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Google एक ऐसा फैसला लेकर आया है, जो Android की पूरी दुनिया को हिलाकर रख देगा. Google अपने नए Registered App Stores प्रोग्राम के तहत 1 दिसंबर 2026 से थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर्स को फोन में सीधे एक टैप में ऐप इंस्टॉल करने और बैकग्राउंड में अपडेट देने की इजाजत देने जा रहा है. यानी अब Play Store के अलावा बाकी ऐप स्टोर्स को भी VIP एंट्री मिलेगी. लेकिन क्या यह वाकई यूजर्स की जीत है या इसके पीछे Google का कोई नया मास्टरस्ट्रोक छिपा है?
क्या है यह Registered App Stores प्रोग्राम और इससे आपका क्या फायदा होगा?
अगर आपने कभी अपने फोन में Play Store को छोड़कर Epic Games Store या किसी वेबसाइट से कोई APK डाउनलोड करने की कोशिश की है, तो आपको वो पुराना झंझट अच्छे से याद होगा. पहले फोन की सेटिंग्स में जाकर 'Install Unknown Apps' को ऑन करो, फिर हर छोटी-बड़ी ऐप और उसके हर अपडेट पर 10 बार परमिशन वाले बटन दबाओ.
लेकिन Google के इस नए सिस्टम से यह सारा सिरदर्द एक झटके में खत्म होने वाला है. जो भी ऐप स्टोर Google की शर्तें मानकर 'रजिस्टर्ड' लिस्ट में अपनी जगह बना लेगा, उसे सीधे Android ऑपरेटिंग सिस्टम की खास परमिशन दे दी जाएगी.
सीधे शब्दों में कहें तो, एक बार आपने उस ऐप स्टोर को अपने फोन में जगह दे दी, फिर उसके अंदर से आप किसी भी ऐप को उतनी ही आसानी से एक क्लिक में इंस्टॉल कर सकेंगे, जितनी आसानी से आप Play Store से करते हैं. सबसे बढ़िया बात? बार-बार वो परेशान करने वाले वार्निंग स्क्रीन और पॉप-अप्स आपको बिल्कुल तंग नहीं करेंगे.
सब के लिए खुली छूट नहीं है, रास्ते में खड़ी हैं ये बड़ी शर्तें
अब अगर आप सोच रहे हैं कि कोई भी रातों-रात अपना ऐप स्टोर बनाकर यह VIP सुविधा हथिया लेगा, तो रुक जाइए. Google ने सुरक्षा के नाम पर ऐसी घेराबंदी की है कि हर किसी के लिए इसे पार करना आसान नहीं होने वाला.
अगर किसी भी ऐप स्टोर को यह छूट चाहिए, तो उसे Google की कई कठिन कसौटियों पर खरा उतरना ही पड़ेगा.
सालाना $10,000 की भारी फीस: ख़बरों की मानें तो इस सरकारी लाइसेंस जैसे रजिस्ट्रेशन के लिए ऐप स्टोर कंपनियों को हर साल लगभग 10,000 डॉलर (यानी करीब 8.3 लाख रुपये) की फीस भरनी पड़ेगी.
हर ऐप की बारकी से चेकिंग: स्टोर्स को अपने पूरे ऐप कैटलॉग और आने वाले हर एक नए अपडेट को मालवेयर जांच के लिए सीधे Google को सौंपना होगा.
साफ-सुथरी जानकारी और आसान अनइंस्टॉल: ऐप डाउनलोड करने से पहले यूज़र को डेवलपर का नाम, ऐप का साइज और वर्जन साफ-साफ दिखाना होगा. साथ ही अगर यूज़र ऐप हटाना चाहे, तो उसका रास्ता भी एकदम सीधा होना चाहिए.
अगर कोई भी ऐप स्टोर चालाकी दिखाने या नियम तोड़ने की कोशिश करेगा, तो Google उसे बिना देर किए तुरंत बाहर का रास्ता दिखा देगा.
Google का दिल अचानक इतना दरियादिल क्यों हो गया?
