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इंडियन टेक जायंट Zoho ने टेक इंडस्ट्री में अपने 30 साल की शानदार यात्रा पूरी कर ली है. इस बड़े और ऐतिहासिक मौके पर जोहो के को-फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने Zee News से खास बातचीत की. इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कंपनी के नए इंटेलिजेंट एजेंट Zia Chat, ग्लोबल मार्केट में जोहो की अलग पहचान, भारत-चीन टेक कॉम्पिटिशन, एआई (AI) के भविष्य, देश के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) इकोसिस्टम और युवाओं की नौकरियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी.
सवाल: आपने Zoho का इंटेलिजेंट एजेंट Zia Chat लॉन्च किया है. आप इसे आगे कैसे देखते हैं?
श्रीधर वेम्बू: हमने हाल ही में दो बड़े इनिशिएटिव लॉन्च किए हैं, जिनमें से एक Zia Chat है. Zia जोहो का अपना इंटेलिजेंट एजेंट है, जो Large Language Model (LLM) की पावर के साथ आता है. यह इंटरनेट पर मौजूद दुनिया भर की नॉलेज को जोहो के अंदर मौजूद आपके बिजनेस डेटा के साथ जोड़ता है. जोहो का काम आपके डेली वर्क को एकदम आसान और स्मूथ बनाना है. जब हम पूरी दुनिया की AI इंटेलिजेंस को जोहो के ऐप्स और डेटा से मिला देते हैं, तो यूजर्स के लिए काम करना बहुत आसान हो जाता है. यही हमारे कस्टमर्स के लिए असली वैल्यू है.
सवाल: माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी ग्लोबल टेक कंपनियों से जोहो अपने प्रोडक्ट्स को कैसे अलग रखता है?
श्रीधर वेम्बू: जोहो के पास बिजनेस ऐप्स का एक बहुत बड़ा और आपस में जुड़ा हुआ (pre-integrated) सुइट है. अब Zia Chat के जरिए हमने इन सभी ऐप्स के ऊपर एक AI लेयर जोड़ दी है. इसका मतलब है कि एक आम यूजर बस एक ही स्क्रीन पर चैट करते हुए सारा डेटा शॉर्ट समरी के रूप में देख सकता है. आप उसी चैट विंडो से सीधे CRM या ई-मेल में जा सकते हैं, ई-मेल भेज सकते हैं और वो डेटा तुरंत अपडेट भी हो जाएगा. काम करने की यही आसानी और सीमलेस एक्सपीरियंस जोहो को बाकी टेक कंपनियों से अलग बनाता है.
सवाल: फ्यूचर के लिए जोहो की मुख्य टेक्नोलॉजी और फोकस एरिया क्या हैं?
श्रीधर वेम्बू: हमारा सबसे बड़ा फोकस AI कैपेबिलिटीज पर ही है. हम LLM को एक बेसिक यूटिलिटी यानी कमोडिटी की तरह देखते हैं. हमारी पूरी कोशिश इसे ऐसा बनाने की है जो 100% सटीक हो और कोई गलती न करे. इसके अलावा, इस AI टेक्नोलॉजी का यूज लीगल, हेल्थकेयर और सेमीकंडक्टर डिजाइन जैसी इंडस्ट्रीज में बहुत तेजी से हो सकता है. हम इन सभी सेक्टर्स के लिए खास एआई टूल्स और ऐप्लिकेशंस बनाने में भारी इन्वेस्ट कर रहे हैं.
सवाल: अगर आप आज 25 साल के यूथ होते, तो क्या आप अभी भी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ही चुनते?
श्रीधर वेम्बू: पर्सनली कहें तो हां, क्योंकि यही वो चीज है जो मैं सबसे अच्छे से जानता हूं. लेकिन आज के टाइम में आपको टाइम के हिसाब से खुद को ढालना होगा. बिना मजबूत बेसिक स्किल्स (foundation) के आप किसी भी फील्ड में ग्रो नहीं कर सकते. आज के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे किसी न किसी डोमेन का एक्सपर्ट बनना पड़ेगा. जैसे- आपको GST, हेल्थकेयर, इंश्योरेंस, ऑटोमोबाइल या रियल एस्टेट की गहरी समझ होनी चाहिए. सॉफ्टवेयर नॉलेज के साथ किसी खास इंडस्ट्री का प्रैक्टिकल ज्ञान (Vertical Focus) होना ही आने वाले टाइम का सबसे बड़ा मौका है.
सवाल: इंडिया और चीन के बीच टेक कॉम्पिटिशन को लेकर आपकी क्या राय है? इंडिया को चीन से आगे निकलने के लिए क्या करना होगा?
