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आज के टाइम में अगर आपका फोन नेटवर्क काम कर रहा है, गूगल मैप आपको सही रास्ता बता रहा है या देश की सीमाओं पर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जा रही है, तो इसके पीछे सिर्फ एक ही चीज है - हमारे सैटेलाइट्स. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर अंतरिक्ष में चक्कर काट रहा कोई पुराना और खराब हो चुका सैटेलाइट हमारे किसी काम के सैटेलाइट से भिड़ जाए, तो क्या होगा?
यही वो सवाल है जो आज के वैज्ञानिकों और स्पेस एजेंसियों की रातों की नींद उड़ाए हुए है. इसी समस्या से निपटने के लिए अब भारत की जानी-मान-पहचान डिफेंस कंपनी Samtel Avionics और जापान की स्पेस टेक कंपनी BULL ने हाथ मिला लिया है. यह पार्टनरशिप न सिर्फ भारत के मिलिट्री स्पेस को सुरक्षित करेगी, बल्कि ग्लोबल स्पेस मार्केट में भी एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आएगी.

अंतरिक्ष में लगातार क्यों बढ़ रहा है कबाड़ का खतरा?
पिछले कुछ सालों में सैकड़ों सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं. जब इन सैटेलाइट्स का काम खत्म हो जाता है या ये खराब हो जाते हैं, तो इन्हें अंतरिक्ष में ही छोड़ दिया जाता है. अब ये बेकार पड़े सैटेलाइट्स और उनके टूटे-फूटे टुकड़े तेज रफ्तार से धरती के चक्कर काट रहे हैं. इसी मलबे को स्पेस डीब्रिस (Space Debris) कहा जाता है. अगर कोई चालू सैटेलाइट इस कबाड़ से टकरा जाए, तो पल भर में करोड़ों का नुकसान हो सकता है और हमारी फोन-इंटरनेट व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ सकती है. इसी खतरे से निपटने के लिए भारत और जापान ने मिलकर एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है जो इस कबाड़ को साफ करेगा.
Samtel और BULL की पार्टनरशिप का क्या है पूरा प्लान?
WION के डिफेंस पल्स को दिए गए इंटरव्यू में Samtel Avionics के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पुनीत कौरा ने इस डील से पर्दा उठाया है. उन्होंने बहुत ही दिलचस्प बात बताई कि दोनों कंपनियां मिलकर दो अलग-अलग तरीकों से इस पर काम करने जा रही हैं. पुनीत कौरा के मुताबिक, जापान की कंपनी BULL के पास स्पेस कचरे से निपटने का एक पैसिव तरीका है, जबकि हमारी भारतीय कंपनी Samtel के पास इसका एक्टिव तरीका है. जब इन दोनों टेक्नोलॉजी को आपस में मिला दिया जाएगा, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक परफेक्ट और काम करने वाला प्रोडक्ट बन जाएगा. इसके साथ ही, जापानी तकनीक को भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत लाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा.

जापानी कंपनी BULL की 'HORN' टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर जापानी कंपनी का यह सीक्रेट हथियार या तकनीक है क्या? जापान की स्टार्टअप कंपनी BULL ने एक खास डिवाइस बनाया है जिसका नाम HORN रखा गया है. यह एक ऐसा पैसिव डिवाइस है जिसे सैटेलाइट या रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने से पहले ही उसमें फिट कर दिया जाता है. BULL के फाउंडर और सीईओ यासुहितो उतो ने इसके बारे में समझाते हुए कहा कि जब किसी सैटेलाइट का मिशन पूरा हो जाता है, तो इस डिवाइस में से बहुत बड़ी-सी ट्रायएंगुलर मेंब्रेन्स बाहर निकल आती हैं.
यह बड़ी सी झिल्ली अंतरिक्ष के वायुमंडलीय खिंचाव को बहुत ज्यादा बढ़ा देती है. इसकी वजह से वह बेकार और पुराना सैटेलाइट धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचने लगता है और उसकी ऑर्बिट की उम्र कम हो जाती है. नतीजतन, वह कबाड़ बनकर अंतरिक्ष में नहीं घूमता बल्कि समय रहते सुरक्षित तरीके से नीचे आकर नष्ट हो जाता है.
भारत की मिलिट्री सिक्योरिटी के लिए क्यों अहम है यह एग्रीमेंट?
यह डील सिर्फ अंतरिक्ष की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत बड़ी है. आज हमारे देश की सेना अपनी बातचीत, जासूसी और नेविगेशन के लिए पूरी तरह से सैटेलाइट्स पर ही डिपेंड करती है. अगर अंतरिक्ष में यह कचरा इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो हमारे जरूरी सैटेलाइट्स हमेशा खतरे के साए में रहेंगे. इसी बात को ध्यान में रखते हुए Samtel और BULL मिलकर यह रिसर्च कर रहे हैं कि कैसे जापानी HORN तकनीक को Samtel के डिब्रिस रिमूवल व्हीकल के साथ जोड़कर एक पक्का डिफेंस सिस्टम तैयार किया जाए.