App

फ्रिज बने 'जिंदा बम'! हैकर्स ने फ्रांस के फूड नेटवर्क को किया पूरी तरह तबाह, प्रधानमंत्री को उतरना पड़ा मैदान में

फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट्स पर हुए एक बड़े साइबर हमले में हैकर्स ने फ्रिज का तापमान 50°C तक बढ़ा दिया, जिससे सारा फ्रेश और फ्रोजन खाना सड़ गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबस्टियन लेकोर्नु ने देश की नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी (ANSSI) को इस हमले की तुरंत जांच करने के आदेश दिए हैं.

फ्रिज बने 'जिंदा बम'! हैकर्स ने फ्रांस के फूड नेटवर्क को किया पूरी तरह तबाह, प्रधानमंत्री को उतरना पड़ा मैदान में
Image Credit: फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट्स पर एक बहुत बड़ा साइबर हमला हुआ.

11 अक्टूबर की रात से लेकर 12 अक्टूबर के बीच फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट्स पर एक बहुत बड़ा साइबर हमला हुआ. इस डिजिटल अटैक का शिकार कोई आम कंप्यूटर सिस्टम नहीं बल्कि सुपरमार्केट्स के अंदर रखा कूलिंग और रेफ्रिजरेशन सिस्टम बना. हैकर्स ने रिमोटली इन सिस्टम्स से छेड़छाड़ करके फ्रिज का तापमान बढ़ाकर सीधे 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया. तापमान इतना ज्यादा होने की वजह से दुकानों में रखा सारा ताजा और फ्रोजन खाना पूरी तरह सड़ गया और कई स्टोर्स में तो आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं.

AFP की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस खतरनाक साइबर हमले ने फ्रांस के बड़े रिटेल ब्रांड्स की नींद उड़ा दी है. जिन सुपरमार्केट्स पर हमला हुआ उनमें इंटरमार्श, कॉपरेटिव यू, कारफोर, ई-लेक्लर्क और मोनोप्रिक्स जैसे नामी ब्रांड्स शामिल हैं. इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में इंटरनेट से जुड़ी हर चीज कितनी ज्यादा संवेदनशील और खतरे में है.

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देश की नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी (ANSSI) को तुरंत इस मामले की जांच करने के आदेश दे दिए हैं. इसके साथ ही फ्रांसीसी अधिकारी यूरोप के दूसरे देशों के साथ भी तालमेल बिठा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह खतरा देश की सीमाओं से बाहर भी फैला हुआ है.

सैकड़ों स्टोर्स हुए प्रभावित और करोड़ों का नुकसान
इस बड़े साइबर हमले का दायरा बहुत बड़ा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकेले इंटरमार्श और नेटो सुपरमार्केट्स के 300 से ज्यादा स्टोर्स पर यह अटैक हुआ. इसके अलावा कॉपरेटिव यू के 100 से अधिक स्टोर्स और कारफोर के लगभग 80 सुपरमार्केट्स इस हमले की चपेट में आए. मोनोप्रिक्स ने बताया कि उनके लगभग 490 स्टोर्स में से करीब 5 परसेंट हिस्से पर इसका असर पड़ा. ई-लेक्लर्क ने भी अपने कई आउटलेट्स पर ऐसी ही गड़बड़ी होने की पुष्टि की है.

दुकानों में तापमान अचानक बढ़ने की वजह से सुपरमार्केट्स को मजबूरी में अपना सारा फ्रेश और फ्रोजन सामान बाहर फेंकना पड़ा ताकि ग्राहकों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो. इंटरमार्श के सीईओ थिएरी कॉटिलार्ड ने फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर्स को बताया कि अकेले एक ही दिन में इस तबाही की वजह से करोड़ों यूरो का नुकसान हो चुका है. कॉपरेटिव यू के सीईओ डोमिनिक शेलचर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने वाले जरूरी उपकरणों पर इस तरह का साइबर हमला पूरी तरह से अस्वीकार्य है.

पुराने डैनफॉस सिस्टम पर उठ रहे हैं सवाल
जांच एजेंसियों की सुई अब डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस द्वारा बनाए गए रेफ्रिजरेशन मैनेजमेंट सिस्टम्स पर टिक गई है. ये ऐसे कनेक्टेड सिस्टम होते हैं जिनकी मदद से सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर का तापमान कंट्रोल किया जाता है और तकनीशियन दूर बैठकर ही इन पर नजर रख सकते हैं. डैनफॉस कंपनी ने खुद यह बात मानी है कि फ्रांस में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें उनके सिस्टम प्रभावित हुए हैं. कंपनी का कहना है कि जिन यूनिट्स पर हमला हुआ वे पुराने फर्मवेयर पर चल रही थीं और उन्होंने ग्राहकों से अपील की है कि वे अपने सिस्टम को जल्द से जल्द अपडेट करें.

यह हमला कोई अचानक हुआ वाकया नहीं है. इससे पहले अगस्त महीने में क्लेरिटी नाम की साइबर सिक्योरिटी फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि डैनफॉस के सिस्टम में कुछ ऐसी कमजोरियां हैं जिनका फायदा उठाकर हैकर्स सिक्योरिटी बाईपास कर सकते हैं.

फ्रांस के बाहर भी मंडरा रहा है खतरा
यह समस्या सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है. सेकोइया थ्रेट डिटेक्शन के सीनियर साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस एनालिस्ट फेलिक्स एइमे के मुताबिक स्पेन, पुर्तगाल, पोलैंड, जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों में भी ऐसे ही मामलों के संकेत मिले हैं. फ्रांस के रिटेल फेडरेशन ने मांग की है कि जांच के दौरान डैनफॉस कंपनी पूरी तरह से पारदर्शी रहे ताकि यह पता चल सके कि असल चूक कहां हुई थी.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के हमले आने वाले समय में बहुत बड़ा खतरा बन सकते हैं. एनालिस्ट स्टीवन लाचेंस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस घटना का दायरा बेहद असामान्य है. जब इंडस्ट्रियल और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम्स में ऐसी खामियां सामने आती हैं, तो इससे सिर्फ दुकानें ही नहीं बल्कि एनर्जी नेटवर्क और अस्पतालों जैसी क्रिटिकल सर्विस भी खतरे में पड़ सकती हैं.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Mohit Chaturvedi

Mohit Chaturvedi

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
Read More