श्रीधर वेम्बू: ऐसा नहीं है कि हम हर फील्ड में पीछे हैं. सेमीकंडक्टर डिजाइन टैलेंट के मामले में भारत निश्चित रूप से आगे है और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में भी हम तेजी से बेहतर हो रहे हैं. हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी यंग पॉपुलेशन (demographics) है. अगर आप 40 साल पहले जापान और चीन को देखें, तो जापान बहुत आगे था. लेकिन जापान में बर्थ रेट कम हो गया और वहां की पॉपुलेशन बुजुर्ग होती गई, जिसका फायदा उठाकर चीन तेजी से आगे निकल गया. अब भारत का टाइम आ चुका है. अगर हम R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) में सही इन्वेस्टमेंट करते हैं, तो अगले 20 सालों में भारत पूरी दुनिया को लीड करेगा.
सवाल: दुनिया के कई बड़े लीडर्स AI पर ब्रेक लगाने की बात कर रहे हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप जैसे लीडर्स इसे बिना रुके आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं. आपकी इस पर क्या राय है?
श्रीधर वेम्बू: जो कंपनियां खुद एआई बना रही हैं और दूसरों को रुकने की सलाह दे रही हैं, यह बिल्कुल गलत बात है. यह वैसा ही है जैसे कोई टॉपर स्टूडेंट बाकी बच्चों से कहे कि 'तुम पढ़ाई मत करो ताकि मैं हमेशा नंबर वन रहूं.' जिन कंपनियों ने AI पर पॉज लगाने की बात कही थी, उन्होंने ही अगले हफ्ते अपने नए AI मॉडल लॉन्च कर दिए! असली खतरा AI टेक्नोलॉजी से नहीं है, बल्कि इसके गलत, लापरवाही या मिसयूज से है. AI एक पावरफुल वेपन की तरह है. जैसे हम खतरनाक हथियारों पर सेफ्टी रूल्स (safeguards) लगाते हैं, वैसे ही AI के सही और सेफ यूज के लिए नियम बनाने की जरूरत है, न कि इस पर बैन लगाने या इसे रोकने की.
सवाल: जोहो को खड़ा करने के बाद, अगले 10 सालों में आप भारत के लिए क्या करना चाहते हैं?
श्रीधर वेम्बू: मेरी दो सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं:
गहरा R&D इन्वेस्टमेंट: इंडिया के रिसर्च एंड डेवलपमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना और अपने देश के टैलेंट को देश में ही रोक कर रखना.
R&D के जरिए गांवों का विकास (Rural Development through R&D): अगर हम सारा टेक और R&D सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित रखेंगे, तो दिल्ली या बेंगलुरु जैसे शहरों की आबादी 10-10 करोड़ पहुंच जाएगी, जिन्हें संभालना नामुमकिन हो जाएगा. इसलिए हमें देश के छोटे जिलों और ग्रामीण इलाकों में हाई-टेक जॉब्स और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने होंगे, ताकि यंग टैलेंट को अपने घर के पास ही बेहतरीन सैलरी वाली जॉब्स मिल सकें.
सवाल: क्या AI जॉब्स को खत्म कर देगा या नए रोजगार पैदा करेगा?
श्रीधर वेम्बू: अभी AI मार्केट में एक इन्वेस्टमेंट बबल (निवेश का गुब्बारा) बना हुआ है, जो कभी भी फूट सकता है. AI से कोडिंग और कुछ टेक जॉब्स पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन मैं फ्यूचर को लेकर बहुत पॉजिटिव हूं. इंसानों के पास करने के लिए अनगिनत काम हैं.
आने वाले टाइम में जॉब्स के 4 बड़े पिलर्स होंगे:
Nature (प्रकृति): ऑर्गेनिक फार्मिंग (natural farming), शुद्ध खाना उगाना और पर्यावरण को बचाना.
Nurture (केयर व एजुकेशन): टीचिंग, नर्सिंग और डॉक्टर्स. आने वाले समय में बुजुर्गों की देखभाल के लिए ज्यादा मेडिकल स्टाफ की जरूरत होगी. वहीं बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए हर 5 बच्चों पर 1 टीचर का मॉडल अपनाकर लाखों नई टीचिंग जॉब्स बनाई जा सकती हैं.
Culture (संस्कृति और स्पोर्ट्स): एंटरटेनमेंट, म्यूजिक, डांस, स्पोर्ट्स और लोकल फेस्टिवल्स. ये सभी इकोनॉमिक एक्टिविटीज हैं. अगर हर छोटे जिले में स्पोर्ट्स स्टेडियम और कॉम्पिटिशन हों, तो यूथ के लिए बहुत रोजगार पैदा होंगे.
Scripture (अध्यात्म और परंपराएं): पूजा-पाठ, धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के लिए हमें हमेशा इंसानों की ही जरूरत रहेगी, रोबोट्स की नहीं.
टेक्नोलॉजी का असली मकसद चीजों को सस्ता और आसान बनाना है, ताकि आम इंसान की प्रोडक्टिविटी बढ़े और वह इन रियल, ह्यूमन-टू-ह्यूमन सेक्टर्स पर अपना ध्यान लगा सके.
पूरा इंटरव्यू नीचे देखें: