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हिंदू धर्म में हर साल कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है जिसका विशेष महत्व है. संतान की खुशहाली, सुख, बेहतर स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए माताएं इस दिन अहोई माता को समर्पित व्रत रखती है. इस साल अहोई अष्टमी व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा. अहोई अष्टमी पर माताएं दिनभर का उपवास रखकर शुभ मुहूर्त में पूजा करती हैं और कथा सुनती सुनाती हैं. तारों को अर्घ्य देती हैं और इसके बाद व्रत खोलती हैं. आइए जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन कौन-से उपाय करें.
पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि 01 नवंबर को दोपहर 02:51 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 01:10 बजे होगा. इस तरह से 1 नवंबर को अहोई अष्टमी व्रत रखा जाएगा.
पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 04:59 मिनट से लेकर 06:15 मिनट तक
तारों के दर्शन का समय- शाम 05:22 मिनट के करीब
चंद्रोदय का समय- रात 11:05 मिनट पर
अहोई अष्टमी पर शुभ व मंगलकारी पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है.
चंद्रमा खुद की कर्क राशि में होगा.
दूध और चीनी का भोग
अहोई अष्टमी पर संतान की तरक्की व उसके सुख और समृद्धि के लिए एक अचूक उपाय करें. अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता को दूध और चीनी का भोग लगाएं. फिर इस प्रसाद को अपनी संतानों में बांट दें यानी उन्हें पिला दें. संतान की शिक्षा में आ रही परेशानियां दूर होंगी. एकाग्रता बढ़ेगी.
8 हलवा-पूरी का भोग
बुरी नजर से अपनी संतान को बचाने के लिए अहोई अष्टमी व्रत के दिन एक उपाय जरूर करें. अहोई अष्टमी पर माता को 8 हलवा-पूरी का भोग अर्पित करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से संतान के जीवन से सभी तरह की नकारात्मकता का नाश हो जाएगा.
8 घी के दीपक
संतान की लंबी आयु की कामना करते हुए एक अचूक उपाय अहोई अष्टमी व्रत पर कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखें और विधि-विधान से मां अहोई की पूजा करें. शाम के समय पूजा, कथा और तारों के दर्शन करें व अर्घ्य दें. पूजा के समय मां अहोई के सामने 8 घी के दीपक जलाएं. शाम को पीपल के पेड़ के नीचे और तुलसी के पौधे के सामने भी घी का दीपक जलाएं. इस उपाय को करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
(डिस्क्लेमर: यह लेख पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है. उपाय श्रद्धा से जुड़े हैं, किसी परिणाम की गारंटी नहीं.)