॉफ्टवेयर सही हिस्से का चुनाव करने में मदद कर सकता है. लेकिन यह सुविधा हर स्मार्ट डस्टबिन में नहीं होती. किसी खास प्रोडक्ट के फीचर्स उसके डिजाइन और इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी पर निर्भर करते हैं.
चीन पिछले कुछ सालों में स्मार्ट सिटी और ऑटोमेशन से जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काफी जोर देता रहा है. शहरों में स्मार्ट कैमरा, ऑटोमेटेड मशीन, रोबोट, डिजिटल पेमेंट और AI आधारित कई तरह की सेवाएं देखने को मिलती हैं. इसी सोच का एक हिस्सा कचरा प्रबंधन भी है. शहरों में पैदा होने वाले कचरे को इकट्ठा करना, अलग करना और सही जगह पहुंचाना बड़ी चुनौती है. ऐसे में टेक्नोलॉजी की मदद से इस पूरी प्रक्रिया को ज्यादा आसान और ऑटोमेटेड बनाने की कोशिश हो रही है. स्मार्ट डस्टबिन इसी बड़ी तस्वीर का एक छोटा हिस्सा माना जा सकता है.
इस टेक्नोलॉजी को देखकर भारत में रहने वाले लोगों के मन में स्वाभाविक तौर पर एक सवाल भी उठ सकता है. देश के कई शहरों और पब्लिक प्लेसेस पर आज भी पर्याप्त डस्टबिन और कचरा उठाने की व्यवस्था एक चुनौती बनी हुई है. ऐसे में AI वाला डस्टबिन सुनने में काफी एडवांस लगता है. लेकिन किसी भी शहर के लिए सिर्फ स्मार्ट डस्टबिन लगा देना समस्या का पूरा समाधान नहीं है. जरूरी यह भी है कि लोग कचरा सही जगह डालें, कचरे को अलग-अलग किया जाए और नगर निकाय उसे समय पर उठाकर सही तरीके से प्रोसेस करें.
इस तरह की टेक्नोलॉजी की सबसे दिलचस्प बात यही है कि AI अब सिर्फ मोबाइल फोन, चैटबॉट या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहना चाहता. अब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली साधारण चीजों को भी सेंसर, सॉफ्टवेयर और AI से जोड़ने की कोशिश हो रही है. कभी रोबोट इंसानों की तरह चलते नजर आते हैं, कभी कार खुद पार्क होती है और अब डस्टबिन भी आवाज सुनने लगा है. आने वाले समय में स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतें और तेज इंटरनेट नहीं होगा. शहर की छोटी से छोटी चीजें भी टेक्नोलॉजी से जुड़ सकती हैं.
आज स्मार्ट डस्टबिन लोगों को हैरान कर रहा है, लेकिन असली सवाल यह है कि भविष्य में यह टेक्नोलॉजी कितनी आगे जाएगी. क्या डस्टबिन सिर्फ ढक्कन खोलने तक सीमित रहेगा या वह कचरे की पहचान करके खुद सही कम्पार्टमेंट चुनेगा? फिलहाल अलग-अलग स्मार्ट वेस्ट सिस्टम में अलग क्षमताएं देखने को मिलती हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हर वीडियो को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर AI डस्टबिन इंसानों से पूरी बातचीत कर सकता है. फिर भी इतना जरूर है कि एक ऐसी चीज, जिसे हम अब तक सिर्फ कूड़ा फेंकने के लिए जानते थे, उसमें AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल यह दिखाता है कि आने वाले समय में हमारी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी बदल सकती है. हो सकता है, कल तक जहां डस्टबिन के पास जाकर सिर्फ कचरा फेंकते थे, वहीं आने वाले समय में उससे बात भी करते नजर आएं.