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कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर कांग्रेस समेत इंडी गठबंधन मोदी सरकार पर पिछले काफी दिनों से हमलावर है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट का आयोजन भी किया. इसके बाद अब 1 नवंबर को दिल्ली में प्रोटेस्ट मार्च और रामलीला मैदान में रैली करने जा रही है. अब बीजेपी ने 'वोट चोरी' पर कांग्रेस को घेर लिया है. पार्टी ने कहा कि 'वोट चोरी' तो हुई थी लेकिन वह नेहरू ने की थी. जब उन्होंने जनता की पसंद वल्लभ भाई पटेल को ठुकराकर देश के प्रधानमंत्री बन गए थे.
बीजेपी के प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के विरोध पर दिल्ली में प्रेसवार्ता कर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, '...आज खरगे जी वोट चोरी के इस मुद्दे पर बोल रहे थे. मैं खरगे जी से कहना चाहूंगा कि हां, वोट चोरी के दावे में सच्चाई है. वोट चोरी वास्तव में हुई थी.'
#WATCH | Delhi: On the INDIA bloc's symbolic public impeachment program against CEC Gyanesh Kumar, BJP MP Sambit Patra says, "...Today, regarding their allegation of vote theft, as Kharge ji was speaking about this issue of vote theft, I would like to tell Kharge ji: Yes, there is truth to the claim of vote theft. Vote theft did indeed take place. Today is October 31st. It is the birth anniversary of the revered Sardar Vallabhbhai Patel. And if there was ever a vote theft in India, it was committed by the first member of the Gandhi family, Pandit Jawaharlal Nehru, who stole the votes of prominent Congress leaders. Those leaders had cast their votes in a ballot box to elect Sardar Vallabhbhai Patel as Prime Minister. By stealing those votes, Pandit Jawaharlal Nehru became the Prime Minister of the country, an unelected Prime Minister."
— ANI (@ANI) October 31, 2026
संबित पात्रा ने आगे कहा, आज 31 अक्टूबर है. यह आदरणीय सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है. अगर भारत में कभी वोट चोरी हुई थी, 'तो वह गांधी परिवार के पहले सदस्य पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी, जिन्होंने प्रमुख कांग्रेस नेताओं के वोट चुराए थे. उन नेताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री चुनने के लिए मतपेटी में अपने वोट डाले थे. उन वोटों को चुराकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने. एक बिना चुने हुए प्रधानमंत्री.'
संबित पात्रा का इशारा उस घटना की ओर था, जब देश आजाद होने पर कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई थी. उसमें सभी ने एकमत से वल्लभ भाई पटेल को स्वतंत्र भारत का पहला प्रधानमंत्री चुनने का फैसला किया. कहा जाता है कि महात्मा गांधी को यह फैसला रास नहीं आया था. वे अपने चहेते जवाहर लाल नेहरू को देश का पीएम बनवाना चाहते थे.
इस चाहत को पूरा करने के लिए उन्होंने पटेल को अपने पास बुलवाया और कहा कि वे उनसे कुछ मांगना चाहते हैं, मना तो नहीं करोगे. वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि वे उनकी बात को नहीं टालेंगे. इस पर गांधी जी ने कहा कि वे चाहते हैं कि जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बनें. कुछ देर सोचने के बाद पटेल ने उनकी बात में हां कर दिया.
इसके बाद नेहरू के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया और सबके और गुणवान होने के बावजूद पटेल इस दौड़ में पीछे रह गए. हालांकि देश को एक करने और गोवा, जूनागढ़ जैसी रियासतों को आजाद करवाकर भारत में मिलवाने का काम उन्होंने ही किया.