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ये कैसी शिक्षा व्यवस्था? स्कूल में पढ़ाई नहीं, बच्चों से कराया जा रहा झाड़ू-पोंछा!

दमोह जिले के स्कूलों में एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां छोटे बच्चों से पढ़ाई कराने के बजाय उनसे झाड़ू-पोछा लगवाया जा रहा है और बर्तन धुलवाए जा रहे हैं. मामले में कलेक्टर ने कहा कि जांच कराई जाएगी.

ये कैसी शिक्षा व्यवस्था?  स्कूल में पढ़ाई नहीं, बच्चों से कराया जा रहा झाड़ू-पोंछा!
Image Credit: दमोह में ये कैसी शिक्षा व्यवस्था?

मध्य प्रदेश के दमोह जिले से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करती हैं. यहां एक नहीं बल्कि दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे.  अलग-अलग स्कूलों में मासूम बच्चों के हाथों में किताबें और पेन होने के बजाय झाड़ू, पोंछा और झूठे बर्तन थमाए जा रहे हैं.सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं, तब सरकार और प्रशासन ने दावा किया था कि जिले में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी. इसके बावजूद अब फिर से ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

प्रशासन के दावों की खुली पोल!

पहली घटना दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के झरोली गांव की है. बच्चे वहां के स्थानीय मिडिल स्कूल में पढ़ने जाते हैं. माता-पिता उन्हें इस उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं कि वहां उन्हें अच्छी शिक्षा मिलेगी, लेकिन इस स्कूल में बच्चों से ही साफ-सफाई का काम करवाया जाता है. किसी को झाड़ू थमा दी जाती है, तो किसी को पोंछा. इतना ही नहीं बच्चों से इस्तेमाल किए गए बर्तन भी धुलवाए जाते हैं. स्कूल की इस सच्चाई को कैमरे में कैद किया गया है. यहां सिर्फ एक-दो बच्चे ही नहीं, बल्कि पूरी-पूरी कक्षाओं से स्कूल परिसर की सफाई करवाई जाती है. यह घटना प्रशासन के शिक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती है.

 

स्कूली बच्चों के हाथों में थमाई जा रही झाड़ू

बात सिर्फ एक गांव झरोली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिले के हिंडोरिया पुलिस थाना क्षेत्र में आने वाले हरद्वानी गांव में भी ऐसा ही हो रहा है, जहां बच्चे अपने प्राइमरी स्कूल परिसर में झाड़ू लगाते देखे जा सकते हैं. इन छोटी बच्चियों को झाड़ू लगाने के लिए मजबूर किया जाता है और कुल मिलाकर सभी बच्चों से यह काम करवाया जाता है. स्कूल का स्टाफ सब कुछ देखता है, फिर भी मासूम बच्चों के साथ हो रहे इस दुर्व्यवहार के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाता. ऐसे में इन छोटी बच्चियों के पास ये काम करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचता.

जांच कराई जाएगी- कलेक्टर

झरोली की घटना के संबंध में स्थानीय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने कहा है कि सामने आई तस्वीरें और वीडियो चिंताजनक हैं. इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, हरद्वानी के मामले में जिला कलेक्टर का कहना है कि यहां जो हुआ वो सही नहीं है. मासूमों के साथ ऐसा सुलूक सही नहीं है. इसकी जांच कराई जाएगी.  

महेंद्र दुबे की रिपोर्ट
 

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Ranjana Kahar

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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