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China की ‘Dark Factory’: न कोई कर्मचारी, न लंच ब्रेक, न छुट्टी और न लाइट! यहां रोबोट्स बिना थके बना रहे हैं Smartphone

बिजनेसमैन हर्ष गोयनका ने चीन की अनोखी 'डार्क फैक्ट्री' का वीडियो शेयर कर सबको चौंका दिया है. बीजिंग स्थित Xiaomi की इस फैक्ट्री में बिना लाइट और इंसानों के हर सेकेंड एक स्मार्टफोन बन रहा है. जानिए रोबोट्स और AI की इस नई दुनिया का पूरा सच.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 07, 2026, 07:04 AM IST | Updated: Oct 07, 2026, 07:07 AM IST
Image Credit: China Dark Factory
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ऐसी फैक्ट्री जहां दिन-रात काम चलता हो और इंसान को कोई आहट भी सुनाई न दे. न कोई कॉफी ब्रेक होता है और न लंच ब्रेक. चारों तरफ अंधेरा रहता है और लाइट जलाने की जरूरत नहीं पड़ती. पढ़ते ही आपको हॉलीवुड सीन जैसा लगता है. लेकिन यह पूरी तरह सच है. हमारे पड़ोसी चीन ने इसको हकीकत में बदल दिया है. इसे डार्क फैक्ट्री कहा जाता है. भारत के टॉप बिजनेसमैन हर्ष गोयंका ने इस डार्क फैक्ट्री के बारे में सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस फैक्ट्री में कोई इंसानी वर्कर नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट्स मिलकर बिना एक पल गंवाए कुछ ही सेकंड में स्मार्टफोन तैयार करते हैं.

सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है चीन की ये अनोखी स्टोरी?
हर्ष गोयनका अक्सर सोशल मीडिया पर नई टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया से जुड़े गजब के अपडेट्स शेयर करते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अपने X अकाउंट पर एक इंट्रेस्टिंग जानकारी पोस्ट की. उन्होंने चीन के बीजिंग शहर की शाओमी की एक ऐसी ऑटोमेटेड फैक्ट्री का जिक्र किया जिसे 'डार्क फैक्ट्री' कहा जाता है. हर्ष गोयनका ने लिखा कि इस फैक्ट्री में पूरी प्रोडक्शन लाइन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चलाती है. यहां न तो कोई कर्मचारी फ्लोर पर दिखता है, न कोई लाइट जलती है और न ही काम के बीच कोई ब्रेक लिया जाता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां कुछ ही सेकंड्स में एक नया स्मार्टफोन बनकर तैयार हो जाता है. गोयनका ने यह भी कहा कि इस पूरी व्यवस्था से भारत को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.

 

 

 

क्या होती है यह 'डार्क फैक्ट्री' और यह कैसे काम करती है?
डार्क फैक्ट्री का मतलब कोई गैर-कानूनी या सीक्रेट काम बिल्कुल नहीं है. टेक्नोलॉजी की भाषा में 'डार्क फैक्ट्री' उस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को कहते हैं जहां इंसान की मौजूदगी न के बराबर होती है. चूंकि सारा काम रोबोट्स, मशीनें और AI सिस्टम करते हैं, इसलिए वहां इंसानों की तरह लाइट जलाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती. मशीनें अंधेरे में भी बिल्कुल परफेक्ट काम सकती हैं. बीजिंग के चांगपिंग इलाके में बनी यह शाओमी फैक्ट्री लगभग 81,000 स्क्वायर मीटर में फैली हुई है. यह पूरी तरह से एक ऑटोटोनस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है जिसे बड़े पैमाने पर प्रीमियम और हाई-एंड स्मार्टफोन बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.

बिना इंसानों के कैसे चल रहा है इतना बड़ा प्लांट?
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या वहां सिर्फ रोबोट्स की एक साधारण असेंबली लाइन लगी है? इसका जवाब है नहीं. यह सिर्फ आम रोबोट्स का ग्रुप नहीं है जो एक ही काम बार-बार करते रहें. शाओमी ने इसके लिए एक खास सेंट्रल सिस्टम तैयार किया है जिसका नाम 'Hyper Intelligent Manufacturing Platform' या 'HyperIMP' है. यह प्लेटफॉर्म इस पूरी फैक्ट्री का दिमाग है. फैक्ट्री में लगी हर मशीन लगातार डेटा जेनरेट करती रहती है. HyperIMP इस पूरे डेटा को रियल-टाइम में एनालिसिस करता है. अगर प्रोडक्शन के दौरान कोई छोटी सी भी गड़बड़ी या असामान्यता दिखती है तो यह AI सिस्टम तुरंत उसे पहचान लेता है और प्रोसेस को खुद ही एडजस्ट कर लेता है.

स्पेयर पार्ट्स बदलने से लेकर रिपेयरिंग तक सब कुछ ऑटोमेटिक
इस फैक्ट्री में स्मार्टफोन के छोटे-छोटे पार्ट्स को जोड़ने से लेकर उनकी टेस्टिंग करने और तैयार फोन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का सारा काम ऑटोमेटेड रोबोटिक आर्म्स और सेंसर्स करते हैं. अगर किसी मशीन में कोई खराबी भी आती है तो AI आधारित सिस्टम उसकी समस्या को खुद डायग्नोस कर लेता है और बाकी मशीनों को मैसेज भेजकर काम को री-रूट कर देता है. यही वजह है कि यहां प्रोडक्शन फ्लोर पर किसी इंसान को 24 घंटे खड़े रहने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती है.

फटाफट बनता है नया स्मार्टफोन
इस डार्क फैक्ट्री का सबसे क्रेजी दावा इसकी प्रोडक्शन स्पीड है. शाओमी के अपने ऑफिशियल डेटा के मुताबिक इस चांगपिंग फैक्ट्री की सालाना क्षमता 1 करोड़ स्मार्टफोन बनाने की है. अगर आप गणित के हिसाब से हिसाब लगाएं तो इसका मतलब है कि जब यह फैक्ट्री अपनी फुल कैपेसिटी पर काम करती है तो यहां कुछ ही सेकंड्स में एक पूरी तरह तैयार स्मार्टफोन बनकर बाहर निकलता है. जहां एक आम फैक्ट्री में हजारों वर्कर दिन-रात मेहनत करके महीने में कुछ लाख फोन बना पाते हैं, वहीं यह डार्क फैक्ट्री बिना थके, बिना कोई गलती किए फटाफट नया फोन तैयार कर देती है.

इंसानी नौकरियों के लिए कितना बड़ा खतरा है ये टेक्नोलॉजी?
चीन की इस डार्क फैक्ट्री को देखकर पूरी दुनिया के टेक एक्सपर्ट्स और यूथ के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है. सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में फैक्ट्री वर्क्स से इंसानों की छुट्टी हो जाएगी? एक तरफ जहां इस टेक्नोलॉजी से प्रोडक्शन की स्पीड कई गुना बढ़ जाती है, वहीं दूसरी तरफ इससे इंसानी नौकरियों पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. चीन आज जिस तेजी से AI और रोबोटिक्स को मैन्युफैक्चरिंग में शामिल कर रहा है, उससे आने वाले समय में दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर ऐसा ही सेटअप अपनाने का दबाव बढ़ेगा.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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