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Google Chrome में आया नया फीचर, फर्जी वेबसाइट खोलते ही मिलेगा अलर्ट; साइबर फ्रॉड से बचाएगा नया फीचर

इंटरनेट पर फेक वेबसाइट की सहायता स लोगों के साथ ठगी करने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं. ऐसी वेबसाइटों की पहचान करना कई बार मुश्किल हो जाता है. इसी खतरे से बचाने के लिए Google Chrome ने सेफ्टी फीचर को मजबूत किया है.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 21, 2026, 03:16 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 03:26 PM IST
Image Credit: Chrome नया सेफ्टी फीचर
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आज की डिजिटल दुनिया में साइबर फ्रॉड और हैकिंग के मामले तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं. साइबर ठगी करने वाले लोग फेक वेबसाइट तैयार कर लोगों के साथ ठगी करते हैं. इसी समस्या को दूर करने के लिए Google Chrome एक खास सेफ्टी अपडेट लाया है. अब क्रोम किसी भी खतरनाक वेबसाइट को ओपन करने से पहले ही आपको अलर्ट कर देगा. गूगल ने इस सेफ्टी फीचर को और मजबूत बनाने के लिए अपने नए Gemini AI मॉडल को भी इस सिस्टम से जोड़ दिया है.  

आजकल कई फर्जी वेबसाइट ऐसी होती हैं, जिन्हें देखकर असली और नकली में फर्क करना नार्मल यूजर के लिए आसान काम नहीं होता है. कुछ वेबसाइट लोगों से बैंकिंग डिटेल्स मांगती हैं, तो कुछ वायरस हटाने या ब्राउडर अपडेट करने के नाम पर गलत फाइल डाउनलोड कराने का प्रयास करती हैं. ऐसे में Chrome का नया फीचर यूजर्स को समय रहते अलर्ट कर सकता है.

संदिग्ध और खतरनाक वेबसाइट पर अलग-अलग अलर्ट

Google Chrome अब वेबसाइटों को दो तरह से पहचानने का सिस्टम ला रहा है. पहली लिस्ट में वे वेबसाइटें होंगी, जिन पर शक तो है, लेकिन उनके खतरनाक होने की पूरी पुष्टि नहीं हो पाई है. ऐसी वेबसाइट खोलने पर स्क्रीन पर एक अलर्ट दिखाई देगा. यूजर चाहे तो वहीं से वापस जा सकेंगे. अगर यूजर को लगता है कि वेबसाइट को गलती से संदिग्ध बताया गया है, तो उसे सेफ यानी सुरक्षित भी मार्क कर सकता है.

दूसरी तरफ, जिन वेबसाइटों को Google खतरनाक मानता है, उन्हें खोलने पर Chrome पूरी स्क्रीन पर लाल रंग का अलर्ट दिखाएगा. इस अलर्ट का मकसद यूजर को वेबसाइट पर मौजूद संभावित खतरे के बारे में बताना है. ऐसी स्थिति में वेबसाइट पर आगे बढ़ने के बजाय वापस लौटना ज्यादा सेफ रहेगा.

फर्जी अलर्ट को पहचानने में Gemini करेगा मदद

Google अपने Gemini मॉडल की मदद से ऑनलाइन ठगी के उन तरीकों को भी पहचानने की तैयारी कर रहा है, जिन्हें पकड़ना हमेशा आसान नहीं होता. इसके लिए सर्वर पर चलने वाला Gemini मॉडल वेबसाइट के कंटेंट की जांच करेगा. इस दौरान यह देखा जाएगा कि वेबसाइट किस ब्रांड के नाम का इस्तेमाल कर रही है, वह यूजर से क्या करवाना चाहती है और उसमें धोखाधडी के कितने संकेत हैं. इसके बाद Chrome का Safe Browsing सिस्टम दूसरी सुरक्षा जानकारियों के साथ इन संकेतों को मिलाकर तय करेगा कि चेतावनी दिखानी है या नहीं.

इससे फर्जी एंटीवायरस अलर्ट और नकली ब्राउजर अपडेट के जरिए होने वाली ठगी पकड़ने में मदद मिल सकती है. Google का कहना है कि वेबसाइट के टेक्स्ट की जांच तभी की जाती है, जब ठगी के मजबूत संकेत मिलते हैं. सर्वर पर भेजे गए कंटेंट को अस्थायी रूप से प्रोसेस किया जाता है. कंपनी के अनुसार, इसे सेव नहीं किया जाता और न ही AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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ऐसे ऑन करें नया सेफ्टी फीचर

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए Chrome में Enhanced Protection ऑन करना होगा. इसके लिए ब्राउजर की Settings ओपन करें और Privacy and security में जाएं. यहां Security पर क्लिक करें. अब Safe Browsing सेक्शन में जाकर Enhanced Protection सेलेक्ट कर लें.

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About the Author

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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