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AI को लेकर अमेरिकी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी दफ्तरों में बैन हुआ चीन का DeepSeek, जानिए क्या है असली वजह

AI की दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. अमेरिका ने अपने सभी फेडरल सरकारी दफ्तरों और एजेंसियों में चीनी AI लैब DeepSeek के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.

AI को लेकर अमेरिकी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी दफ्तरों में बैन हुआ चीन का DeepSeek, जानिए क्या है असली वजह
Image Credit: DeepSeek को लेकर अमेरिका में एक्शन

अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी में आगे निकलने की अलग ही रेस चल रही है. न सिर्फ आगे निकलने की, बल्कि एआई से होने वाले खतरों से बचने की दोनों देश खूब सुरक्षा बरत रहे हैं. इसी क्रम में अमेरिकी सरकार ने चीनी AI कंपनी DeepSeek के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी DHS ने सोमवार को सभी संघीय नागरिक एजेंसियों को अपने IT सिस्टम से DeepSeek के प्रोडक्ट और सर्विस हटाने का निर्देश दे दिया है. सरकार को शक है कि इन AI टूल्स का इस्तेमाल करने से संवेदनशील जानकारी ड्रैगन के पास पहुंच सकती है.

अमेरिकी सरकार के इस आदेश के अनुसार सरकारी एजेंसियां अब DeepSeek के प्रोडक्ट और सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी. सिर्फ इतना ही नहीं, एजेंसियों को कंपनी से जुडे प्रोडक्ट खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है. अमेरिकी सरकार का एआई वाला नियम उन सेवाओं पर लागू होगा, जिन्हें दूसरी कंपनियों ने DeepSeek के AI मॉडल की सहायता से तैयार किया है.  

यूजर्स की जानकारी को लेकर उठे सवाल

अमेरिकी सरकार की सबसे बडी चिंता डेटा की सुरक्षा को लेकर है. गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि DeepSeek के सर्वर चीन में हैं. ऐसे में शक है कि वहां के कानूनों के तहत चीनी सरकारी एजेंसियों को कंपनी के सिस्टम और उसमें मौजूद जानकारी तक पहुंच मिल सकती है. विभाग ने यह भी कहा है कि DeepSeek पर अकाउंट बनाते समय यूजर्स की पर्सनल जानकारी जुटाई जाती है. इसके साथ ही यूजर्स की एक्टिविटी को ट्रैक करने और उनकी डिजिटल पहचान से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने की क्षमता भी चिंता का विषय है. अमेरिका को लगता है कि इस जानकारी को दूसरी जगहों पर मौजूद डेटा के साथ मिलाकर अमेरिकी नागरिकों या सरकारी योजनाओं के बारे में जरूरी जानकारियां निकाली जा सकती हैं. विभाग ने AI मॉडल में मैलवेयर और दूसरी सुरक्षा खामियां होने की आशंका भी जताई है.

फिलहाल ये सरकार की ओर से जताई गई सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं. इन्हें इस बात का आखिरी सबूत नहीं माना जा सकता कि हर इस्तेमाल में डेटा चीन भेजा ही जाता है.

एजेंसियों को क्या करना होगा?

नए निर्देश के बाद सरकारी विभागों को DeepSeek और उससे जुडी कंपनियों के प्रोडक्ट अपने सिस्टम से हटाने होंगे. सरकारी खरीद की सूची और उन प्लेटफॉर्म से भी इनका नाम हटाना होगा, जहां से एजेंसियां सॉफ्टवेयर या दूसरी सर्विस खरीदती हैं. कुछ मामलों में राहत मिल सकती है. अगर किसी विभाग को लगता है कि DeepSeek हटाने से उसके जरूरी काम पर असर पड़ेगा, तो वह लिखित आवेदन देकर छूट मांग सकता है. इसके लिए 60 दिनों के अंदर रिक्वेस्ट करना होगा.

जब तक सभी सिस्टम से इन टूल्स को हटाने का काम पूरा नहीं होता, तब तक एजेंसियों को नेटवर्क पर आने जाने वाले डेटा की निगरानी करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की सलाह दी गई है. किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी पर भी नजर रखनी होगी.

पहले भी लग चुकी है रोक

DeepSeek को लेकर अमेरिका में पहले भी कदम उठाए जा चुके हैं. अमेरिकी वाणिज्य विभाग और नौसेना सरकारी डिवाइस पर इसके इस्तेमाल पर रोक लगा चुके हैं. न्यूयॉर्क, टेनेसी और वर्जीनिया जैसे राज्यों ने भी इस दिशा में कार्रवाई की है. DeepSeek ने 2025 में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होने के बाद तेजी से लोगों के लिए पहचान बनाया. इसकी एक वजह यह भी है कि इसके ओपन सोर्स मॉडल का इस्तेमाल कई दूसरे AI विकल्पों के मुकाबले कम खर्च में किया जा सकता है. इसके मॉडल ने ऐसे समय में चर्चा बटोरी, जब अमेरिकी कंपनियां AI टेक्नोलॉजी पर भारी इन्वेस्ट कर रही थीं.

Snowflake, Vercel और OpenRouter जैसी कंपनियां भी अपनी सर्विस में DeepSeek की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल कर चुकी हैं. ऐसे में अमेरिकी सरकार के इस फैसले का असर सरकारी एजेंसियों के साथ साथ उन सर्विस पर भी पड़ सकता है, जो इस तकनीक पर निर्भर हैं.

AI को लेकर अमेरिका और चीन में बढ़ रही खींचतान

DeepSeek पर कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीक को लेकर मुकाबला तेज हो रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने AI और डेटा सेंटर के विकास को धीमा करने की कोशिशों पर नाराजगी जताई थी. उनका कहना था कि इससे चीन को फायदा हो सकता है. वहीं अमेरिका की एआई बनाने वाली कंपनियां OpenAI और Anthropic ने भी DeepSeek समेत दूसरे चीनी कंपनियों पर अपने मॉडल से जानकारी लेकर छोटे AI मॉडल तैयार करने के आरोप लगाए हैं. टेक्नोलॉजी की दुनिया में इसे ही डिस्टिलेशन कहते हैं.

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About the Author

Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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