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माइनस तापमान, बर्फ की चादर और 50 घंटे की जंग: अलास्का के पहाड़ों में यमराज को चकमा दे गई डॉगी; जानें कैसे बची जान

अलास्का के बर्फ से ढके पहाड़ों में हिमस्खलन के बाद लापता हुई चार साल की डॉगी लूलू करीब 50 घंटे तक अकेली फंसी रही. उसके साथ मौजूद दो पर्वतारोही हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन लूलू का कहीं पता नहीं चल रहा था. परिवार और बचाव दल उसकी तलाश में जुटे रहे. अंत में AirTag से मिले सिग्नल और पायलटों की मदद से उसे खोज लिया गया.

माइनस तापमान, बर्फ की चादर और 50 घंटे की जंग: अलास्का के पहाड़ों में यमराज को चकमा दे गई डॉगी; जानें कैसे बची जान
Image Credit: FB@Lauren Joy Padawer | बर्फीले पहाड़ों में 50 घंटे तक भटकती रही डॉगी लूलू!

अलास्का के चुगाच स्टेट पार्क में दो अनुभवी पर्वतारोही पहाड़ पर चढ़ाई कर रहे थे. उनके साथ चार साल की लूलू भी थी. वह पूडल और हस्की नस्लों के मेल से बनी डॉगी है. सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक आए हिमस्खलन ने पूरे सफर को खतरनाक बना दिया.

बर्फ का तेज बहाव दोनों पर्वतारोहियों को पहाड़ी ढलान पर करीब 500 फीट नीचे तक ले गया. दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इस अफरा-तफरी के बीच लूलू कहीं गायब हो गई.

घायल बॉयफ्रेंड अस्पताल में, लूलू की तलाश में जुटी मालकिन

लूलू की मालकिन लॉरेन पडावर के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं थी. उनके बॉयफ्रेंड ब्रायन भी उन दोनों पर्वतारोहियों में शामिल थे, जो हिमस्खलन की चपेट में आए थे. हादसे में ब्रायन का जबड़ा टूट गया था और हाथ में गंभीर चोट आई थी. उनके साथ मौजूद दूसरे पर्वतारोही की तीन पसलियां टूट गई थीं और रीढ़ की हड्डी में भी फ्रैक्चर हुआ था. उस समय लॉरेन अपने पिता का 80वां जन्मदिन मनाने के लिए विदेश में थीं. वह तुरंत घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकती थीं. एक तरफ बॉयफ्रेंड की चोटों की चिंता थी, तो दूसरी तरफ लूलू के बर्फीले पहाड़ों में अकेले फंसे होने का डर.

20 से ज्यादा लोगों ने शुरू की तलाश

लॉरेन ने दूर रहते हुए भी लूलू को खोजने की हर संभव कोशिश की. उन्होंने वहां के स्थानीय बचाव संगठनों, हाइकिंग ग्रुप और कई लोगों से संपर्क किया. धीरे-धीरे इस तलाश में 20 से ज्यादा वॉलंटियर शामिल हो गए. लूलू को खोजने के लिए एक ऐसी टीम की मदद भी ली गई, जिसमें गंध पहचानने की खास ट्रेनिंग पाने वाला कुत्ता भी शामिल था. सभी की कोशिश थी कि मौसम और पहाड़ी रास्ते ज्यादा मुश्किल होने से पहले लूलू का पता चल जाए. लॉरेन ने पीपल मैगजीन से बातचीत में बताया कि वह हर संभव रास्ता आजमाना चाहती थीं. वह यह सोचकर हार नहीं मानना चाहती थीं कि उन्होंने लूलू को खोजने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश नहीं की.

Apple AirTag से जगी उम्मीद

लूलू के गले में Apple AirTag लगा हुआ था. इसी छोटे से डिवाइस से बचाव दल को उम्मीद थी कि उन्हें डॉगी की लोकेशन का पता चल सकता है. लेकिन शुरुआत में जो लोकेशन मिल रही थी, वह उस जगह से करीब आधा मील दूर थी, जहां लूलू असल में मौजूद थी. पहाड़ों का ऊबड़-खाबड़ इलाका और लगातार बदलता मौसम भी खोज अभियान में मुश्किलें पैदा कर रहे थे. AirTag का सिग्नल मिलना एक अहम सुराग था, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे लूलू तक पहुंचना आसान नहीं था. ऐसे में जमीन पर तलाश के साथ आसमान से भी उसकी खोज शुरू की गई.

पायलटों को मिला सिग्नल, बदल गई तलाश की दिशा

लूलू की खोज के दौरान पायलट अमांडा बार्कर और डेव बेकेट ने हवाई तलाशी अभियान में एक और AirTag सिग्नल पकड़ा. इससे टीम को उसकी संभावित लोकेशन का अंदाजा लगाने में मदद मिली. वहीं, दूसरी तरफ लॉरेन भी दूर बैठकर सैटेलाइट तस्वीरों और नक्शों की मदद से संभावित जगहों को समझने की कोशिश कर रही थीं. अलग-अलग सुरागों को मिलाकर लूलू की तलाश आगे बढ़ाई गई. अब तक करीब 50 घंटे बीत चुके थे. बर्फीले पहाड़ों में इतने लंबे समय तक अकेले रहने के बाद भी लूलू के जिंदा होने की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी.

तस्वीर देखते ही रो पड़ीं लॉरेन

अंत में बचाव दल को लूलू मिल गई. करीब दो दिन तक बर्फीले जंगल और पहाड़ी इलाके में अकेले रहने के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. जब लॉरेन को लूलू की तस्वीर दिखाई गई, तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. उन्होंने पीपल मैगजीन को बताया कि वह यह देखकर हैरान रह गई थीं. उन्हें लगा कि यह खबर इतनी अच्छी है कि शायद सच भी न हो. तस्वीर देखते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए. जिस डॉगी की तलाश में इतने लोग जुटे थे, उसका जिंदा मिलना पूरे परिवार के लिए बड़ी राहत थी.

चोट लगी, लेकिन घर लौट आई लूलू

लूलू को पहाड़ से सुरक्षित निकालने के बाद उसकी चोटों का पता चला. उसके एक पैर की उंगली टूट गई थी और एक कैनाइन दांत भी टूट गया था. हालांकि, बाकी हालत ठीक बताई गई और वह घर पर धीरे-धीरे ठीक हो रही है. उसके लिए ये करीब 50 घंटे किसी लंबे बुरे सपने से कम नहीं रहे होंगे. आसपास बर्फ, मुश्किल रास्ते और बदलता मौसम था. फिर भी वह बच गई और आखिरकार अपने लोगों के पास लौट आई.

एक छोटा डिवाइस बना बड़ी उम्मीद

लूलू की यह कहानी सिर्फ एक पालतू जानवर के लापता होने और वापस मिलने की नहीं है. इसमें उस लगाव की झलक भी है, जिसके चलते उसकी मालकिन ने हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी तलाश की हर कोशिश जारी रखी. AirTag से मिली जानकारी ने पायलटों की  मदद और 20 से ज्यादा लोगों की मेहनत ने इस तलाश को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, इस तरह के डिवाइस की लोकेशन हमेशा बिल्कुल सटीक मिले, यह जरूरी नहीं है. फिलहाल लूलू अपने घर लौट चुकी है और ठीक हो रही है. उसके परिवार के लिए इससे बड़ी राहत शायद कोई नहीं हो सकती कि जिस साथी को उन्होंने बर्फीले पहाड़ों में खो दिया था, वह दोबारा उनके बीच है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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About the Author

Santosh Kumar Mishra

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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