स्कैम, हैकिंग और साइबर हमले... AI के नाम पर सब झेलना होगा! OpenAI चीफ के इस बयान ने कैसे बजाई खतरे की घंटी?
OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन का मानना है कि अगर पूरी दुनिया को AI के बड़े फायदे उठाने हैं तो कुछ नुकसान झेलने ही पड़ेंगे. उन्होंने ऐसा क्यों कहा, आइए जानते हैं...
OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन ने AI इंडस्ट्री पर बहुत ज्यादा सख्त नियम-कायदे थोपने पर ऐतराज जताया है. उन्होंने एक पॉडकास्ट में साफ कहा कि अगर हमें AI के बड़े फायदे उठाने हैं, तो दुनिया को इसकी छोटी-मोटी गलतियों और कुछ नुकसानों को झेलने के लिए तैयार रहना होगा. इसके साथ ही उन्होंने एडवांस AI मॉडल्स पर भारी पाबंदियां लगाने की वकालत करने वाली अपनी राइवल कंपनी 'एंथ्रोपिक' की सोच से साफ असहमति जताई.
'पॉलिटिको' के साथ एक पॉडकास्ट में ऑल्टमैन ने कहा, 'हम मानते हैं कि इस तकनीक के फायदों और लोगों की सुविधा के लिए दुनिया को कुछ बुरी चीजें होते देखना स्वीकार करना चाहिए.'
ऑल्टमैन ने अपने बयान में कहा, 'हम हमेशा से इस बात के पक्के समर्थक रहे हैं कि इस तकनीक का लोकतंत्रीकरण होना चाहिए और इसे आम लोगों के हाथों में सौंपा जाना चाहिए. हमारा मानना है कि तकनीक के फायदों और लोगों को इसकी शक्ति देने के बदले दुनिया को कुछ बुरी घटनाओं को स्वीकार करना होगा.'
ऑल्टमैन ने दो टूक कहा, 'मैं इस बात का सौदा कभी स्वीकार नहीं करूंगा कि 'हम यह पक्का करेंगे कि कोई बड़ी हैकिंग न हो, इस तकनीक का कतई दुरुपयोग न हो, बिल्कुल घोटाले या स्कैम न हों और अन्य तमाम बुरी चीजें शून्य हो जाएं', क्योंकि मेरा मानना है कि लोग बुरी चीजों की तुलना में कहीं अधिक, कई गुना ज्यादा, अच्छे काम करेंगे.'
कड़े नियमों के बजाय 'हल्के नियमन' की वकालत
दरअसल, कड़े सरकारी शिकंजे के बजाय OpenAI 'हल्के-फुल्के नियमों' के पक्ष में है. ओपनएआई का सुझाव है कि बड़ी AI कंपनियां खुद बाहर के एक्सपर्ट्स से अपने सिस्टम की सिक्योरिटी जांच करवा लें, बस इतना ही काफी है. ऑल्टमैन ने सरकार द्वारा भारी बंदिशें लगाने की मांग का विरोध करते हुए दलील दी कि अगर अभी से इतने कड़े नियम थोप दिए गए, तो दुनिया बदल देने वाली इस नई टेक्नोलॉजी के विकास की रफ्तार ही धीमी पड़ जाएगी.
ऑल्टमैन ने यह भी चेताया है कि AI का इतनी तेजी से बढ़ना दो बड़े खतरे ला सकता है पहला, इंसान खुद AI सिस्टम से अपना कंट्रोल खो बैठे और दूसरा, कोई एक ही कंपनी या ताकत AI के दम पर पूरी दुनिया की बागडोर अपने हाथ में समेट ले. उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाने की मांग की जो आगे चलकर सभी AI कंपनियों के लिए सुरक्षा के एक जैसे नियम तय करे, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कंपनियों को सरकार के कानून बनाने का इंतजार करने के बजाय, अभी से खुद अपने स्तर पर सख्त पाबंदियां लगानी शुरू कर देनी चाहिए.
विनाशकारी खतरों पर चेतावनी
ऑल्टमैन ने भले ही भारी-भरकम नियमों का विरोध किया है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि वह AI से होने वाले किसी बड़े विनाश या तबाही से बचना चाहते हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'जब ऐसा खतरा सामने दिखे कि AI इंसानों के हाथ से ही निकल सकता है, तो मैं तकनीक को आंख मूंदकर तेजी से आगे बढ़ाने की वकालत करने वालों से यही कहूंगा, अंधाधुंध भागने से पहले हमें थोड़ा ठहरकर, संभलकर और सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए.'
ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया है कि 'मेरा कहना है कि उन सीमित और समझे जा सकने वाले जोखिमों को तकनीक के फायदों के बदले स्वीकार किया जाए, जिन्हें हम जानते हैं, लेकिन उन जोखिमों को बिल्कुल स्वीकार न करें जो सचमुच विनाशकारी और प्रलयंकारी साबित हो सकते हैं.'
सुरक्षा चिंताओं के बीच रोका गया नया मॉडल
OpenAI का ChatGPT फिलहाल दुनिया का सबसे पॉपुलर ऐप बना हुआ है, जिसके 1 अरब से भी ज्यादा उपयोगकर्ता हैं. हालांकि बीते कुछ महीनों में कंपनी के नए और एडवांस मॉडल्स को लेकर सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. इनमें ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां कुछ बेकाबू AI एजेंट्स कंपनियों और सरकारी सिस्टम्स पर साइबर अटैक करने लगे थे. इन सुरक्षा खतरों को देखते हुए पिछले हफ्ते कंपनी ने अपना नया 'GPT-6.1 एस्ट्रा' सिस्टम रिलीज करने से रोक दिया, क्योंकि यह उनके अपने तय सेफ्टी पैमानों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया था.
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