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आजकल AI का इस्तेमाल सिर्फ प्रोजेक्ट्स बनाने या बातें करने में नहीं हो रहा है, बल्कि साइबर ठग भी इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं. Microsoft ने हाल ही में एक ऐसे ही खतरनाक AI चैटबॉट और हैकिंग प्लेटफ़ॉर्म को तबाह किया है, जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा रखा था. 'EvilTokens' नाम के इस प्लेटफ़ॉर्म ने दुनिया भर की 10,000 से ज़्यादा कंपनियों के लगभग 12,000 से अधिक ईमेल अकाउंट्स में सेंध लगा दी थी. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस साइबर हमले में भारत भी मुख्य निशाने पर था. आइए जानते हैं कि यह AI चैटबॉट कैसे काम करता था और टेक दिग्गज Microsoft ने इसे रोकने के लिए क्या-क्या बड़े कदम उठाए हैं.

Microsoft का बड़ा खुलासा: AI से चल रहा था हैकिंग का खेल
टेक्नोलॉजी दिग्गज Microsoft ने एक बहुत बड़े साइबरक्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कंपनी ने एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म को बंद कर दिया है जो AI चैटबॉट की मदद से बड़े पैमाने पर लोगों के ईमेल हैक कर रहा था.
यह सर्विस पूरी तरह से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चल रही थी. यानी हैकर्स पैसे देकर इस AI टूल को किराए पर लेते थे और फिर दुनिया भर की कंपनियों और आम लोगों के ईमेल अकाउंट्स उड़ा देते थे. इस सर्विस का नाम 'EvilTokens' रखा गया था.
Telegram पर बिक रहा था यह खतरनाक AI टूल
EvilTokens सबसे पहले इसी साल फरवरी के महीने में एक Telegram चैनल पर देखा गया था. यह टूल साइबर अपराधियों को बहुत ही आसानी से हैकिंग करने की सुविधा देता था.
इसे इस्तेमाल करने के लिए हैकर्स को शुरुआत में $1,500 (लगभग 1.25 लाख रुपये) देने पड़ते थे. इसके बाद हर महीने $500 (लगभग 41,000 रुपये) का किराया देना होता था. यह टूल एक ही जगह से हैकिंग की पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और ऑटोमेट कर देता था.

सिर्फ मैसेज नहीं, शिकार की पहचान भी करता था AI
Microsoft के मुताबिक यह AI चैटबॉट सिर्फ लोगों को धोखा देने वाले मैसेज या ईमेल ही नहीं लिखता था. यह उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक काम कर रहा था.
यह चैटबॉट शिकार के इनबॉक्स को स्कैन करके यह समझ लेता था कि कंपनी में कौन व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करने का अधिकार रखता है. यह यह भी पता लगा लेता था कि किस अधिकारी का नाम इस्तेमाल करके धोखाधड़ी की जा सकती है. इसके बाद यह AI बिल्कुल असली लगने वाले ईमेल ड्राफ्ट करता था ताकि कर्मचारियों को बेवकूफ बनाकर पैसे ऐंठे जा सकें.
भारत समेत इन देशों पर हुआ सबसे बड़ा हमला
Microsoft ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस हैकिंग नेटवर्क का दायरा बहुत बड़ा था. हालांकि इसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया, लेकिन कुछ देशों पर इसका असर बहुत ज्यादा देखने को मिला.
पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और भारत में देखी गई. यानी भारतीय कंपनियां और यूज़र्स भी इस AI नेटवर्क के सीधे निशाने पर थे.
कौन-कौन से सेक्टर्स हुए इस साइबर हमले का शिकार
इस साइबर हमले ने किसी एक इंडस्ट्री को नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के सेक्टर्स को अपना शिकार बनाया.
इनमें होलसेल डिस्ट्रीब्यूशन, कंस्ट्रक्शन (निर्माण), फ़ाइनेंशियल सर्विसेज, रियल एस्टेट, हायर एजुकेशन (कॉलेज/यूनिवर्सिटीज) और हेल्थकेयर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे. हैकर्स का मकसद इन सेक्टर्स से बड़ा पैसा ऐंठना था.

Smart TV वाली ट्रिक से ऐसे होता था ईमेल हैक
इस पूरे स्कैम के पीछे एक बहुत ही चालाक तरीका इस्तेमाल किया जाता था, जिसे OAuth Device Code Authentication कहते हैं.
यह फीचर असल में Smart TV जैसी डिवाइसेज के लिए बनाया गया था, जिनमें कीबोर्ड नहीं होता. इसमें टीवी पर एक कोड दिखता है, जिसे इंसान को अपने फोन या लैपटॉप के ब्राउज़र में डालना होता है. EvilTokens ने इसी फीचर का गलत इस्तेमाल किया.
वे स्पैम ईमेल भेजते थे जिसमें दिए लिंक पर क्लिक करते ही एक हिडन स्क्रिप्ट चालू हो जाती थी. यह स्क्रिप्ट यूज़र के सामने एक कोड दिखाती थी और Microsoft के ऑफिशियल पोर्टल पर डालने को कहती थी. जैसे ही यूज़र वह कोड डालता था, अकाउंट का एक्सेस सीधे हैकर के पास चला जाता था.
Microsoft और UK पुलिस का तगड़ा एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए Microsoft ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर तुरंत एक्शन लिया. कंपनी ने EvilTokens को चलाने के लिए इस्तेमाल की जा रही 50 वेबसाइट्स को जब्त कर लिया.
इसके अलावा, इस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े 150 से ज्यादा डोमेन को पूरी तरह से डिसेबल कर दिया गया. उधर यूनाइटेड किंगडम में पुलिस के साइबरक्राइम दस्ते ने इस मामले में दो संदिग्ध पुरुषों को गिरफ्तार भी कर लिया है.
साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ा सबक
Microsoft का कहना है कि EvilTokens का पकड़ा जाना यह दिखाता है कि अब साइबर अटैक का तरीका कितना बदल चुका है. हैकर्स अब पुराने सिक्योरिटी फीचर्स को आसानी से चकमा देने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं.
यह घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, संदिग्ध ईमेल पर तुरंत भरोसा न करें और अपने अकाउंट्स पर हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें. AI का ज़माना जितना मददगार है, उतना ही सावधान रहने की भी ज़रूरत है.