कई लोग सोच रहे होंगे कि जो Google सालों से अपने Play Store के अलावा किसी और को भाव नहीं देता था, वो अचानक से दूसरे स्टोर्स के आगे रेड कारपेट क्यों बिछा रहा है? तो जनाब, इसके पीछे कोई प्यार-मोहब्बत नहीं, बल्कि कोर्ट-कचहरी की एक बहुत भयंकर मार है.
साल 2020 में पॉपुलर गेम Fortnite बनाने वाली कंपनी Epic Games ने Google पर मुकदमा ठोक दिया था. Epic का साफ़ कहना था कि Google Android पर अपनी मनमानी चला रहा है और डेवलपर्स से जबरन 30% तक का मोटा कमीशन वसूल रहा है.
2023 में अमेरिका की जूरी ने अपना फैसला सुनाते हुए Google की इस दादागिरी को गैर-कानूनी ठहरा दिया. इसके बाद कोर्ट की फटकार और लंबी लड़ाई से बचने के लिए, मार्च 2026 में दोनों कंपनियों के बीच एक आधिकारिक समझौता हुआ. इसी समझौते की मजबूरी के तहत Google को झक मारकर Android के दरवाजे बाकी स्टोर्स के लिए खोलने पड़े हैं.
क्या Google अब भी पीछे के दरवाजे से सब कुछ कंट्रोल कर रहा है?
इस नए नियम के आने के बाद भी टेक इंडस्ट्री में खुशियों के साथ-साथ चिंता के बादल भी मंडरा रहे हैं. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि Google ने दरवाजा तो खोल दिया है, लेकिन चाबी अभी भी अपने पास ही रखी है.
जरा सोचिए, जो छोटे-मोटे या इंडिपेंडेंट ऐप डेवलपर्स हैं, क्या उनके पास हर साल 8-9 लाख रुपये फीस देने का बजट होगा? जवाब है - बिल्कुल नहीं. नतीजा यह होगा कि छोटे ऐप स्टोर्स को आज भी उसी पुराने, मुश्किल और परमिशन भरे रास्ते से गुजरना पड़ेगा. इसके अलावा, अपने सारे ऐप्स की चेकिंग Google से करवाना मतलब अपने कॉम्पिटिटर को खुद अपनी एक-एक चीज़ का हिसाब देना है.
Apple के मुकाबले Google का यह दांव कितना अलग है?
अगर हम इसकी तुलना iPhone बनाने वाली कंपनी Apple से करें, तो खेल और भी दिलचस्प हो जाता है. यूरोपीय संघ (EU) के कड़े डिजिटल नियमों और मुकदमों से डरकर Apple को भी मजबूरी में अपने iOS पर दूसरे ऐप स्टोर्स को इजाजत देनी पड़ी है.
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि Apple ने यह कदम सिर्फ उन चुनिंदा देशों में उठाया है जहां की सरकारों ने उस पर कानूनी शिकंजा कसा. इसके उलट, Android में तो पहले दिन से ही बाहर से ऐप्स इंस्टॉल करने का ऑप्शन मौजूद था. Google अब बस उस पुराने तरीके को थोड़ा और आसान और ऑफिशियल बना रहा है.
एक आम यूज़र के तौर पर आपके लिए क्या बदलेगा?
अगर आपके पास एक Android स्मार्टफोन है, तो 1 दिसंबर 2026 के बाद जब आपके डिवाइस में Android 17 QPR2 का नया अपडेट आएगा, तो आपका एक्सपीरियंस काफी स्मूथ होने वाला है.
अब आपको हर छोटी-बड़ी चीज के लिए सिर्फ Play Store के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. अगर आप Epic Games Store या Samsung Galaxy Store जैसे अप्रूव्ड प्लेटफॉर्म्स से कोई गेम या ऐप डाउनलोड करेंगे, तो बिना किसी फालतू परमिशन या डरावनी वार्निंग के काम चुटकियों में हो जाएगा. कुल मिलाकर, Android पर साइडलोडिंग अब कोई 'टेढ़ा काम' नहीं रहेगा, बल्कि आम यूजर के लिए बहुत आसान हो जाएगा.