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Meta के Muse AI में बड़ी चूक! पर्सनल चैट और बिजनेस रिपोर्ट ऑनलाइन मिलने से मची हलचल, कंपनी ने लिया बड़ा फैसला

Meta के Muse AI की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा हो गया है. साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स को हजारों ऐसे लिंक मिले, जिनसे पर्सनल बातचीत समेत दूसरी चीजें इंटरनेट पर देखे जा सकते थे. मामला सामने आने के बाद कंपनी ने शेयरिंग फीचर पर रोक लगा दी.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 21, 2026, 05:52 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 06:02 PM IST
Image Credit: Muse AI प्राइवेसी चूक
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जहां एक तरफ इंसानों का काम आसान बना रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ जरा सी भी चूक प्राइवेसी पर भारी भी पड़ जाती है. कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, मेटा के नए AI असिस्टेंट Muse AI से जुड़ा हुआ, जिसने यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है. सेफ्टी रिसर्चर्स ने खुलासा किया है कि मेटा के इस टूल में आई एक तकनीकी खामी के कारण हजारों यूजर्स की बहुत ही पर्सनल बातचीत और प्राइवेसी वाले दस्तावेज इंटरनेट पर पहुंच ए. मामला बढ़ते ही कंपनी को आनन-फानन में इसका शेयरिंग फीचर बंद करना पड़ा है.

Ars Technica की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सिक्योरिटी कंपनी Claroc ने जांच के दौरान Muse से जुड़े 6,800 से ज्यादा वेब एड्रेस का पता लगाया. इन लिंक के जरिए शेयर की गई बातचीत तक पहुंचना संभव था. रिसर्चर्स ने इनमें से कई सौ पेज खोले और पाया कि कुछ में ऐसी जानकारियां मौजूद थीं, जिन्हें यूजर शायद पब्लिक नहीं करना चाहते थे. खास बात यह थी कि इनमें से कई पेज देखने के लिए Meta अकाउंट में लॉगिन करने की भी जरूरत नहीं थी.

किन जानकारियों के उजागर होने का था खतरा?

रिसर्चर्स को जांच के दौरान कई संवेदनशील डाक्यूमेंट्स मिले. इनमें एक मार्केटिंग कंपनी की कमाई से जुड़ी रिव्यू, एक छोटे बिजनसमैन का लोन एप्लीकेशन और एक रियल एस्टेट निवेशक की वित्तीय रिपोर्ट शामिल थी. इसके साथ ही एक ऑफिस कैलेंडर भी मिला, जिसमें कर्मचारियों की छुट्टियों की जानकारी दर्ज थी. जांच में AI लैब के एक सीनियर अधिकारी के साथ होने वाली बातचीत की तैयारी से जुड़े नोट्स भी सामने आए. इस तरह की जानकारियां अगर गलत हाथों में पहुंच जाएं, तो लोगों और कंपनियों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

लेकिन, Claroc ने यह नहीं कहा कि इन जानकारियों का किसी ने गलत इस्तेमाल किया है. कंपनी के अनुसार, उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला. साथ ही, रिसर्चर्स ने यह भी साफ किया कि उनकी जांच में सामने आए लिंक से पूरे मामले की सीमा का पता नहीं चलता.

एक सर्च से मिले 6,800 से ज्यादा लिंक

Muse में यूजर्स अपनी बातचीत, तस्वीरों और दूसरे कंटेंट को वेब लिंक के जरिए शेयर कर सकते हैं. समस्या इन लिंक को तैयार करने के तरीके में थी. Claroc के अनुसार, लिंक में बातचीत का छोटा सा डिटेल्स और उसके बाद एक पहचान कोड भी शामिल था. रिसर्चर्स ने इंटरनेट पर दर्ज पुराने डोमेन रिकॉर्ड की सहायता से ऐसे लिंक खोजे. जब कोई शेयर किया गया पेज खुलता था, तो उसका वेब एड्रेस ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज हो सकता था. इन जानकारियों के आधार पर दूसरे लोग भी लिंक का पता लगा सकते थे.

Claroc ने 8 अक्टूबर को इस मामले की जानकारी Meta के बग बाउंटी प्रोग्राम को दी थी. इसके बाद Meta ने फीचर को रोककर मामले का रिव्यू शुरू किया.

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क्या है Meta का Muse AI?

Meta ने 8 सितंबर को Muse को एक नार्मल AI असिस्टेंट के रूप पर पेश किया था. इसका इस्तेमाल फॉर्म भरने, अपॉइंटमेंट बुक करने, खरीदारी करने और डाक्यूमेंट्स तैयार करने जैसे कामों के लिए किया जा सकता है. इन कामों में यूजर की पर्सनल डिटेल्स और अकाउंट से जुड़े डेटा की जरूरत पड़ सकती है. Meta की स्पोक्सपर्सन Tracy Clayton ने द वर्ज से बातचीत में बताया कि Muse में यूजर्स कुछ खास कंटेंट शेयर कर सकते हैं, जिसे लिंक रखने वाला व्यक्ति देख सकता है. कंपनी ने रिपोर्ट की रिव्यू करने और लिंक खोजे जाने के तरीके में बदलाव करने के लिए इस सुविधा को फिलहाल रोक दिया है. 

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About the Author

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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