जहां थार-फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों के भी फूलते हैं हाथ-पांव, वहां 'ऑटो रिक्शा' लेकर पहुंच गए ब्रिटिश टूरिस्ट; वीडियो देख बोले लोग- 'ये तो सुपरस्टार हैं'
हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली की ऊंची, पथरीली और घुमावदार सड़कों पर सफर अपने आप में एक चुनौती है. यहां आमतौर पर बाइक, SUV और मजबूत गाड़ियों में घूमने वाले पर्यटक नजर आते हैं. लेकिन दो ब्रिटिश पर्यटकों ने इसी पहाड़ी रास्ते पर ऑटो रिक्शा दौड़ाकर सबका ध्यान खींच लिया. Tabo से Kaza जाते भारतीय ट्रैवलर विशाल की उनसे मुलाकात हुई तो वह भी हैरान रह गए. अब इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
स्पीति वैली का नाम सुनते ही आंखों के सामने ऊंचे पहाड़, सूखे रेगिस्तान जैसे इलाके और बेहद संकरी सड़कें घूमने लगती हैं. यहां कई जगह रास्ता इतना पथरीला और मुश्किल है कि बड़ी गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर भी पूरी सावधानी से आगे बढ़ता है.
ऐसे रास्ते पर अगर कोई ऑटो रिक्शा दिखाई दे तो नजरें टिकना स्वाभाविक है. भारतीय सोलो ट्रैवलर विशाल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. वह Tabo से Kaza की तरफ जा रहे थे, तभी उनकी नजर दो विदेशी यात्रियों पर पड़ी. दोनों एक ऑटो रिक्शा में स्पीति की सड़कों पर सफर कर रहे थे. इतने मुश्किल रास्ते पर ऑटो देख विशाल खुद को रोक नहीं पाए और सवाल पूछते हुए उनके पास चले गए. इस पूरे पल को उन्होंने वीडियो में कैद किया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट कर दिया. अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
इंग्लैंड से आए, लेकिन सफर देसी ऑटो में
पहली नजर में शायद विशाल को लगा हो कि यह कोई स्थानीय ऑटो होगा. लेकिन जब उन्होंने करीब जाकर बात की तो कहानी कुछ और ही निकली. ऑटो चलाने वाले दोनों यात्री इंग्लैंड से आए थे और भारत में एक अलग तरह की रोड ट्रिप पर निकले थे. विशाल ने इस मुलाकात का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया. वीडियो में वह विदेशी यात्रियों को देखकर अपनी हैरानी जाहिर करते नजर आ रहे हैं. उनके लिए यह नजारा इसलिए भी खास था क्योंकि स्पीति जैसे इलाके में आमतौर पर पर्यटक बाइक या SUV का सहारा लेते हैं.
मनाली के रास्ते पहुंचे स्पीति
इन पर्यटकों का सफर सिर्फ स्पीति तक पहुंचने का नहीं था. जानकारी के मुताबिक, वे मनाली की तरफ से ऊंचे पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए स्पीति पहुंचे थे. इसके बाद वे घाटी के मुश्किल रास्तों पर अपने ऑटो से आगे बढ़ रहे थे. विशाल से बातचीत के दौरान दोनों ने बताया कि उनका आगे का सफर राजस्थान के जैसलमेर तक होने वाला है. मतलब पहाड़ों की ठंडी और ऊंचाई वाली सड़कों से निकलकर उनका सफर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके तक पहुंचने वाला था. यह सुनकर इस यात्रा की कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है. एक तरफ बर्फीले और ऊंचे पहाड़, दूसरी तरफ जैसलमेर की गर्म रेत. दोनों जगहों के बीच हजारों किलोमीटर का फासला है, लेकिन इन पर्यटकों ने इसे एक ही एडवेंचर का हिस्सा बना दिया.
'लोग सफर के लिए कुछ भी कर सकते हैं'
विशाल ने वीडियो में इस मुलाकात को लेकर अपनी खुशी और हैरानी दोनों जाहिर की. उनका कहना था कि जो लोग सच में ट्रैवल पसंद करते हैं, वे किसी भी चीज को एडवेंचर में बदल सकते हैं. ऑटो रिक्शा आम तौर पर शहरों और कस्बों में छोटी दूरी तय करने के लिए जाना जाता है. लेकिन इन दोनों यात्रियों ने उसी तीन पहियों वाली गाड़ी को हिमालय की ऊंचाई तक पहुंचा दिया. सोशल मीडिया पर भी लोगों को यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई. किसी ने उन्हें 'सुपरस्टार' कहा तो किसी ने इस सफर को 'नेक्स्ट लेवल' बताया. कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक ऑटो में घूमने की कहानी नहीं, बल्कि ट्रैवल को अपने तरीके से जीने की मिसाल बन गई.
