पहले पैर छुए, फिर गले लगाया... 78 साल की भारतीय महिला का पलक झपकते ही बदल दिया सोने का हार; नकली हार थमाकर फरार
कनाडा के ब्रैम्पटन में शाम की सैर पर निकली 78 साल की भारतीय मूल की महिला के साथ बेहद शातिर तरीके से गहनों की चोरी हुई. एक अनजान महिला पहले उनके पैर छूकर ऐसे मिली, जैसे कोई जान-पहचान की हो, फिर उन्हें गले लगाया. इसी कुछ सेकंड के दौरान असली सोने का हार बदलकर नकली गहना पहना दिया गया और चूड़ियां भी उतार ली गईं. चोरी हुए गहनों की कीमत करीब 20 हजार कनाडाई डॉलर बताई गई है.
शाम की सैर उनके रोज के रूटीन का हिस्सा थी. ब्रैम्पटन में रहने वाली 78 साल की भारतीय मूल की महिला भी हर रोज की तरह उस दिन भी घर से बाहर निकली थीं. उन्हें क्या पता था कि कुछ ही देर में उनके साथ ऐसा वाकया होने वाला है, जिसके बाद उन्होंने घर से बाहर अकेले निकलना ही छोड़ दिया.
परिवार के मुताबिक, महिला अंग्रेजी नहीं बोलती हैं. ऐसे में जब एक अनजान महिला उनके पास आई तो उन्हें लगा कि शायद वह आसपास रहने वाली कोई परिचित है. सामने वाली महिला ने भी ऐसा व्यवहार किया कि बुजुर्ग को उस पर शक करने का मौका ही नहीं मिला.
पहले पैर छुए, फिर गले लगाया
आरोप है कि अनजान महिला अचानक बुजुर्ग के सामने झुकी और उनके पैर छुए. इसके बाद उसने उन्हें गले लगा लिया. बुजुर्ग महिला उस समय यह समझने की कोशिश कर रही थीं कि आखिर सामने वाली कौन है. यही कुछ सेकंड इस पूरी वारदात के लिए काफी साबित हुए. महिला ने कथित तौर पर बुजुर्ग के गले से उनका असली सोने का हार उतार लिया और उसकी जगह नकली गहना पहना दिया. इसके बाद उनकी सोने की चूड़ियां भी ले लीं. पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि बुजुर्ग महिला को तुरंत कुछ समझ ही नहीं आया.
SUV में बैठकर भाग निकले आरोपी
गहने लेने के बाद आरोपी महिला वहां से निकल गई. CTV News की रिपोर्ट के अनुसार, वह एक SUV में बैठकर फरार हुई. बुजुर्ग महिला को उस वक्त तक यह पता नहीं था कि उनके साथ क्या हो चुका है. घर पहुंचने के बाद उन्हें चोरी का अहसास हुआ. परिवार के लिए यह सिर्फ महंगे गहनों की चोरी नहीं थी, बल्कि उन जेवरों से जुड़ी कई साल पुरानी यादें भी थीं.
बेटे ने बताया- मां कांप रही थीं
बुजुर्ग महिला के बेटे राघवेंद्र कुमार ने बताया कि जब उनकी मां घर लौटीं तो वह बुरी तरह कांप रही थीं. घटना के सदमे का असर इतना ज्यादा था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं. राघवेंद्र के मुताबिक, उनकी मां करीब 30 मिनट तक ठीक से बोल नहीं सकीं. ऐसे में उनकी पहली चिंता चोरी हुए गहने नहीं, बल्कि मां की तबीयत थी. उन्होंने बताया कि उस समय यह सोचकर भी डर लग रहा था कि उनकी मां के साथ कहीं कोई और अनहोनी तो नहीं हुई.
गहनों की कीमत से ज्यादा जुड़ी थीं यादें
चोरी हुए गहनों का वजन करीब 110 ग्राम बताया गया है. परिवार के मुताबिक, इनकी कच्चे सोने की कीमत करीब 20 हजार कनाडाई डॉलर यानी भारतीय करेंसी में लाखों रुपये बैठती है. लेकिन इन जेवरों की असली कीमत परिवार के लिए पैसों से कहीं ज्यादा थी. राघवेंद्र ने बताया कि उनके पिता ने 1971 में शादी के समय उनकी मां को ये गहने दिए थे. उनके पिता खुद गोल्डस्मिथ थे और उन्होंने इनमें से कुछ गहने अपने हाथों से बनाए थे. इसका मतलब जो चीज चोरों के लिए सिर्फ सोना थी, वह इस परिवार के लिए करीब पांच दशक पुरानी यादों का हिस्सा थी.
घटना के बाद सैर पर जाना बंद
इस घटना ने बुजुर्ग महिला के मन पर भी गहरा असर डाला. जिस शाम की सैर का वह इंतजार किया करती थीं, अब उसी रास्ते पर जाने से डर लगने लगा. परिवार के मुताबिक, घटना के बाद उन्होंने बाहर अकेले टहलना बंद कर दिया. एक अनजान महिला के कुछ सेकंड के व्यवहार ने उनके रोज के रूटीन और सुरक्षा के एहसास को पूरी तरह बदल दिया.
पुलिस को ऐसे मामलों का शक
CTV News की रिपोर्ट के अनुसार, यह चोरी 28 जुलाई को हुई थी, लेकिन परिवार ने बाद में इस मामले के बारे में जानकारी साझा की. इसकी वजह एक ऐसी ही दूसरी घटना सामने आना बताई गई, जिसकी CCTV फुटेज पुलिस ने जारी की थी. टोरंटो की पुलिस के मुताबिक, दोनों घटनाओं में तरीका काफी मिलता-जुलता है. हालांकि, पुलिस ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि दोनों वारदातों के पीछे एक ही लोग हैं. जांच जारी है और पुलिस आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है.
बुजुर्गों को निशाना बनाने का तरीका
इस घटना में सबसे चौंकाने वाली बात चोरी का तरीका है. आरोपी ने सीधे गहने छीनने के बजाय पहले भरोसा जीतने जैसा व्यवहार किया. पैर छूना और गले लगाना बुजुर्ग महिला को इतना असामान्य नहीं लगा कि वह तुरंत पीछे हटतीं. इसी दौरान कथित तौर पर गहनों की अदला-बदली कर दी गई. ऐसे मामलों में कुछ सेकंड का ध्यान भटकना ही काफी होता है. खासकर बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाकर की जाने वाली ऐसी वारदातों में आरोपी अक्सर पहले बातचीत या किसी बहाने से नजदीक आने की कोशिश करते हैं.
परिवार के लिए यह सिर्फ चोरी नहीं
इस घटना ने राघवेंद्र और उनके परिवार को दो स्तर पर चोट पहुंचाई है. एक तरफ मां के गहने चले गए, दूसरी तरफ वह भरोसा भी टूट गया, जिसके साथ उनकी मां रोज घर से बाहर निकलती थीं. करीब 110 ग्राम सोना वापस मिल पाएगा या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा. लेकिन परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल यह है कि उनकी मां उस डर से बाहर निकलें और फिर से सामान्य जिंदगी जी सकें. ब्रैम्पटन की यह घटना बताती है कि चोरी हमेशा डराकर या जबरदस्ती ही नहीं की जाती. कई बार अपराधी भरोसे और अपनापन दिखाकर भी किसी को कुछ ही सेकंड में नुकसान पहुंचा देते हैं.