कैब-फ्लाइट के बाद अब बर्गर पर भी सरचार्ज! McDonald's आपके एरिया को देखकर तय करेगा बर्गर का रेट
ओला-उबर और फ्लाइट्स की तर्ज पर अब मैकडॉनल्ड्स भी बर्गर पर 'सरचार्ज' और 'डायनामिक प्राइजिंग' लागू कर रहा है. जानिए कैसे AI आपका एरिया और 'पेइंग कैपेसिटी' देखकर बर्गर के दाम तय कर रहा है.
आपने कभी बारिश के टाइम पर उबर या ओला बुक की है? अचानक 200 रुपये की राइड 500 रुपये की हो जाती है. त्योहारों के मौसम में फ्लाइट के टिकट अचानक आसमान छूने लगते हैं. इसे हम 'सरचार्ज' या 'डायनामिक प्राइजिंग' कहते हैं और अब तक हम इसकी आदत डाल चुके थे. लेकिन सोचिए, अगर यही सरचार्ज आपके पसंदीदा बर्गर पर भी लगने लगे तो? जी हां, कैब और फ्लाइट्स के बाद अब बर्गर पर भी सरचार्ज का दौर शुरू हो चुका है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मैकडॉनल्ड्स अब एक ऐसा AI एल्गोरिदम इस्तेमाल कर रहा है जो आपका एरिया, आसपास का माहौल और आपकी 'पेइंग कैपेसिटी' देखकर यह तय करेगा कि आपसे बर्गर के कितने पैसे वसूलने हैं.
कैब और फ्लाइट के बाद अब बर्गर पर 'सरचार्ज' क्यों?
हम सब जानते हैं कि जब कैब की डिमांड ज्यादा होती है या बारिश होती है तो उबर और ओला जैसे ऐप्स Surge Pricing लगा देते हैं. इसी तरह फ्लाइट के टिकट भी इस बात पर निर्भर करते हैं कि सीटें कितनी खाली हैं. लेकिन फास्ट फूड इंडस्ट्री में ऐसा कभी नहीं देखा गया था. मैकडॉनल्ड्स का यह नया कदम पूरी दुनिया के कस्टमर्स के लिए किसी झटके से कम नहीं है.
अब कंपनी सीधे तौर पर AI और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर रही है. यह सिस्टम यह नहीं देखता कि बर्गर बनाने में आलू या चीज़ कितनी लगी है, बल्कि यह देखता है कि जिस आउटलेट से आप ऑर्डर कर रहे हैं, उस एरिया के लोग कितना महंगा खाना पचा सकते हैं.
आपका एरिया तय करेगा बर्गर की कीमत
इस पूरे मामले का खुलासा अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक जांच में हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक मैकडॉनल्ड्स एक ऐसा प्लेटफॉर्म यूज कर रहा है जो रियल-टाइम में लाखों डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस करता है.
अगर आप किसी पॉश या हाई-फिआयड इलाके के मैकडॉनल्ड्स आउटलेट में खड़े हैं या वहां से ऐप के जरिए ऑर्डर कर रहे हैं, तो AI समझ जाता है कि यहां के कस्टमर्स 50 से 100 रुपये ज्यादा देने में भी नहीं हिचकिचाएंगे. वहीं अगर आउटलेट किसी नॉर्मल या लो-इंकम इलाके में है तो वहां बर्गर के रेट थोड़े कम रखे जाते हैं. यानी अब आपके खाने का बिल आपकी लोकेशन और उस एरिया की 'अमीरी' तय करेगी.
एक ही शहर में दो अलग-अलग बर्गर के रेट्स
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में एक बहुत ही चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया. एक ही शहर में दो मैकडॉनल्ड्स के आउटलेट्स थे जिनके बीच की दूरी सिर्फ 3 किलोमीटर थी. दोनों ही आउटलेट्स को कंपनी खुद ऑपरेट कर रही थी. लेकिन जब वहां बिग मैक बर्गर का रेट चेक किया गया तो एक जगह उसकी कीमत काफी कम थी और सिर्फ 3 किलोमीटर दूर दूसरे आउटलेट पर वही बर्गर लगभग 100 रुपये महंगा बिक रहा था.
