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आज अगर आप किसी के हाथ में कटा हुआ सेब यानी Apple का लोगो देखते हैं, तो दिमाग में तुरंत एक प्रीमियम और महंगे ब्रांड की इमेज बन जाती है. Apple आज दुनिया की सबसे कीमती और मशहूर टेक कंपनियों में से एक है. लेकिन 2026 में Apple एक बहुत बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है. 15 सालों तक कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले Tim Cook ने अगस्त 2026 में CEO का पद छोड़ दिया है और अब कंपनी की कमान John Ternus के हाथों में आ चुकी है. जॉन टर्नस CEO बनते ही अपने 9 सितंबर वाले 'Surprise and Shine' इवेंट में iPhone 18 Pro सीरीज और इतिहास का पहला iPhone Fold लॉन्च करने की तैयारी में हैं. चलिए जानते हैं कि गैराज से शुरू हुई यह कंपनी जॉन टर्नस के दौर तक कैसे पहुंची.

1 अप्रैल 1976: गैराज में जन्म हुआ एक नए इतिहास का
Apple की शुरुआत 1 अप्रैल 1976 को स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), स्टीव वोज़्निएक (Steve Wozniak) और रोनाल्ड वेन (Ronald Wayne) ने मिलकर की थी. ये तीनों कैलिफोर्निया के लॉस अल्टोस में जॉब्स के माता-पिता के गैराज में जमा होते थे. वोज़्निएक एक जीनियस इंजीनियर थे, जो कंप्यूटर बोर्ड बनाने में माहिर थे. वहीं जॉब्स के पास एक दूरदर्शी बिजनेसमैन का दिमाग था, जो जानते थे कि किसी प्रोडक्ट को दुनिया के सामने कैसे पेश किया जाए.
कंपनी का नाम 'Apple' रखने के पीछे भी एक मजेदार किस्सा है. कोई बड़ी रहस्यमयी कहानी नहीं थी, बल्कि जॉब्स उस वक्त फल खाने की एक खास डाइट पर थे और उन्हें सेब बहुत पसंद था. दूसरा कारण यह था कि फोन डायरेक्टरी (Phone Book) में यह नाम उनकी पुरानी कंपनी 'Atari' से पहले आता था.
12 दिन में कंपनी छोड़कर जाने वाला बदकिस्मत पार्टनर
Apple के तीसरे को-फाउंडर रोनाल्ड वेन को 10 परसेंट का शेयर दिया गया था ताकि वे जॉब्स और वोज़्निएक के बीच होने वाले झगड़ों को सुलझा सकें. लेकिन कंपनी बनने के सिर्फ 12 दिन बाद रोनाल्ड वेन डर गए. उन्हें लगा कि अगर कंपनी पर कर्ज हुआ तो उनकी निजी संपत्ति जब्त हो जाएगी. इसलिए उन्होंने अपना 10% शेयर सिर्फ $800 (लगभग 66 हजार रुपये) में जॉब्स और वोज़्निएक को वापस बेच दिया. आज उस 10% शेयर की कीमत 300 अरब डॉलर से भी ज्यादा होती.
Apple I और Apple II: जब आया पहला किलर कंप्यूटर
पहला कंप्यूटर यानी Apple I बनाने के लिए जॉब्स ने अपनी फॉक्सवैगन बस बेची और वोज़्निएक ने अपना कीमती एचपी कैलकुलेटर बेच दिया. उन्होंने 50 कंप्यूटर बनाकर एक स्थानीय दुकानदार को बेचे. इसके बाद 1977 में आया Apple II, जिसमें रंगीन ग्राफिक्स और कीबोर्ड मौजूद था. इसमें VisiCalc नाम का पहला स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर चलता था. इसने बिजनेसमैनों की जिंदगी आसान बना दी और Apple II कई सालों तक कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट बना रहा.
1980 के अंत तक Apple शेयर बाजार में लिस्ट हो गई. यह उस दौर का सबसे बड़ा आईपीओ था, जिसने रातों-रात कई कर्मचारियों को करोड़पति बना दिया.

1984 का Macintosh और जॉब्स को अपनी ही कंपनी से निकाला जाना
1984 में Apple ने Macintosh लॉन्च किया. इसमें माउस और ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) था, यानी अब कंप्यूटर चलाने के लिए कोडिंग टाइप करने की जरूरत नहीं थी. लेकिन यह काफी महंगा था और इसकी बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई.
कंपनी के अंदर मतभेद इतने बढ़ गए कि तत्कालीन सीईओ जॉन स्कली (John Sculley) और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ तनातनी के बाद, 1985 में स्टीव जॉब्स को उनकी ही बनाई कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
NeXT, Pixar और Apple का दिवालिया होने के कगार पर पहुंचना
Apple से निकलने के बाद जॉब्स ने NeXT नाम की कंप्यूटर कंपनी बनाई और Pixar एनिमेटेड स्टूडियो की नींव रखी, जिसने 'Toy Story' जैसी सुपरहिट फिल्म बनाई.
दूसरी तरफ जॉब्स के बिना Apple गर्त में जाने लगी. गलत फैसलों और घटिया प्रोडक्ट्स (जैसे Newton PDA) की वजह से 1990 के दशक के मध्य तक कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई. फिर 1996 में Apple ने NeXT को खरीद लिया और स्टीव जॉब्स की सलाहकार के रूप में दोबारा वापसी हुई. 1997 में वे फिर से कंपनी के सीईओ बन गए.
स्टीव जॉब्स की वापसी और 2007 का 'iPhone' का महा-धमाका
वापस आते ही जॉब्स ने दर्जनों फ्लॉप प्रोजेक्ट्स बंद कर दिए. 1998 में उन्होंने रंग-बिरंगा iMac पेश किया, और 2001 में iPod व iTunes लॉन्च करके म्यूजिक इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया.

लेकिन सबसे बड़ा इतिहास रचा गया 9 जनवरी 2007 को. स्टीव जॉब्स ने अपने आइकॉनिक ब्लैक टर्टलनेक में स्टेज पर आकर कहा कि वे तीन क्रांतिकारी प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं: एक टच स्क्रीन वाला आईपॉड, एक मोबाइल फोन और एक इंटरनेट डिवाइस. फिर उन्होंने कहा कि ये तीन अलग चीजें नहीं हैं, बल्कि एक ही डिवाइस है और इसका नाम है iPhone. इस एक फोन ने नोकिया और ब्लैकबेरी जैसी बड़ी कंपनियों का नामो-निशान मिटा दिया.
10 जनवरी को जब न्यूज पेपर घर-घर पहुंचे तो फ्रंट पेज पर आईफोन और स्टीव जॉब्स छाए हुए थे. लॉस एजिल्स टाइम्स ने तो आईफोन चलाने का तरीका तक बता दिया था.

Tim Cook का 15 साल का शानदार दौर (2011 - अगस्त 2026)
2011 में स्टीव जॉब्स के निधन के बाद टिम कुक (Tim Cook) ने CEO का पद संभाला. कई आलोचकों का मानना था कि टिम कुक के अंडर Apple खत्म हो जाएगी, लेकिन टिम कुक ने कंपनी को फाइनेंशियल सुपरपावर बना दिया.
टिम कुक के नेतृत्व में Apple ने Apple Watch, AirPods, Apple Silicon (M-Series Chips) और Apple Vision Pro जैसे प्रोडक्ट्स उतारे. टिम कुक के कार्यकाल में ही Apple की मार्केट वैल्यू 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंची. टिम कुक अगस्त 2026 तक कंपनी के CEO के रूप में सेवा देते रहे और 15 साल की शानदार कप्तानी के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया.
John Ternus का नया दौर: Apple का अगला बॉस
अगस्त 2026 में टिम कुक के पद छोड़ने के बाद, Apple ने अपने सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ हार्डवेयर इंजीनियरिंग John Ternus (जॉन टर्नस) को नया CEO नियुक्त किया है. जॉन टर्नस 2001 से Apple के साथ जुड़े हुए हैं और उन्होंने iPad, Mac और iPhone के हार्डवेयर डिजाइन में सबसे अहम भूमिका निभाई है.
जॉन टर्नस को एक ऐसा लीडर माना जाता है जो तकनीकी समझ और विजन दोनों में माहिर हैं. टेक वर्ल्ड को उनसे काफी उम्मीदें हैं क्योंकि वे Apple को इनोवेशन के एक नए दौर में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
जॉन टर्नस का पहला महा-धमाका: iPhone 18 Pro और iPhone Fold
CEO बनने के तुरंत बाद जॉन टर्नस अपने पहले बड़े 'Surprise and Shine' इवेंट की मेजबानी करने जा रहे हैं. इस इवेंट में दो सबसे बड़े प्रोडक्ट्स आकर्षण का केंद्र बनने वाले हैं:
iPhone 18 Pro Series: जॉन टर्नस के नेतृत्व में आ रही इस फ्लैगशिप सीरीज में नया A20 Pro चिपसेट, अंडर-डिस्प्ले फेस आईडी और ज्यादा पावरफुल AI (Apple Intelligence) फीचर्स मिलने की उम्मीद है.
Apple का पहला iPhone Fold: यह Apple के इतिहास का सबसे बड़ा लॉन्च माना जा रहा है. सालों के इंतजार के बाद आखिरकार Apple अपना पहला फोल्डेबल फोन लाने जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 5.5-इंच की आउटर स्क्रीन और खुलने पर 7.8-इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलेगा, जिसमें क्रीज (Crease) लगभग न के बराबर होगी.
50 सालों का सफर और एक नई शुरुआत
गैराज के एक छोटे से कमरे से $666 के Apple I बोर्ड से शुरू हुई यह यात्रा आज जॉन टर्नस के नेतृत्व में अपने सबसे रोमांचक दौर में प्रवेश कर चुकी है. स्टीव जॉब्स की विजनरी सोच, टिम कुक की बेहतरीन मैनेजमेंट स्किल्स और अब जॉन टर्नस का हार्डवेयर इनोवेशन- Apple ने यह साबित कर दिया है कि समय बदल सकता है, लीडर्स बदल सकते हैं, लेकिन कंपनी का मूल मंत्र हमेशा एक ही रहेगा: "Stay Hungry, Stay Foolish."