यूपी के सुमित ने भी ई-रिक्शा से चढ़ा दिया स्पीति
दिलचस्प बात यह है कि स्पीति की सड़कों पर तीन पहियों वाली गाड़ी का यह अकेला हैरान करने वाला किस्सा नहीं है. कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले सुमित कुमार प्रजापती भी अपनी ई-रिक्शा लेकर स्पीति वैली पहुंच गए थे. उनकी कहानी भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी. सुमित के दोस्तों ने कार से स्पीति वैली जाने की योजना बनाई थी. जब उनसे पूछा गया कि उनके पास कार नहीं है तो वह कैसे जाएंगे, तो उन्होंने अपनी ई-रिक्शा को ही सफर का साथी बना लिया. उन्होंने पहले ई-रिक्शा को ट्रक से मनाली पहुंचाया और फिर वहां से खुद इसे स्पीति वैली की तरफ चलाया.
12,500 फीट की ऊंचाई पर पहुंची ई-रिक्शा
सुमित ने अपने इस सफर को इंस्टाग्राम पर कई वीडियो में रिकॉर्ड किया. उनकी यात्रा करीब 27 वीडियो में सामने आई. रास्ते में ई-रिक्शा को चार्ज करने की चुनौती भी थी, जिसे उन्होंने रास्ते में रुककर और जरूरत के लिए जनरेटर साथ रखकर संभाला. उनकी ई-रिक्शा करीब 12,500 फीट की ऊंचाई वाले इलाके में भी पहुंची. 26 अगस्त को उनके सोशल मीडिया अपडेट के मुताबिक, वह कुंजुम दर्रा तक पहुंचे थे. हालांकि, उनके सफर को लेकर किया गया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' का दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है. मतलब एक तरफ इंग्लैंड के दो पर्यटक पेट्रोल वाले ऑटो से स्पीति घूम रहे हैं और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश का एक ई-रिक्शा ड्राइवर अपने इलेक्ट्रिक तीन पहिए को पहाड़ों तक ले गया. दोनों कहानियों में गाड़ी अलग है, लेकिन जुनून एक जैसा दिखता है.
दक्षिण भारत से भी स्पीति तक पहुंचे लोग
स्पीति का रास्ता सिर्फ उत्तर भारत या विदेश से आने वाले एडवेंचर लवर्स को ही नहीं खींचता. दक्षिण भारत से भी लोग यहां लंबे रोड ट्रिप करके पहुंचते रहे हैं. बेंगलुरु से एक परिवार ने फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी गाड़ियों के साथ स्पीति और आगे चांगथंग तक का लंबा रोड ट्रिप किया था. उनके सफर की पूरी यात्रा और तस्वीरें टीम-बीएचपी पर दर्ज हैं. इसका मतलब स्पीति अब सिर्फ किसी एक इलाके के यात्रियों की मंजिल नहीं रह गई है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने-अपने तरीके से यहां पहुंच रहे हैं. किसी के पास SUV है, कोई बाइक लेकर आता है और कोई ऐसी गाड़ी चुन लेता है, जिसे देखकर बाकी लोग भी रुककर वीडियो बनाने लगते हैं.
ऑटो की यह सवारी क्यों बन गई चर्चा?
दरअसल, इस पूरी कहानी में सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं है कि दो विदेशी ऑटो चला रहे थे. असली बात यह है कि उन्होंने ऐसी जगह के लिए वही गाड़ी चुनी, जिसे ज्यादातर लोग पहाड़ों के लिए पहली पसंद नहीं मानते. स्पीति की ऊंचाई, मौसम और सड़कें किसी भी गाड़ी और ड्राइवर की परीक्षा ले सकती हैं. ऐसे में ऑटो से यहां सफर करना अपने आप में अलग नजारा है. यही वजह है कि विशाल ने भी इस मुलाकात को कैमरे में कैद किया और वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंच गया.
मंजिल से ज्यादा यादगार बन गया सफर
दो ब्रिटिश पर्यटकों का स्पीति में ऑटो लेकर घूमना भले ही कुछ लोगों को अजीब लगे, लेकिन ट्रैवल की खूबसूरती भी शायद यही है. हर कोई पहाड़ों को एक ही तरीके से देखने नहीं निकलता. किसी के लिए महंगी SUV एडवेंचर का जरिया है, किसी के लिए बाइक और किसी के लिए रोजमर्रा की ऑटो या ई-रिक्शा. स्पीति की पहाड़ियों में मिले इन यात्रियों ने कम से कम इतना तो दिखा दिया कि सफर की कहानी सिर्फ मंजिल से नहीं बनती. कभी-कभी रास्ते में मिलने वाला एक छोटा सा ऑटो ही पूरी यात्रा की सबसे बड़ी कहानी बन जाता है.