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अगर आप भी अपने लैपटॉप, PC या फिर फोन में Zoom या Mozilla Firefox का इस्तेमाल करते हैं, तो जरा सावधान हो जाइए. भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने जूम, फायरफॉक्स और Thunderbird ऐप को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है. सरकार की एजेंसी के अनुसार इन ऐप्स में कुछ गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स आपके डिवाइस में सेंध लगा सकते हैं.
साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने यह चेतावनी 28 अक्टूबर 2026 को जारी की. इन खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स यूजर्स के निजी डेटा तक पहुंचने, डिवाइस का एक्सेस हासिल करने या बिना अनुमति के कोड चलाने की कोशिश कर सकते हैं. लेकिन इस अलर्ट का यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों का डेटा खतरे में है. खतरा उन यूजर्स को हो सकता है, जो इन सॉफ्टवेयर के प्रभावित वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में अपने ऐप्स को अपडेट रखना जरूरी है.
CERT-In ने Mozilla Firefox ब्राउजर, Thunderbird ईमेल ऐप और Zoom के कुछ वर्जन में सुरक्षा से जुडी खामियों को लेकर चेतावनी दी है. बता दें कि Firefox का इस्तेमाल इंटरनेट ब्राउजिंग के लिए किया जाता है, वहीं Thunderbird के जरिए ईमेल भेजने और रिसीव करने का काम होता है. वहीं, Zoom का इस्तेमाल वीडियो मीटिंग और ऑफिस के कामकाज के लिए किया जाता है.
इन ऐप्स में मौजूद कुछ खामियों के कारण साइबर अपराधियों को सिस्टम में सेंध लगाने का मौका मिल सकता है. अगर इन खामियों का फायदा उठाया जाता है, तो यूजर की निजी जानकारी खतरे में आ सकती है. कुछ मामलों में हमलावर डिवाइस पर ज्यादा परमिशन प्राप्त करने या फिर बिना परमिशन के कोड चलाने में भी सफल हो सकते हैं.
इसका जवाब है नहीं, लेकिन यूजर्स को सावधान रहने की जरूरत है. CERT-In की यह चेतावनी उन लोगों के लिए खतरे की घंटी है, जो प्रभावित सॉफ्टवेयर वर्जन का इस्तेमाल अपने डिवाइस में कर रहे हैं. इस खतरे से बचने के जरूरी है कि आप सबसे पहले अपने डिवाइस में इंस्टॉल ऐप का वर्जन चेक कर लें साथ ही यह भी चेक करें कि क्या उसका कोई अपडेट मौजूद है या नहीं. अगर अपडेट आ गया है, तो तुरंत अपडेट करें.
सॉफ्टवेयर का वर्जन चेक करें
इसके लिए आपको ऐप के About या Version Information सेक्शन में जाना होगा. यहां आप चेक कर सकते हैं कि आपके डिवाइस में इस समय कौन सा वर्जन रन कर रहा है. इसके बाद CERT-In की एडवाइजरी में दिए गए प्रभावित वर्जन को डिवाइस के वर्जन से मिला लें.
अनजान वेबसाइट से अपडेट डाउनलोड न करें
इस बात का खास ख्याल रखें कि ऐप को अपडेट करने के लिए हमेशा ऑफिशियल अपडेट ऑप्शन, ऑफिशियल वेबसाइट या भरोसेमंद ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
अपडेट के बाद ऐप रीस्टार्ट करें
कुछ अपडेट इंस्टॉल करने के बाद ऐप को फिर से ऑन या फिर फोन को ही रीस्टार्ट करना होता है. अपडेट के दौरान स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों को मानें, जिससे सुरक्षा से जुड़े बदलाव सही तरीके से आपके डिवाइस पर लागू हो सकें.
साइबर अटैक से बचने के लिए हमेशा मजबूत पासवर्ड ही काफी नहीं होता है. डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले ब्राउजर, ईमेल ऐप और दूसरे सॉफ्टवेयर को भी समय पर अपडेट करना जरूरी होता है, ये भी आपको बड़े साइबर खतरे से बचाते हैं.