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इसी साल दिल्ली पुलिस ने करोल बाग और मोती नगर इलाकों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की. इस कार्रवाई में Oppo, OnePlus और Realme जैसी नामी कंपनियों के नाम से चलाए जा रहे नकली स्मार्टफोन और एक्सेसरीज बनाने वाले कारखानों का भंडाफोड़ हुआ. इससे पहले Nothing ब्रांड के साथ भी मिलकर नकली सामान जब्त किया गया था. आजकल बाजार में असली और नकली फोन के बीच फर्क करना काफी मुश्किल हो गया है. अगर आप भी अपने मेहनत के पैसे बचाना चाहते हैं और धोखा खाने से बचना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके बहुत काम आने वाली है.
स्मार्टफोन असली है या नकली? 4 तरीकों से तुरंत करें पहचान
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन जरा सोचिए कि आप अपनी गाढ़ी कमाई से एक चमचमाता नया फोन खरीदें और बाद में पता चले कि वह नकली है. दिल्ली पुलिस द्वारा करोल बाग और मोती नगर में की गई छापेमारी के बाद यह साफ हो गया है कि बाजार में नकली फोन का जाल काफी गहराई तक फैला हुआ है. इन कारखानों में नामी ब्रांड्स के फर्जी फोन तैयार किए जा रहे थे. धोखाधड़ी से बचने और असली फोन खरीदने के लिए नीचे दिए गए 4 आसान तरीकों को ध्यान से समझें.
1. IMEI नंबर से असली-नकली की जांच करें
किसी भी स्मार्टफोन को सत्यापित करने का सबसे सटीक और आसान तरीका उसका IMEI नंबर जांचना है. IMEI हर मोबाइल का एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है, जिसे बदला नहीं जा सकता.
IMEI कैसे निकालें: अपने स्मार्टफोन का डायल पैड खोलें और *#06# डायल करें. डायल करते ही आपकी स्क्रीन पर IMEI नंबर दिखाई देने लगेगा.
पैकेजिंग और बिल से मिलाएं: अब स्क्रीन पर दिख रहे नंबर को फोन के रिटेल बॉक्स और खरीदे गए बिल पर लिखे नंबर से मिलाएं. यदि तीनों जगह नंबर एक जैसा नहीं है, तो फोन के फर्जी होने की संभावना बहुत अधिक है.
सरकारी पोर्टल का उपयोग: भारत सरकार के CEIR पोर्टल या 'Know Your Mobile' ऐप पर जाकर भी आप अपने फोन की असलियत जान सकते हैं. यह पोर्टल फोन की पूरी जानकारी दे देता है.
2. फोन की पैकिंग और बॉक्स की क्वालिटी देखें
नकली सामान बनाने वाले लोग फोन तो कॉपी कर लेते हैं, लेकिन कंपनी जैसी मजबूत पैकिंग नहीं बना पाते. ओरिजिनल बॉक्स से ही फोन की प्रामाणिकता का पता चल जाता है.
ओरिजिनल बॉक्स की पहचान: असली स्मार्टफोन का बॉक्स मजबूत होता है. इस पर प्रॉपर सील, सीरियल नंबर और सर्टिफिकेशन मार्क्स बने होते हैं.
डुप्लीकेट बॉक्स के लक्षण: नकली फोन के डिब्बे आमतौर पर कमजोर होते हैं. इन डिब्बों पर लिखे गए अक्षरों का रंग फीका होता है, स्पेलिंग में गलतियां हो सकती हैं या लोगो धुंधला दिख सकता है. इसके अलावा अक्सर इन पर वारंटी की जानकारी भी गायब रहती है.
3. हमेशा भरोसेमंद सेलर और सही बिल के साथ ही खरीदें
कई बार बहुत ज्यादा डिस्काउंट या कम कीमत के लालच में लोग अनधिकृत दुकानों से खरीदारी कर लेते हैं. यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है.
जीएसटी बिल जरूर लें: फोन खरीदते समय दुकानदार से जीएसटी वाला पक्का बिल मांगें. अगर कोई विक्रेता बिना बिल के या सिर्फ कच्चे पर्चे पर फोन बेचने की कोशिश कर रहा है, तो यह नकली फोन होने का बड़ा संकेत है.
GSTIN की जांच: आप ऑनलाइन जाकर दुकानदार का जीएसटी नंबर भी चेक कर सकते हैं कि वह मोबाइल बेचने के लिए अधिकृत है या नहीं.
वारंटी कार्ड और रेट: बिल के साथ हमेशा आधिकारिक वारंटी कार्ड जरूर लें. अगर बाजार भाव से बहुत ज्यादा कम कीमत पर नया फोन मिल रहा है, तो समझ जाएं कि मामला संदिग्ध है.
4. सॉफ्टवेयर और फोन की परफॉर्मेंस पर ध्यान दें
एक नकली फोन अंदर से कभी भी असली फोन जैसा काम नहीं कर सकता. इस्तेमाल के दौरान ही उसमें कई तरह की खामियां नजर आने लगती हैं.
सॉफ्टवेयर में दिक्कतें: नकली फोन में ऑपरेटिंग सिस्टम को मॉडिफाई करके डाला जाता है. ऐसे फोन बहुत ज्यादा लैग करते हैं, बार-बार हैंग होते हैं या अचानक ऐप्स बंद हो जाते हैं.
कैमरा और ओवरहीटिंग: डुप्लीकेट फोन के कैमरे की क्वालिटी बेहद खराब होती है और यह जल्दी गर्म होने लगते हैं. इनके बटन भी ढीले हो सकते हैं.
सिक्योरिटी अपडेट्स: असली एंड्रॉयड फोन में समय-समय पर ऑफिशियल सिक्योरिटी अपडेट आते हैं, जबकि नकली फोन में ये अपडेट कभी नहीं मिलते. इसके अलावा गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करने में भी दिक्कत आ सकती है.