जब लोगों को इस बात का पता चला तो सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. लोग सवाल पूछने लगे कि जब बर्गर का साइज सेम है, उसकी क्वालिटी सेम है और बनाने वाली कंपनी भी सेम है, तो सिर्फ 3 किलोमीटर के फासले पर इतना बड़ा रेट का अंतर क्यों?
AI कैसे भांपता है आपकी 'पेइंग कैपेसिटी'?
इस नए AI एल्गोरिदम का सबसे खतरनाक हिस्सा है - आपकी 'पेइंग कैपेसिटी' यानी पैसे खर्च करने की क्षमता का अंदाजा लगाना. यह मशीन लर्निंग मॉडल केवल एरिया ही नहीं देखता, बल्कि उस आउटलेट की पुरानी बिक्री का पूरा डेटा खंगालता है.
ट्रैफिक और टाइम: किस टाइम पर कस्टमर्स सबसे ज्यादा आते हैं और क्या उस टाइम रेट बढ़ाने से बिक्री घटेगी?
आसपास का कंपटीशन: क्या आसपास कोई दूसरा बर्गर जॉइंट है? अगर नहीं है तो रेट बेझिझक बढ़ा दिए जाते हैं.
कस्टमर बिहेवियर: उस एरिया के लोग महंगे ऑफर्स या बिना डिस्काउंट वाले आइटम्स कितना खरीदते हैं.
इन सब चीजों को एनालाइज करने के बाद AI एक "ऑप्टिमल प्राइस" यानी ऐसा रेट तय करता है जिससे कंपनी का मुनाफा सबसे ज्यादा हो और कस्टमर बर्गर खरीदना बंद भी न करे.
मैकडॉनल्ड्स का तर्क और फ्रेंचाइजी का सच
बवाल बढ़ने के बाद मैकडॉनल्ड्स की तरफ से यह सफाई आई कि यह AI प्लेटफॉर्म सिर्फ एक 'सुझाव' देने वाला टूल है. कंपनी का दावा है कि वे किसी फ्रेंचाइजी मालिक पर रेट जबरदस्ती नहीं थोपते और अंतिम फैसला फ्रेंचाइजी का ही होता है.
लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है. कई फ्रेंचाइजी मालिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी की तरफ से उन पर AI के बताए गए महंगे रेट्स को लागू करने का भारी दबाव रहता है. जो फ्रेंचाइजी AI की बात नहीं मानती, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है. यानी कहने को तो यह सिर्फ सुझाव है, लेकिन असल में यह एक नया नियम बन चुका है.
क्या जोमैटो और स्विगी वाले भारत में भी होगा ऐसा?
भारतीय यूथ के मन में सबसे बड़ा डर यही है कि क्या भारत में भी अब बर्गर पर सरचार्ज लगने वाला है? हम भारत में पहले से ही जोमैटो और स्विगी पर 'रैन सरचार्ज', 'पीक टाइम चार्ज' और 'पैकिंग फीस' जैसी चीजें झेल रहे हैं.
फिलहाल भारत के मैकडॉनल्ड्स में ऐसा लोकेशन-बेस्ड AI प्राइजिंग मॉडल लागू नहीं हुआ है. भारत में अलग-अलग शहरों या मॉल्स के हिसाब से किराए का फर्क होने पर रेट में थोड़ा-बहुत अंतर जरूर होता है, लेकिन वह नॉर्मल बात है. हालांकि, अगर यह AI मॉडल अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों में कामयाब रहता है तो इस बात की पूरी गारंटी है कि आने वाले समय में भारत के मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर में भी इसे टेस्ट किया जाएगा.
कस्टमर्स के लिए क्यों खतरनाक है यह ट्रेंड?
फास्ट फूड पर 'सरचार्ज' या डायनामिक प्राइजिंग का आना एक बहुत ही खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत है.
कस्टमर ट्रांसपेरेंसी खत्म: आपको कभी पता ही नहीं चलेगा कि आप जिस चीज के 300 रुपये दे रहे हैं, उसकी असली कीमत 200 रुपये ही है.
डिजिटल लूट: बिना किसी पूर्व सूचना के AI आपकी मजबूरी या आपकी लोकेशन का फायदा उठाकर आपसे ज्यादा पैसे ऐंठ लेगा.
बजट पर असर: रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों पर अगर सरचार्ज लगने लगा, तो आम इंसान का मंथली बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा.