सिर्फ 15 मिनट का काम, बिल आया 45 हजार: अमेरिका में स्विच बदलने की कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश; भारत से इतनी अलग है इलेक्ट्रीशियन की फीस
अमेरिका में घर का एक छोटा इलेक्ट्रिकल काम करवाने पहुंचे दो इलेक्ट्रिशियन ने करीब 15 मिनट में स्विच इंस्टॉल कर दिया. काम खत्म होने के बाद जब करीब 450 डॉलर या लगभग 45 हजार रुपये का बिल सामने आया तो घर का मालिक हैरान रह गया. सोशल मीडिया पर सामने आए इस अनुभव ने भारत और अमेरिका में रोजमर्रा की सर्विस के खर्च के फर्क को भी चर्चा में ला दिया है.
घर में कोई छोटा-मोटा इलेक्ट्रिकल काम हो तो भारत में ज्यादातर लोग आसपास के इलेक्ट्रिशियन को फोन करके बुला लेते हैं. स्विच बदलना हो, तार जोड़ना हो या कोई कनेक्शन ठीक करना हो, काम अक्सर थोड़े समय में पूरा हो जाता है.
लेकिन अमेरिका में सामने आए एक वीडियो ने इसी छोटे से काम की कीमत को लेकर लोगों को हैरान कर दिया. एक घर में इलेक्ट्रिक स्विच से जुड़ा काम कराने के लिए दो इलेक्ट्रिशियन पहुंचे. उन्होंने करीब 15 मिनट काम किया और इसके बाद जो बिल आया, वह करीब 450 डॉलर था. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 45 हजार रुपये के आसपास बैठती है. यही वजह है कि इस अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया.
दो इलेक्ट्रिशियन और साथ में सर्विस ट्रक
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में घर की मालकिन अमेरिका में अपने अनुभव के बारे में बताती नजर आती हैं. उनके घर में एक छोटे इलेक्ट्रिकल स्विच से जुड़ा काम था, जिसके लिए प्रोफेशनल सर्विस बुक की गई. इसके बाद दो इलेक्ट्रिशियन घर पहुंचे. उनके साथ एक सर्विस ट्रक भी था. ऐसे सर्विस ट्रकों में इलेक्ट्रिकल काम से जुड़े जरूरी टूल्स और सामान रखा जाता है, जिससे इलेक्ट्रिशियन को हर छोटे काम के लिए अलग से सामान खरीदने या लाने की जरूरत न पड़े. घर पहुंचने के बाद दोनों ने पहले समस्या देखी और फिर स्विच लगाने का काम शुरू किया.
दीवार के अंदर किया वायर कनेक्शन
काम सिर्फ ऊपर से स्विच बदलने तक सीमित नहीं था. वीडियो में बताया गया कि इलेक्ट्रिशियन ने लकड़ी की दीवार के अंदर मौजूद वायर कनेक्शन पर काम किया और इसके बाद नया इलेक्ट्रिक स्विच इंस्टॉल किया. काम देखने में भले ही छोटा था, लेकिन इलेक्ट्रिकल वायरिंग से जुड़े काम में सावधानी जरूरी होती है. गलत कनेक्शन होने पर शॉर्ट सर्किट या दूसरी परेशानी हो सकती है. इसलिए प्रोफेशनल इलेक्ट्रिशियन को बुलाया गया. हालांकि, काम ज्यादा लंबा नहीं चला और करीब 15 मिनट में स्विच लगाने का काम पूरा हो गया.
बिल देखकर रह गए दंग
असल हैरानी काम खत्म होने के बाद हुई. जब सर्विस का बिल सामने आया तो रकम करीब 450 डॉलर थी. भारतीय रुपये में इसे करीब 45 हजार रुपये माना गया. इसका मतलब बाहर से देखने पर 15 मिनट का काम और करीब 45 हजार रुपये का बिल. यही तुलना सोशल मीडिया यूजर्स को सबसे ज्यादा चौंका रही है. भारत में ऐसा बिल सुनकर ज्यादातर लोगों का पहला सवाल यही होगा कि आखिर 15 मिनट के काम के इतने पैसे कैसे हो सकते हैं. लेकिन अमेरिका में किसी सर्विस की कीमत सिर्फ काम करने में लगे मिनटों से तय नहीं होती.
सिर्फ काम के 15 मिनट के पैसे नहीं
किसी प्रोफेशनल को घर बुलाने पर वहां कई तरह के चार्ज बिल में शामिल हो सकते हैं. इनमें घर तक पहुंचने की विजिट फीस, सर्विस चार्ज, लेबर चार्ज, कॉन्ट्रैक्टर की फीस और इस्तेमाल किए गए सामान की कीमत शामिल हो सकती है. इसके अलावा इलेक्ट्रिशियन अपनी सर्विस के लिए न्यूनतम चार्ज भी ले सकता है. मतलब अगर कोई काम 15 मिनट में खत्म हो गया, तब भी ग्राहक से सिर्फ 15 मिनट की मजदूरी नहीं ली जाती. सर्विस देने वाली कंपनी के हिसाब से चार्ज का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए इस मामले में पूरे बिल को सिर्फ स्विच लगाने की कीमत समझना सही नहीं होगा.
सर्विस ट्रक का खर्च भी जुड़ सकता है
वीडियो में इलेक्ट्रिशियन एक सर्विस ट्रक के साथ पहुंचे थे. अमेरिका में कई प्रोफेशनल सर्विस कंपनियां ऐसे ट्रकों के जरिए अपने कर्मचारी और जरूरी उपकरण ग्राहक के घर तक भेजती हैं. ट्रक, सामान, कर्मचारी का आना-जाना और कंपनी के दूसरे ऑपरेशनल खर्च भी सर्विस की कुल कीमत का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि, इस खास मामले में 450 डॉलर के बिल में कौन-कौन से चार्ज शामिल थे, इसकी पूरी जानकारी वीडियो में सामने नहीं आती. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि रकम का कितना हिस्सा सिर्फ लेबर था और कितना विजिट या दूसरे चार्ज का.
भारत में इतना खर्च सुनकर चौंक जाएंगे लोग
भारत में छोटे इलेक्ट्रिकल काम के लिए तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है. आमतौर पर घर के पास का इलेक्ट्रिशियन फोन पर उपलब्ध हो जाता है और थोड़ी देर में घर पहुंच जाता है. स्विच बदलना, वायर जोड़ना या छोटा कनेक्शन ठीक करने जैसे कामों के लिए कई जगह कुछ सौ रुपये की फीस लग सकती है. अगर नया स्विच या दूसरा सामान खरीदना पड़े तो उसकी कीमत अलग से जुड़ जाती है. हालांकि, भारत में भी इलेक्ट्रिशियन की फीस हर शहर और इलाके में एक जैसी नहीं होती. काम कितना मुश्किल है, कितनी वायरिंग करनी है और कौन सा सामान इस्तेमाल हो रहा है, इन चीजों से खर्च बदल सकता है.
अमेरिका में छोटी सर्विस क्यों लगती है महंगी?
इस मामले को देखकर एक बड़ा सवाल यही उठता है कि अमेरिका में छोटे काम भी इतने महंगे क्यों दिखाई देते हैं. इसकी एक वजह वहां प्रोफेशनल सर्विस की पूरी कॉस्ट स्ट्रक्चर हो सकती है. किसी कंपनी को कर्मचारी की सैलरी, ट्रैवल, इंश्योरेंस, टूल्स, गाड़ी, प्रशासनिक खर्च और दूसरे ऑपरेशनल खर्च उठाने पड़ते हैं. इन खर्चों का कुछ हिस्सा ग्राहक से लिए जाने वाले सर्विस चार्ज में शामिल हो सकता है. इसलिए वहां किसी काम की कीमत को केवल इस हिसाब से देखना कि इलेक्ट्रिशियन ने कितने मिनट हाथ से काम किया, पूरी तस्वीर नहीं बताता.
सोशल मीडिया पर शुरू हुई भारत-अमेरिका की तुलना
वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अमेरिका और भारत में घरेलू सर्विस के खर्च की तुलना शुरू कर दी. कई लोगों का कहना था कि भारत में इतने पैसे में एक छोटा स्विच लगवाने के बजाय घर के कई इलेक्ट्रिकल काम हो सकते हैं. कुछ यूजर्स ने यह भी बताया कि अमेरिका में घर पर किसी प्रोफेशनल को बुलाने का खर्च ही काफी ज्यादा हो सकता है. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि हर अमेरिकी इलेक्ट्रिशियन का चार्ज इतना नहीं होता और कीमत इलाके, कंपनी और काम के हिसाब से बदल सकती है. इसका मतलब 450 डॉलर का यह बिल हर जगह लागू होने वाली कीमत नहीं माना जा सकता.
छोटी चीज, बड़ा खर्च
यह मामला असल में सिर्फ एक स्विच की कहानी नहीं है. यह दो अलग देशों में रोजमर्रा की सर्विसेज की कीमत के फर्क को दिखाता है. भारत में जहां छोटा इलेक्ट्रिकल काम अक्सर आसानी से और कम खर्च में हो जाता है, वहीं अमेरिका में उसी तरह की सर्विस के साथ विजिट, लेबर और दूसरे चार्ज जुड़ सकते हैं. 15 मिनट में काम पूरा होने के बावजूद करीब 450 डॉलर का बिल इसलिए चर्चा में है क्योंकि लोगों ने सीधे काम के समय और कुल कीमत की तुलना कर ली. हालांकि, बिल में शामिल हर चार्ज की जानकारी सामने नहीं होने से इसकी पूरी लागत को सिर्फ स्विच लगाने की कीमत कहना सही नहीं होगा.