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Aadhaar आज देश में पहचान का सबसे जरूरी दस्तावेज बन गया है, ऐसे में इसके डुप्लीकेट होने का भी कई मामले सामने आ चुके हैं. एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से ज्यादा Aadhaar बनना लोगों की चिंता बढ़ाता है. इस तरह के डुप्लीकेट रिकॉर्ड की पहचान करने के लिए अब एक नया ओपन सोर्स बायोमेट्रिक सिस्टम सामने आया है. UIDAI से जुड़े रिसर्चर्स ने Bharat ABIS नाम का यह सिस्टम तैयार किया है, जो फिंगरप्रिंट, आंख की पुतली और चेहरे की पहचान को मिलाकर बड़े डेटाबेस में डुप्लीकेट रिकॉर्ड खोजने में मदद कर सकता है. खास बात यह है कि रिसर्च में इसे बड़े स्तर पर रिकॉर्ड के साथ टेस्ट किया गया है.
इस सिस्टम पर UIDAI के 6 रिसर्चर्स, IIIT Hyderabad के एक रिसर्चर और Michigan State University के बायोमेट्रिक्स एक्सपर्ट्स अनिल जैन ने मिलकर काम किया है. इस रिसर्च का नाम Towards Billion-Scale Multi-modal Biometric Search है.
ABIS का पूरा नाम ऑटोमेटेड बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम है. Bharat ABIS में किसी व्यक्ति की तीन तरह की बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें फिंगरप्रिंट, आंख की पुतली यानी आइरिस और चेहरे की जानकारी शामिल है. इन तीनों जानकारियों को मिलाकर एक बायोमेट्रिक टेम्पलेट बनाया जाता है. इस टेम्पलेट की साइज लगभग 13.5KB बताया गया है. इसके बाद इसे बड़े डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मिलाया जाता है. अगर उसी व्यक्ति का कोई पुराना रिकॉर्ड पहले से मौजूद है, तो सिस्टम उसे पहचानने में मदद कर सकता है.
खास बात यह है कि Bharat ABIS को बड़े डेटाबेस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें एक शेड्यूलर भी है, जो सर्च के काम को अलग-अलग सर्वर में बांट देता है. इससे बहुत ज्यादा रिकॉर्ड होने पर भी सिस्टम पर काम का प्रेशर कम किया जा सकता है.
Bharat ABIS में जरूरत के हिसाब से सिर्फ फिंगरप्रिंट या आइरिस जैसी किसी एक जानकारी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. वहीं रिसर्च के अनुसार फिंगरप्रिंट, आइरिस और चेहरे की जानकारी को एक साथ इस्तेमाल करने पर सिस्टम की सटीकता काफी बेहतर हो जाती है.
रिसर्चर्स ने Bharat ABIS को 22 करोड़ Aadhaar रिकॉर्ड वाले डेटाबेस पर भी चेक किया. लेकिन सिस्टम की ट्रेनिंग इसके मुकाबले काफी छोटे डेटा पर की गई थी, जिसमें करीब 1 लाख से 2 लाख रिकॉर्ड शामिल थे. रिसर्च में इस्तेमाल किए गए डेटा से लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी हटा दी गई थी.
रिसर्च के अनुसार Bharat ABIS का फॉल्स पॉजिटिव आइडेंटिफिकेशन रेट यानी किसी सही रिकॉर्ड को गलती से डुप्लीकेट बताने की दर 0.1 फीसदी रही. UIDAI की तरफ से वेंडर्स के लिए फिक्स टारगेट 0.5 फीसदी का है. वहीं फॉल्स नेगेटिव आइडेंटिफिकेशन रेट यानी मौजूद डुप्लीकेट रिकॉर्ड को पहचान नहीं पाने की दर 0.05 फीसदी रही. इसका फिक्स टारगेट 0.1 फीसदी है. ये आंकड़े 2 करोड़ रिकॉर्ड वाले डेटाबेस के लिए बताए गए हैं.
रिसर्चर्स ने Bharat ABIS की तुलना आधार सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले तीन मौजूदा टूल्स से भी की. रिसर्च के अनुसार 2 करोड़ रिकॉर्ड वाले डेटाबेस पर Bharat ABIS की सटीकता इन टूल्स के बराबर या उनसे बेहतर रही.
Bharat ABIS में इस्तेमाल होने वाला डीपप्रिंट फिंगरप्रिंट मॉडल भी खास ध्यान खींचता है. रिसर्च के अनुसार इसे मौजूदा वेंडर टूल्स के साथ इस्तेमाल करने पर ऑथेंटिकेशन फेल होने के मामलों को करीब आधा किया जा सकता है.
इसका फायदा खास तौर पर ज्यादा उम्र के लोगों और ऐसे लोगों को मिल सकता है जो हर दिन मेहनत वाला काम करते हैं. ऐसे लोगों के फिंगरप्रिंट समय के साथ घिस सकते हैं, जिससे कई बार बायोमेट्रिक पहचान में परेशानी आती है.
रिसर्चर्स के अनुसार Bharat ABIS एक ऐसे सर्वर पर 4 करोड़ रिकॉर्ड वाले डेटाबेस में हर सेकंड लगभग 100 सर्च कर सकता है. इस टेस्ट के लिए 8 Nvidia H100 GPU और 2TB RAM वाले सर्वर का इस्तेमाल किया गया था.
रिसर्च में यह भी कहा गया है कि 2 करोड़ से कम आबादी वाले करीब 160 देशों के लिए यह सिस्टम उपयोगी हो सकता है. ओपन सोर्स होने की वजह से उन देशों के लिए यह खास तौर पर काम का हो सकता है, जो महंगे बायोमेट्रिक सिस्टम खरीदने में सक्षम नहीं हैं.
यहां यह समझना जरूरी है कि Bharat ABIS को लेकर सामने आए रिजल्ट अच्छे हैं, लेकिन रिसर्चर्स ने खुद माना है कि इसे अभी और बड़े स्तर पर टेस्ट करने की जरूरत है.