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बचपन से हम नेशनल ज्योग्राफिक या टीवी शोज में देखते आए हैं कि लकड़बग्घे यानी हाइनाज बहुत चालाक होते हैं. वे शेरों के आसपास मंडराते हैं ताकि जैसे ही शेर शिकार करे, वे उसमें से अपना हिस्सा चुरा सकें. सदियों से वैज्ञानिक भी यही मानते आ रहे थे कि लकड़बग्घे ही शेरों का पीछा करते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक नई वाइल्डलाइफ रिसर्च ने इस सालों पुरानी बात को पूरी तरह झुठला दिया है. अफ्रीका के जंगलों में GPS कॉलर्स और कैमरा ट्रैप्स की मदद से किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि असल में मामला बिल्कुल उल्टा है. जंगल में जब भी इन दोनों का सामना होता है, तो लकड़बग्घे दूर भागते हैं और बब्बर शेर यानी मेल लायन्स उनका पीछा करते हैं.
कैसे शुरू हुई यह अनोखी रिसर्च?
इस रिसर्च की अगुवाई साउथ अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु-नटाल की इकोलॉजिस्ट नैन्सी बार्कर ने की है. नैन्सी जब अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई के दौरान भूरे रंग के लकड़बग्घों पर स्टडी कर रही थीं, तब उन्होंने कई बार देखा कि शेर लकड़बग्घों का पीछा कर रहे थे.
जब उन्होंने यह बात दूसरे एक्सपर्ट्स को बताई, तो सबने उनका मजाक उड़ाया. लोगों ने कहा कि वे उल्टा देख रही हैं और यह महज एक इत्तेफाक है. लेकिन नैन्सी को लगा कि दाल में कुछ काला जरूर है. इस बात की गहराई तक जाने के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक बड़ी रिसर्च शुरू की.
हाई-टेक गैजेट्स का लिया गया सहारा
जंगल के इस रहस्य को सुलझाने के लिए रिसर्चर्स ने नामीबिया के एटोशा नेशनल पार्क और बोट्सवाना के चोबे-लिण्यांती इलाके को चुना. उन्होंने 17 शेरों और 14 स्पॉटेड हाइनाज के गले में GPS और एक्सीलेरोमीटर वाले खास कॉलर्स बांध दिए. इसके अलावा जंगल में जगह-जगह नाइट विजन कैमरा ट्रैप्स भी लगाए गए.
यह पूरी स्टडी 4 साल तक चली. इन GPS कॉलर्स से हर 5 मिनट में जानवरों की लोकेशन का डेटा मिलता था. वैज्ञानिकों ने करीब 3,49,163 GPS लोकेशंस का बारीक विश्लेषण किया ताकि यह समझा जा सके कि जब दोनों जानवर आसपास होते हैं तो कौन किस तरफ जाता है.
GPS डेटा से सामने आया चौंकाने वाला सच
जब इस पूरे डेटा की जांच की गई, तो वैज्ञानिकों के होश उड़ गए. डेटा से साफ पता चला कि 2 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दूरी से ही लकड़बग्घे शेरों से दूर भागने लगते थे.
लगभग हर मामले में लकड़बग्घों ने शेरों से दूरी बनाना ही बेहतर समझा. वहीं दूसरी ओर, बब्बर शेरों का व्यवहार इसके बिल्कुल उलट था. तीन में से हर बार बब्बर शेर यानी मेल लायन्स लकड़बग्घों की तरफ बढ़ते हुए और उनका पीछा करते हुए पाए गए. हालांकि फीमेल लायन्स यानी शेरनियों में यह ट्रेंड थोड़ा अलग था. वे अपने झुंड के हिसाब से फैसला लेती थीं.
रात के अंधेरे में होता था असली खेल
वैज्ञानिकों ने जब अपने कैमरों और नाइट विजन चश्मों से रात के वक्त जंगल का जायजा लिया, तो GPS डेटा की पुष्टि हो गई. रात में बब्बर शेर चुपके-चुपके लकड़बग्घों की लोकेशन ट्रैक कर रहे थे और उनके पीछे-पीछे चल रहे थे. वहीं लकड़बग्घे जैसे ही शेर की गंध पाते या उसे देखते, वे चुपचाप वहां से खिसक लेते थे. इससे यह साफ हो गया कि जंगल में पावर का असली गेम कौन खेल रहा है.
बब्बर शेर क्यों करते हैं लकड़बग्घों का पीछा?
अब सवाल यह उठता है कि जंगल का राजा बब्बर शेर आखिर लकड़बग्घों के पीछे क्यों पड़ता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके दो बड़े कारण हो सकते हैं. पहला कारण यह कि लकड़बग्घे शिकार करने में बहुत माहिर होते हैं. कई बार बब्बर शेर खुद शिकार करने की मेहनत से बचने के लिए लकड़बग्घों के शिकार को छीनने की फिराक में रहते हैं. दूसरा कारण इलाका और वर्चस्व है. बब्बर शेर अपने इलाके में किसी दूसरे बड़े शिकारी की मौजूदगी पसंद नहीं करते, इसलिए वे लकड़बग्घों को डराकर भगाने के लिए उनका पीछा करते हैं.
जंगल के इकोसिस्टम के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई खोज का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लकड़बग्घे कभी शेरों का खाना नहीं चुराते. इसका असली मतलब यह है कि इन दो बड़े शिकारियों के बीच का रिश्ता उतना सीधा नहीं है जितना हम समझते थे. जब भी यह दोनों आमने-सामने होते हैं, तो ताकत का संतुलन हमेशा शेरों के पक्ष में झुका रहता है. इस तरह का व्यवहार इन दोनों प्रजातियों को एक ही जंगल में एक साथ रहने में मदद करता है.