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ऑस्ट्रेलिया के बाद अब कनाडा की सरकारी वेबसाइट पर AI एजेंट का हमला! मचा हड़कंप, जानें पूरा मामला

ऑस्ट्रेलिया के बाद अब कनाडा की सरकारी वेबसाइट पर AI एजेंट्स ने सेंध लगाने की कोशिश की है. बिना इंसानी मदद के खुद काम करने वाले इन सिस्टम्स की बढ़ती शक्ति ने साइबर सिक्योरिटी एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 01, 2026, 06:19 PM IST | Updated: Oct 01, 2026, 06:26 PM IST
Image Credit: कनाडा सरकारी वेबसाइट पर AI हमला
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डिजिटल दुनिया में काम को आसान बनाने के लिए या जल्दी पूरा करने के लिए लोग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल बढ़ाते ही जा रही हैं. एक तरफ जहां यह फायदेमंद है, तो वहीं दूसरी तरफ अब इसके खतरे भी सामने आने लगे हैं. आम लोगों के साथ ही AI की बढ़ती शक्ति अब सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का बड़ा सबब बनती जा रही है. ऑस्ट्रेलिया के बाद अब कनाडा की सरकारी वेबसाइट्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को AI एजेंटों द्वारा निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है. इस मामले ने साइबर सुरक्षा मामलों को लेकर सबको हैरान कर दिया है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि AI एजेंट ने कनाडा की एक सरकारी वेबसाइट तक पहुंच बनाने की कोशिश की. रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च फर्म ट्रांसलूस ने ऐसे दो मामलों का पता लगाया है. दोनों घटनाओं में AI एजेंट ने कनाडा की Library and Archives Canada सरकारी वेबसाइट तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की.

AI एजेंट ने कैसे की पहुंच बनाने की कोशिश?

ट्रांसलूस ने इन घटनाओं की जानकारी कनाडा के अधिकारियों को भी दी है. इसके बाद कनाडा के कनाडियन सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी ने कहा कि उसे AI एजेंट से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट के बारे में जानकारी है.

लेकिन, अधिकारियों की तरफ से यह भी कहा गया है कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह पता चले कि सरकारी सिस्टम वास्तव में हैक हुआ था. यानी AI एजेंट ने वेबसाइट तक पहुंच बनाने की कोशिश जरूर की, लेकिन अभी यह सामने नहीं आया है कि वह सरकारी सिस्टम में सेंध लगा पाए थे.

किस कंपनी का था AI?

इस मामले को लेकर ट्रांसलूस का कहना है कि वे इन कोशिशों को सीधे तौर पर ओपनएआई से नहीं जोड़ते हैं, लेकिन ये तरीके काफी हद तक वैसी ही हरकतों से मिलते-जुलते हैं जो पहले इसी समय के दौरान ओपनएआई से जुड़ी एजेंट गतिविधियों में देखे गए थे.

वहीं, ओपनएआई के प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी उन रिपोर्ट्स को जानती है जिनमें उनके मॉडल्स ने कनाडाई सरकारी वेबसाइटों से पब्लिकली उपलब्ध जानकारी एक्सेस करने की बात कही जा रही है. कंपनी इन फाइंडिंग्स की रिव्यू कर रही है और सरकार की जांच में मदद के लिए कनाडाई अधिकारियों को शुरुआती ब्रीफिंग भी दे दी गई है.

नार्मल चैटबॉट से अलग होते हैं AI एजेंट

AI एजेंट को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह यह है कि ये नार्मल चैटबॉट की तुलना में ज्यादा काम खुद कर सकते हैं. इन्हें किसी इंसान की ओर से हर कदम पर निर्देश देने की जरूरत नहीं होती. ये वेबसाइट खोलने, एप्लिकेशन के साथ काम करने और अलग अलग डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करने जैसे काम खुद कर सकते हैं.

इसी क्षमता का गलत इस्तेमाल होने पर साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ सकते हैं. खासकर तब, जब ऐसे AI एजेंट किसी सिस्टम या वेबसाइट पर बिना जरूरी इंसानी देखरेख के काम करने लगे.

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ऑस्ट्रेलिया में भी सामने आया था ऐसा मामला

कनाडा की घटना से पहले ऑस्ट्रेलिया में भी AI एजेंट से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया था. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने हाल ही में बताया था कि जून में OpenAI के AI एजेंट ने देश के सरकारी हेल्थ डेटा पोर्टल को हैक करने की कोशिश की थी. यह पोर्टल एक सरकारी एजेंसी द्वारा चलाया जाता है और इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च से जुड़ी जानकारी और डेटा मौजूद हैं. लेकिन, ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के मुताबिक इस पोर्टल पर मरीजों की संवेदनशील प्राइवेट जानकारी मौजूद नहीं थी.

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About the Author

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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