जन्म से पहले ही बच्चे का जेंडर पता करने वाली ऑनलाइन जेंडर-टेस्ट किट पर भारत सरकार ने अब पूरी तरह से सख्ती बढ़ा दी है. देश में भ्रूण हत्या रोकने और कड़े नियमों का पालन कराने के लिए सरकार लगातार सख्ती कर रही है. इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय ने टेक कंपनी गूगल को एक कड़ा नोटिस जारी किया है, जिसमें जेंडर-टेस्ट किट Peekaboo से जुड़े सभी सर्च रिजल्ट्स और लिंक्स को भारत में तुरंत ब्लॉक करने की मांग की गई है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला और सरकार क्यों इस पर इतनी सख्त नजर आ रही है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ईबे पर कुछ ऐसी जेंडर-प्रिडिक्शन किट बिक रही थीं, जिनकी डिलीवरी भारत में भी की जा रही थी. इस मामले के सामने आने के बाद अब भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गूगल को नोटिस भेजा है, जिसमें Peekaboo नाम की किट से जुड़े सर्च रिजल्ट्स को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है.
भारत में प्रसव पूर्व लिंग जांच कराना पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में आता है. देश में भ्रूण हत्या को रोकने के लिए साल 1994 में इसके लिए सख्त कानून बनाया गया था. इसके बावजूद, अमेरिकी ब्रांड Peekaboo और SneakPeek जैसी कंपनियों की जेंडर-टेस्ट किट ऑनलाइन भारत तक पहुंच रही थीं.
साइबर सुरक्षा फर्म फाल्कनफीड्स की जानकारी के आधार पर जब रॉयटर्स ने ईबे से संपर्क किया, तो पता चला कि प्लेटफॉर्म पर कई थर्ड-पाटी सेलर्स इन किटों को 6.99 डॉलर यानी 640 रुपये से लेकर 156.59 डॉलर यानी 14,796 रुपये तक की कीमत में बेच रहे थे और भारत में डिलीवरी भी दे रहे थे. मामला तूल पकड़ते ही ईबे ने उन सभी लिस्टिंग्स को अपनी वेबसाइट से हटा दिया. ईबे का कहना है कि यह उनके नियमों और स्थानीय कानूनों के खिलाफ था. वहीं, किट बनाने वाली कंपनी डीएनए डायग्नोस्टिक्स सेंटर ने सफाई दी है कि वे भारत में इन किटों की सेल नहीं करते हैं.
इस मामले को देखते हुए सरकार ने गूगल पर भी सख्ती बढ़ा दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगस्त में गूगल को दो नोटिस भेजे हैं. इन नोटिसों में कहा गया है कि गूगल इंडिया के सर्च इंजन पर कुछ ऐसे रिजल्ट दिखाई दे रहे हैं, जो यूजर्स को सीधे तौर पर अजन्मे बच्चे के जेंडर की जानकारी देने वाली वेबसाइट्स तक पहुंचाते हैं.
मंत्रालय ने गूगल से उन खास सर्च लिंक्स को भारत में ब्लॉक करने को कहा है, जो Peekaboo की उन वेबसाइट से कनेक्ट करते हैं. सरकार का यह कदम देश में अवैध लिंग जांच और उससे जुड़े विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रयासों का हिस्सा है.