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6 करोड़ 60 लाख साल और 5 करोड़ रोज का खर्च... जानिए क्यों अपने ही AI एजेंट्स के चक्कर में मुसीबत में फंसा OpenAI?

AI की ताकत जैसे-जैसे बढ रही है, वैसे-वैसे उससे जुडे खतरे भी सामने आने लगे हैं. अब OpenAI के सामने उसके अपने ही AI एजेंट्स की वजह से ऐसी परेशानी खडी हो गई है, जिसकी जांच पर कंपनी हर दिन करीब 5 करोड रुपये खर्च कर रही है.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 03, 2026, 05:36 PM IST | Updated: Oct 03, 2026, 07:53 PM IST
Image Credit: हगिंग फेस ओपनएआई मामला
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI बनाने वाली कंपनी OpenAI इन दिनों एक बहुत ही बड़ी मुसीबत में फंस गई है. ओपनएआई के अपने ही AI एजेंट्स ने ऐसी समस्या खड़ी कर दी है कि उसे सही करने के लिए कंपनी को हर दिन करीब 5 करोड़ रुपये यानी 5 लाख डॉलर से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं. मामला इतना बडा है कि कंपनी लगभग 50 पेटाबाइट डेटा की जांच कर रही है.  द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर इस पूरे डेटा को सिर्फ अंग्रेजी के टेक्स्ट में बदल दिया जाए तो एक इंसान को इसे पूरा पढने में लगभग 66 मिलियन यानी 6 करोड़ 60 लाख साल लग जाएंगे. यह आंकडा OpenAI ने खुद बताया है.

कंपनी की यह जांच तब शुरू हुई जब उसके AI एजेंट्स से जुडी कुछ ऐसी एक्टिविटी सामने आईं, जो तय तरीके से नहीं होनी चाहिए थीं. इनमें AI प्लेटफॉर्म Hugging Face से जुडा एक मामला और ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट पर बिना अनुमति डेटा तक पहुंचने की घटना शामिल है.

हर दिन 5 करोड रुपये से ज्यादा खर्च

OpenAI के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस समय डेटा की मात्रा है. ओपनएआई के अनुसार जांच में लगभग 50 पेटाबाइट जानकारी शामिल है. एक पेटाबाइट लगभग 10 लाख गीगाबाइट के बराबर होता है. यानी यहां जांच के लिए मौजूद डेटा की मात्रा लगभग 50 मिलियन गीगाबाइट है. OpenAI के अनुसार इस पूरे रिकॉर्ड को चेक करने में हर दिन 500,000 डॉलर से ज्यादा खर्च हो रहे हैं. भारतीय रुपये में यह रकम 4,81,62,750 होती है.

अपने ही AI की जांच में AI की मदद

इतना बडा डेटा इंसानों के लिए अकेले चेक करना आसान नहीं है. इसलिए OpenAI अपनी जांच में AI की मदद भी ले रहा है. कंपनी रिकॉर्ड को महीने के हिसाब से देख रही है और ऐसे मामलों की तलाश कर रही है जहां उसके मॉडल ने इंटरनेट पर कोई ऐसा काम किया हो जिसकी परमिशन नहीं थी. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि AI एजेंट्स ने किसी वेबसाइट को एक्सेस किया या उसमें बदलाव किया या नहीं. इसके साथ ही पासवर्ड, API और दूसरी पर्सनल जानकारियों के साथ किसी तरह की एक्टिविटी हुई या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है.

OpenAI का कहना है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है. कंपनी को शक है कि आने वाले समय में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं. ऐसे में कई और संस्थानों को उन घटनाओं के बारे में जानकारी दी जा सकती है, जो कई महीने पहले हुई थीं.

100 से ज्यादा संगठनों को दी जानकारी

OpenAI अब तक 100 से ज्यादा कंपनियों को ऐसी एक्टिविटी के बारे में जानकारी दे चुका है, जो उसके AI सिस्टम से जुडी थीं. लेकिन कंपनी ने यह भी साफ किया है कि किसी कंपनी को सूचना देने का यह मतलब नहीं है कि वहां से प्राइवेट जानकारी चोरी हुई या उसका सिस्टम हैक हो गया.

कंपनी का कहना है कि अगर उसके मॉडल की एक्टिविटी से किसी सुरक्षा खामी के सामने आने की संभावना भी दिखती है तो वह संबंधित कंपनी को इसकी जानकारी देना बेहतर समझती है. ऐसा वह उस स्थिति में भी कर रही है जब यह पूरी तरह साफ नहीं हो कि किसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई गई थी या नहीं.

Hugging Face वाला मामला सबसे गंभीर

OpenAI के मुताबिक अब तक सामने आए मामलों में Hugging Face से जुडा मामला सबसे गंभीर AI एजेंट गतिविधि है. कंपनी पहले ही बता चुकी है कि इस पूरे मामले की जांच पूरी होने में कई महीने लग सकते हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स सरकार की एक वेबसाइट से जुडा मामला भी सामने आया. OpenAI के अनुसार उसके एजेंट्स ने वेबसाइट पर मौजूद पुराने और गैर सार्वजनिक जंगल की आग से जुडे डेटा को बिना अनुमति एक्सेस किया था.

कंपनी को इस एक्टिविटी का पता मंगलवार को चला. इसके बाद करीब 48 घंटे की जांच के बाद न्यू साउथ वेल्स सरकार और ऑस्ट्रेलियाई सिग्नल्स डायरेक्टोरेट को इसकी जानकारी दी गई.

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AI एजेंट्स को लेकर क्यों बढ रही चिंता

AI एजेंट नार्मल चैटबॉट से आगे जाकर इंटरनेट ब्राउज कर सकते हैं, वेबसाइट खोल सकते हैं, सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर सकते हैं और यूजर की तरफ से कई काम पूरे कर सकते हैं. यही सुविधा अब सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढा रही है. अगर किसी AI एजेंट को इंटरनेट और दूसरे सिस्टम तक ज्यादा पहुंच मिल जाती है और उस पर सही प्रतिबंध नहीं लगे होते हैं, तो वह ऐसा काम कर सकता है जिसकी उम्मीद उसके इस्तेमाल करने वाले ने नहीं की थी.

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About the Author

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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