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जरा सोचिए, आप जिस AI से अपने ऑफिस के कामों से लेकर मन में आने वाले सवाल का जवाब मिनटों में तलाश लेते हैं, वही एआई अब स्पेस में भी काम करना लगा है! Google ने अपने एक सैटेलाइट के जरिए AI का सफल टेस्ट कर लिया है. सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस सैटेलाइट ने स्पेस में रहते हुए न सिर्फ सवालों के जवाब दिए, बल्कि एक छोटी सी कविता भी लिख डाली.
लेकिन, गूगल के इस कामयाबी के बीच ऐसी समस्या सामने आई है, जो Google के पूरे प्लान पर पानी फेर सकता है. दरअसल, सैटेलाइट में लगे AI चिप्स को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. Google का यह प्रोटोटाइप सैटेलाइट 1 अक्टूबर को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट से लॉन्च हुआ था. इसके साथ 100 से ज्यादा दूसरे स्पेसक्राफ्ट भी स्पेस में भेजे गए थे. लॉन्च के बाद कई हफ्तों तक इसकी जांच चलती रही. अब जाकर इसने पहली बार AI से जुड़ा काम किया है.
गूगल के इस टेस्ट में Google DeepMind के AI मॉडल Gemma 4 का इस्तेमाल किया गया. Gemma 4 मॉडल पहले से ही सैटेलाइट में भेजा गया था. इंजीनियरों ने इससे स्पेस में होने के एक्सपीरियंस पर एक छोटी कविता लिखने को कहा. इसके बाद एआई ने नीली धरती, तारों की रोशनी और डेटा स्ट्रीम का जिक्र करते हुए कविता लिख डाली. कविता लिखने के बाद एआई ने धरती पर भेजा. Google के CEO सुंदर पिचाई ने भी इस कामयाबी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की. उन्होंने इसे Project Suncatcher के लिए हैलो वर्ल्ड जैसा पहला कदम बताया.
सैटेलाइट में Google की चार Tensor Processing Units यानी TPU लगाई गई हैं. ये खास चिप AI से जुड़े काम करने के लिए बनाई गई हैं. लेकिन फिलहाल इन चारों का एक साथ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. दरअसल, सैटेलाइट लगभग 1 किलोवाट बिजली ही पैदा कर पा रहा है. इतनी बिजली चारों चिप चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसलिए एक बार में सिर्फ एक TPU काम कर सकती है और वह भी लगभग 20 मिनट तक. यही इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
A ‘hello world’ milestone for Project Suncatcher After launching our prototype satellite a few weeks ago, we’ve now successfully sent a command up to orbit, booted up the TPU, ran the prompt, and received our first complete response back on earth - a haiku! https://t.co/kOFmETUskm
— Sundar Pichai (@sundarpichai) October 30, 2026
Google अब यह भी देख रहा है कि अंतरिक्ष के रेडिएशन और बदलते तापमान का AI चिप पर कितना असर पड़ता है. रेडिएशन से चिप में सेव डेटा बदल सकता है, जिसे बिट फ्लिप कहा जाता है. अगर शुरुआती परीक्षण अच्छे रहते हैं, तो कंपनी 2027 में दो और सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है. इनमें बिजली बनाने की क्षमता ज्यादा होगी और सैटेलाइट आपस में ऑप्टिकल लिंक के जरिए बातचीत भी कर सकेंगे. Google का इरादा भविष्य में ऐसे सैटेलाइट का नेटवर्क बनाने का है, जो सौर ऊर्जा से चलकर मिलकर बड़े AI काम कर सकें. कंपनी को उम्मीद है कि 2030 के दशक तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर चलाने का यह तरीका किफायती हो सकता है. फिलहाल रास्ता लंबा है, लेकिन पहला टेस्ट सफल होने से इस दिशा में उम्मीद जरूर बढ़ी है.