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दिल से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी हो जाए और डॉक्टर कहे कि बिना किसी चीर-फाड़ और बिना ओपन हार्ट सर्जरी के आपका इलाज बस 1 घंटे में हो जाएगा, तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद नहीं. लेकिन अब यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं बल्कि बिल्कुल सच होने जा रहा है. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के इंजीनियर्स ने ऐसे नन्हे रोबोट्स तैयार किए हैं जो आपकी नसों के अंदर तैरते हुए सीधे दिल के इंफेक्शन तक पहुंचेंगे और चुटकियों में दवा डिलीवर कर देंगे.
क्या है यह नई नन्हे रोबोट्स वाली टेक्नोलॉजी?
मेडिकल साइंस की दुनिया में एक बहुत बड़ा धमाका हुआ है. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के इंजीनियर्स ने ऐसे बहुत ही छोटे रोबोट्स बनाए हैं जो आपकी पेंसिल की नोक या फिर माचिस की तीली जितने पतले हैं. इनकी लंबाई एक चावल के दाने जितनी ही है. इन रोबोट्स को 'मिलिरोबोट्स' नाम दिया गया है. इन रोबोट्स का काम आपके शरीर के अंदर जाकर बिना किसी बड़े ऑपरेशन के दवा को सीधे उस जगह पहुंचाना है जहां बीमारी का असली गढ़ है. सबसे कमाल की बात यह है कि इसके लिए इंसान के शरीर में कोई बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बस एक छोटी सी सुई चुभाकर इन रोबोट्स को आपकी नसों के अंदर डाल दिया जाएगा.
ओपन हार्ट सर्जरी के डर से अब मिलेगा छुटकारा
आज के समय में जब किसी इंसान को दिल का कोई बड़ा इंफेक्शन होता है, तो उसका इलाज बहुत कठिन होता है. अक्सर मरीज को हफ्ते भर अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है और लगातार ड्रिप के जरिए एंटीबायोटिक दवाइयां देनी पड़ती हैं. लेकिन कई बार खून के बहाव की वजह से यह दवाएं दिल तक पहुंचते-पहुंचते बहुत हल्की हो जाती हैं और असर नहीं कर पातीं. ऐसे में डॉक्टर्स के पास सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं. या तो वे दवा की भारी खुराक दें जो शरीर के दूसरे अंगों के लिए खतरनाक हो सकती है, या फिर मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी करें जिसमें जान का जोखिम और बहुत ज्यादा खून बहने का खतरा रहता है. लेकिन इन नन्हे रोबोट्स की वजह से अब मरीजों को इस डर से पूरी तरह से आजादी मिल सकती है.

यह रोबोटिक जोड़ी कैसे काम करती है?
इन नन्हे रोबोट्स की काम करने की स्टाइल बहुत ही दिलचस्प है. ये रोबोट्स अकेले नहीं बल्कि दो की जोड़ी में काम करते हैं.
पहला रोबोट (नीडल मॉड्यूल): यह रोबोट किसी स्पेस स्टेशन के डॉकिंग स्टेशन की तरह काम करता है. यह आपकी नस से होता हुआ सीधे धड़कते हुए दिल के उस हिस्से पर जाकर चिपक जाता है जहां इंफेक्शन हुआ होता है.
दूसरा रोबोट (ड्रग मॉड्यूल): यह रोबोट असल में दवाई लेकर आता है. यह पहले वाले रोबोट के ऊपर जाकर परफेक्ट तरीके से सेट हो जाता है और धीरे-धीरे दवा को सीधे इंफेक्शन वाली जगह पर छोड़ना शुरू कर देता है.
अगर मरीज को दोबारा दवा की जरूरत होती है तो पहला रोबोट दिल से चिपका रहता है और दूसरा रोबोट नई दवा लेकर आसानी से दोबारा वहां पहुंच सकता है.
बिना बैटरी और मोटर के कैसे चलते हैं ये रोबोट्स?
अब आपके दिमाग में यह सवाल आ रहा होगा कि इतने छोटे रोबोट्स के अंदर बैटरी और मोटर कैसे लगाई गई होगी. तो इसका जवाब यह है कि इन रोबोट्स के अंदर कोई बैटरी या मोटर है ही नहीं. ये रोबोट्स पूरी तरह से मैग्नेटिक यानी चुंबकीय शक्ति पर काम करते हैं. मरीज के शरीर के बाहर एक मैग्नेटिक कॉइल सिस्टम लगाया जाता है जो बिल्कुल MRI मशीन की तरह काम करता है. बाहर से ही वैज्ञानिक इन रोबोट्स को मैग्नेट की मदद से कंट्रोल करते हैं और नसों के अंदर धक्का देकर सही जगह तक पहुंचाते हैं. इस वजह से यह रोबोट्स शरीर के अंदर बिना किसी रुकावट के बहुत आराम से घूम सकते हैं.
हफ्तों का इलाज अब सिर्फ कुछ घंटों या मिनटों में
इस रिसर्च के सबसे खास लेखकों में से एक अनुरुद्ध भट्टाचार्जी का कहना है कि जहां नॉर्मल ड्रिप से इलाज करने में मरीज को 4 से 6 हफ्ते का लंबा समय लग जाता था, वहीं इन रोबोट्स की मदद से पूरा प्रोसीजर सिर्फ 10 मिनट से लेकर 1 घंटे में खत्म हो सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि मरीज का जो इलाज पहले महीनों तक अस्पताल के चक्कर काटने पर होता था, वह अब सिर्फ एक ही दिन में या उससे भी कम समय में आसानी से पूरा हो जाएगा. मरीज को न तो अस्पताल में ज्यादा दिन रुकना पड़ेगा और न ही भारी भरकम मेडिकल बिलों का डर सताएगा.
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का भी होगा पक्का इलाज
साइंटिस्ट्स का मानना है कि यह रोबोटिक टेक्नोलॉजी सिर्फ दिल की बीमारियों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है. भविष्य में इसका इस्तेमाल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिए भी किया जा सकता है. जब कैंसर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैलने लगता है, तो दवाइयों को सही जगह पहुंचाना बहुत मुश्किल होता है. यह छोटे रोबोट्स सीधे कैंसर ट्यूमर के पास जाकर केमोथेरेपी या दूसरी दवाइयां डाल सकते हैं, जिससे शरीर के बाकी स्वस्थ हिस्सों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचेगा और मरीज बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा.
लैब टेस्ट में मिली जबरदस्त सफलता
रिसर्चर्स ने इन रोबोट्स का टेस्ट करने के लिए इंसानी दिल से मिलते-जुलते नकली मॉडल और असली जानवरों के दिल के टिश्यू का इस्तेमाल किया. इन रोबोट्स ने खून के तेज बहाव के बावजूद अपनी मंजिल तक का सफर बहुत ही आसानी से पूरा किया. रोबोट्स ने बिना किसी गलती के सटीक जगह पर जाकर दवा डिलीवर की. अब वैज्ञानिक इन रोबोट्स को और भी ज्यादा रियलिस्टिक धड़कते हुए दिल के मॉडल पर टेस्ट करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि इसे जल्द से जल्द इंसानों के इलाज के लिए मार्केट में लाया जा सके.